हिंदी हैं हम: सोशल मीडिया पर रचनात्मकता को हिंदी के जरिए मिल रहा बल, संरक्षण में सहयोग दे रहे यू-ट्यूबर्स
अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम अभियान’ के तहत शनिवार को आयोजित वेबिनार में दून के युवा यू-ट्यूबर्स ने सोशल मीडिया पर हिंदी की उपोयोगिता को लेकर अपने विचार रखे। युवा ब्लॉगर, संगीतकार, अभिनेता अपने-अपने कार्यों से हिंदी के संरक्षण में सहयोग दे रहे हैं।
विस्तार
सोशल मीडिया पर युवाओं को अपना हुनर दिखाने के लिए मंच मिला तो हिंदी की ताकत दिखी। देहरादून के युवा यू-ट्यूबर्स अपने-अपने कार्यों से सोशल मीडिया पर हिंदी की ताकत को रेखांकित कर रहे हैं। उनका मानना है कि क्षेत्रीय भाषा में उनके द्वारा की जा रही रचनात्मकता को भी हिंदी भाषा के जरिए बल मिल रहा है।
अमर उजाला के ‘हिंदी हैं हम अभियान’ के तहत शनिवार को आयोजित वेबिनार में दून के युवा यू-ट्यूबर्स ने सोशल मीडिया पर हिंदी की उपोयोगिता को लेकर अपने विचार रखे। युवा ब्लॉगर, संगीतकार, अभिनेता अपने-अपने कार्यों से हिंदी के संरक्षण में सहयोग दे रहे हैं।
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हिंदी गाने सुनकर उत्साहित होते हैं विदेशी दोस्त : नवप्रभाग फरस्वाण (एक्टर, सिंगर)
मैं हिंदी और गढ़वाली में गाने गाता और बनाता हूं। साथ ही अभिनय भी करता हूं। मैं कुछ समय पहले ऋषिकेश में था, यहां मेरे कुछ विदेशी दोस्त भी हैं, जिन्होंने यहां रहकर हिंदी सीखी। हिंदी गाने सुनने की उनकी फरमाइश रहती है। वो भी हमारे पुराने बॉलीवुड गाने। जितना समय मैं उनके बीच में गुजारता हूं, वो हमेशा हमारी संस्कृति को जानने के लिए उत्सुक रहते हैं। गढ़वाली के साथ ही मैं हिंदी के जरिए सोशल मीडिया पर अपना दायरा बढ़ा पाया। मैं समझता हूं कि हमारी मातृभाषा हिंदी में बहुत ताकत है। बाहरी संस्कृति अपनाने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन अगर हमें लगता है कि दूसरी संस्कृति अपनाकर हम ज्यादा सभ्य नजर आएंगे तो यह गलत है।
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हिंदी से गैर हिंदी क्षेत्रों में भी कर सकते हैं संवाद : आकृति थापा (आरजे)
सोशल मीडिया पर अब हर तरह के दर्शक हैं। यहां भाषा की कोई दीवार नहीं है। मेरा अब तक का अनुभव कहता है कि आप चाहे किसी भी जगह चले जाएं। उस क्षेत्र में बोली जाने वाली भाषा भले ही आपको नहीं आती हो, लेकिन अगर आपको हिंदी आती है तो आप वहां के लोगों से आसानी से संवाद कर सकते हैं। बड़े बुजुर्गों से भी आप आसानी से हिंदी के जरिए संवाद कर सकते हैं। मेरा हिंदी को लेकर हमेशा प्रेम रहा है। यही वजह है कि मैं अपने कार्यक्रम या ब्लॉगिंग हिंदी में ही करना पसंद करती हूं।
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गीतों के प्रचार के लिए हिंदी का ही लेता हूं सहारा : रोहित चौहान (गायक)
अपने गीतों के जरिए उत्तराखंड की संस्कृति को देश-दुनिया के मंच पर पहचान दिलाने के लिए प्रयासरत हूं। इसलिए जरूरी है कि पहाड़ के अलावा भी बाहर के लोग हमारे गीतों को सुनें। हिंदी के जरिए ही हम ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंच सकते हैं। अपने पहाड़ी गीतों के प्रचार-प्रसार के लिए मैं हिंदी का ही सहारा लेता हूं। क्षेत्रीय दर्शकों के अलावा हिंदी भाषी लोग ही हमारे बड़े दर्शक हैं। मैं ब्लॉगिंग भी करता हूं। हिंदी के जरिए ही मैं अपनी रचनात्मकता को ज्यादा लोगों तक पहुंचा पा रहा हूं।
पढ़ाई समझने के लिए हिंदी में ही बनाती हूं नोट्स : नाओमी नौरियाल
कथक डांसर, कलाकार, यू-ट्यूबर नाओमी नौरियाल बताती हैं कि वह एबीआरएसएम लंदन से पियानो कोर्स भी कर रही हैं। कोर्स की भाषा अंग्रेजी है, लेकिन उन्हें इसे समझने के लिए नोट्स हिंदी में ही बनाने पड़ते हैं। बतौर नाओमी मैं हिंदी में ही ज्यादा सहज महसूस करती हूं। 12वीं की छात्रा यू-ट्यूबर नाओमी नौरियाल उत्तराखंड के बॉलीवुड कलाकारों का इंटरव्यू लेती हैं। उनका कहना है कि वह उत्तराखंड को आगे बढ़ाना चाहते हैं इसलिए हिंदी और क्षेत्रीय भाषा आनी चाहिए। कलाकारों के इंटरव्यू के वक्त भी वह हिंदी में ही बात करने पर विशेष जोर देती हैं।
हिंदी से राज्य के बाहर भी बना पाया पहचान : दीपक चमोली
मैं हिंदी को इस बात का श्रेय दूंगा कि मैं राज्य के बाहर भी लोगों के बीच अपनी पहचान बना पाया हूं। क्षेत्र में हम अपनी स्थानीय भाषा का प्रयोग करते हैं, लेकिन जब बाहर जाते हैं तो अंग्रेजी बोलने में सहज नहीं होते हैं। ऐसे में हिंदी के जरिए ही हम आत्मविश्वास के साथ अपनी बात रखते हैं। सोशल मीडिया पर भी हिंदी का प्रयोग मुझे प्रभावी लगता है। अब मैंने हिंदी गाने बनाने में शुरू किए है। मैं समझता हूं कि इसके जरिए हिंदी भाषी बड़े तपके के बीच मैं अपनी पहचान ज्यादा गहरी बना सकती हूं।
हिंदी में ज्यादा आसानी से रख पाता हूं अपने विचार : पंकज सती
कलाकार पंकज सती का कहना है कि सोशल मीडिया पर हिंदी ताकत बनकर उभरी है। इसका खास कारण यह भी है कि अब सोशल मीडिया पर केवल युवा वर्ग ही सक्रिय नहीं है, बल्कि हर वर्ग चाहे वह बुजुर्ग हो या महिला। हर कोई इंटरनेट पर सक्रिय है। वह अपनी सहजता के हिसाब से अपने लिए कंटेंट चाहता है। जाहिर तौर पर हिंदी कंटेंट पढ़ने और देखने वालों की संख्या भी भारी तादाद में है। इसलिए भले ही इंटरनेट पर अंग्रेजी का साम्राज्य हो, लेकिन हिंदी भाषा बड़ी ताकत बनकर उभरी है। मैं आज भी हिंदी में ही अपने विचारों को ज्यादा आसानी से रख पाता हूं।
हिंदी में ब्लॉगिंग करना रहा फायदेमंद : पार्थ गुसांई, दीक्षांत बिष्ट
ट्रेवल ब्लॉगर पार्थ गुसांई और दीक्षांत बिष्ट की यू-ट्यूब पर अच्छी खासी फैन फॉलोइंग है। वह हिंदी में बनाए ब्लॉग के जरिए खुद की पहचान बनाने के साथ ही राज्य की खूबसूरती से लोगों को रूबरू करा रहे हैं। बतौर पार्थ और दीक्षांत हम हिंदी में ही अपने ब्लॉग बनाते हैं, क्योंकि हमारे ज्यादा दर्शक हिंदी के है। कहते हैं कि युवा वर्ग अलग-अलग जगहों पर जाना पसंद करता है। अच्छी जगहों की तलाश के लिए वह सोशल मीडिया से ही जानकारी जुटाता है। इस बीच हमने देखा कि हमारे हिंदी में बनाए गए ब्लॉग को अंग्रेजी में बनाए ब्लॉग की तुलना में ज्यादा पसंद किया गया। इसके बाद से हमने हिंदी में ब्लॉगिंग शुरू की।