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हिंदी हैं हम: कई भाषाओं में अच्छी पकड़ रखने वाली इस अभिनेत्री ने कहा- हिंदी साहित्य को पढ़कर देखिए, इश्क हो जाएगा

Sat, 04 Sep 2021 01:06 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
न्यजू डेस्क, अमर उजाला, देहरादून Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Sat, 04 Sep 2021 01:06 PM IST
सार

Hindi Hain Hum: बॉलीवुड के साथ ही फ्लोरा सैनी ने दक्षिण भारतीय फिल्में भी की हैं। जिस कारण तेलगू और कन्नड़ भाषा पर भी उनकी अच्छी पकड़ है। वह पंजाबी परिवार से है। दिल्ली से उनकी पढ़ाई हुई। तेलगू, कन्नड, पंजाबी व अंग्रेजी भाषा आने के साथ ही वह हिंदी को अपनी प्राथमिकता रखती है।

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hindi hain hum: Actress Flora Saini said after reading Hindi literature you will feel love
अभिनेत्री फ्लोरा सैनी - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

‘हिंदी के लेखकों की किताब पढ़कर तो देखिए, मेरा यकीन माने इन किताबों से आपको इश्क हो जाएगा। मैंने लॉकडाउन में खासतौर पर हिंदी की किताबें पढ़ीं और मेरी पढ़ने की उत्सुकता बढ़ती गई। हिंदी के लेखक कितना कुछ पहले ही लिख चुके हैं। मेरे मन में एक ही सवाल था मैंने इन किताबों को पढ़ने में इतनी देर क्यों की। यह कहना है कि अभिनेत्री फ्लोरा सैनी का। जोकि इन दिनों दून और मसूरी में अपनी नई फिल्म की शूटिंग कर रही है। शूटिंग अभी कुछ दिन और चलेगी। 

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बॉलीवुड के साथ ही फ्लोरा सैनी ने दक्षिण भारतीय फिल्में भी की हैं। जिस कारण तेलगू और कन्नड़ भाषा पर भी उनकी अच्छी पकड़ है। वह पंजाबी परिवार से है। दिल्ली से उनकी पढ़ाई हुई। तेलगू, कन्नड, पंजाबी व अंग्रेजी भाषा आने के साथ ही वह हिंदी को अपनी प्राथमिकता रखती है।
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अमर उजाला से बातचीत में फ्लोरा ने बताया कि वह अधिकतर हिंदी में ही बात करना पसंद करती हैं। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने हिंदी की कुछ किताबें पढ़ी और इसके बाद वह रुकी नहीं। वह कहती हैं कि एक किताब पढ़ने के बाद मैंने दूसरी पढ़ी और जब तक वह पूरी नहीं हुई मैं कुछ और नहीं कर पाई। 
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फ्लोरा ने बताया कि जब मैं यह किताबें पढ़ रही थी तब मुझे ये महसूस हुआ कि हमारे हिंदी के लेखकों को कितना कुछ पहले ही लिख दिया है। जोकि हम आज महसूस कर रहे है। हिंदी साहित्य कितना समृद्ध है। यह मुझे पढ़ने के बाद आभास हुआ। बताया कि उन्होंने इस बीच दिव्य प्रकाश दुबे द्वारा लिखी मुसाफिर कैफे और सत्य व्यास की उफ्फ कोलकाता पढ़ी है। इसके अलावा भी उनकी लिस्ट में और भी किताबें है, जिन्हें वह अभी पढ़ेंगी। वह कहती है कि आज काम समय डिजिटल हो गया है, इसलिए किताबों से भी दूरी हो रही है, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। 


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मायूस दोस्त को समझाया अंग्रेजी में जवाब देने की जरूरत नहीं
बतौर फ्लोरा एक बार मुंबई में ऑडिशन के बाद लौटी मेरी एक दोस्त बहुत मायूस थी। पूछने पर उसने बताया कि आडिशन में मुझसे अंग्रेजी में सवाल पूछा गया। मैंने जवाब तो दिया, लेकिन मेरी व्याकरण सही नहीं होने की वजह से सभी मुझ पर हंसने लगे। फ्लोरा ने बताया कि मैंने अपनी दोस्त से कहा कि उसे अंग्रेजी में जवाब देने की जरूरत ही नहीं थी। हम बॉलीवुड फिल्म इंडस्ट्री में काम करते हैं। और यहां हिंदी में फिल्म बनती है। तो हिंदी अच्छी होनी चाहिए। 

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बेस्ट जॉब, बेस्ट सैलरी लेकिन खुश नहीं आज लोग
लोगों के अच्छी जॉब है। अच्छी सैलरी, लेकिन फिर भी वह खुश नहीं है। फ्लोरा की आने वाली फिल्म कुछ इसी पर आधारित है। जिसमें बताया गया है कि परिवार और समाज के दबाव में आकर बच्चा उनके अनुसार अपने भविष्य की राह चुनता है। उसे सबकुछ मिलता भी है, लेकिन बस खुशी नहीं मिलती। 

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