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सामूहिक दायित्व की सोच से ही सहेज पाएंगे हिमालय

Sat, 09 Sep 2017 11:10 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Sat, 09 Sep 2017 11:10 PM IST
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himalaya will save only with unity
cm trivendra

हिमालय दिवस पर आयोजित राज्य सतत पर्वतीय विकास शिखर सम्मेलन के पहले दिन उद्घाटन सत्र में सभी ने एक स्वर में कहा कि सामूहिक दायित्व के सोच से ही हिमालय को सहेजा जा सकता है। अलग-अलग टुकड़ों में प्रयास करने के बजाए सारे लोग एकजुटता से अभियान छेड़ें, तभी समाधान निकलेगा। इस मौके पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पी-थ्री और सी-थ्री का फार्मूला बताकर स्पष्ट कर दिया कि केवल सरकार की चिंता से समाधान नहीं निकलेगा। हिमालय हमारे सरोकारों से जुड़ा है, इसमें अधिकतम जनसहभागिता जरूरी है।

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दो दिवसीय शिखर सम्मेलन शनिवार को हरिद्वार रोड स्थित एक होटल में शुरू हुआ। उद्घाटन सत्र में सीएम रावत ने हिमालय के विकास के लिए सी-थ्री (केयर, कंजर्वेशन, कोआपरेशन) और थ्री-पी (प्लान, प्रोड्यूस और प्रमोट) का फार्मूला सुझाया। इसके साथ ही घोषणा की कि हिमालयी क्षेत्र में पौधारोपण के लिए दो कंपनी इको टास्क फोर्स गठित करेंगे। इसमें दो सौ पूर्व सैनिकों को भर्ती किया जाएगा। पांच सालों में इसमें 50 करोड़ खर्च होगा।
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हिमालय को सनातन संस्कृति और देश की गंगा जमुना तहजीब का उद्गम बताया और कहा कि सामरिक सुरक्षा के लिए हिमालय बहुत महत्वपूर्ण है। पीएम नरेंद्र मोदी के वाराणसी में कथन कि मुझे मां गंगा ने बुलाया है का जिक्र करते हुए कहा कि बिना हिमालय के गंगा की कल्पना नहीं कर सकते। रावत ने कहा कि सीमांत गांवों में लोगों की आय बढ़ाने के लिए अखरोट और चिलगोजा के पौधों का रोपण किया जाएगा। इस मौके पर हैस्को के संस्थापक पद्मश्री डॉ. अनिल जोशी ने ‘कंज्यूमर्स मस्ट बी कंट्रीब्यूटर्स’ का सूत्र देते हुए कहा कि देश के सारे लोग हिमालयी चिंतन में भागीदार बनें।
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इस क्षेत्र में काम कर रहे लोग मतभेदों में न पड़ते हुए एकमत होने का कारण ढूंढें। हिमालय को भोगने वालों ने कभी सामूहिक चिंतन नहीं किया। कार्यक्रम में परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद सरस्वती ने दुनिया के कई देशों से तुलना कर हिमालयी सुंदरता को अव्वल बताया और हिम-आलय के स्थान पर हम-आालय का सूत्र दे एकजुटता की जरूरत बताई। इंटीग्रेटेड माउंटेन इनीशिएटिव (आईएमआई) के सचिव सुशील रमोला ने भी एकजुटता पर जोर दिया और कहा कि फुटकर बातचीत से कुछ नहीं होने वाला, सतत विकास के लिए सारे स्टेकहोल्डर्स साथ आएं।


सत्र की शुरुआत में अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह ने जलवायु परिवर्तन से होने वाले नुकसान के संबंध में बताया और कहा कि प्रदेश में पलायन से सबसे ज्यादा आबादी अल्मोड़ा और पौड़ी की घटी है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने ‘हिमालय दिवस’ पत्रिका और ‘ट्रांसफॉर्मिंग उत्तराखंड’ वेबसाइट का विमोचन किया। इस मौके पर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने मुख्यमंत्री रावत और हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक को रुद्राक्ष के पौधे भेंट किए।

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