Himalaya Diwas 2020: हिमालय की सुरक्षा और संरक्षण के हर पहलू पर काम करने के लिए बनेगा केंद्र
- दिल्ली में आयोजित वेबिनार में हुआ फैसला, सभी स्टेक होल्डर भी आएंगे एक मंच पर
- उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने भी दिया मिलजुलकर काम करने का संदेश
- वेबिनार में सामरिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक रूप से स्वीकार किया गया हिमालय का महत्व
- जताई गई हिमालय के सामने बढ़ रहे संकट पर चिंता, विकास के मॉडल को फिर से देखने पर जोर
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हिमालय के संरक्षण के लिए अब सामूहिक रूप से काम करने की तैयारी शुरू कर दी गई है। बुधवार को दिल्ली में आयोजित मुख्य समारोह में हिमालय के संरक्षण के लिए एक ऐसे केंद्र के गठन का फैसला किया गया, जिसमें हिमालय की सुरक्षा और संरक्षण से जुड़े सभी पहलुओं पर काम किया जा जाए। इसके साथ ही एक ऐसे संगठन को बनाने पर भी सहमति बनी जिसमें हिमालय से जुड़े सभी स्टेक होल्डर शामिल हों।
दिल्ली के एआइसीटीई सभागार में आयोजित समारोह में वर्चुअल जुड़े उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने हिमालय को सामरिक, आध्यात्मिक, सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया। उप राष्ट्रपति ने कहा कि हिमालय में करीब 36 बायोलॉजिकल हॉट स्पाट हैं।
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हिमालय न होता तो भारत मरुस्थल होता। उप राष्ट्रपति ने कहा कि हिमालय इस समय संकट का सामना कर रहा है। इस तरह की उपेक्षा को जारी नहीं रखा जा सकता। हिमालय के संदर्भ में विकास के मानकों पर पुनर्विचार करना होगा।
उप राष्ट्रपति ने किया मिलकर काम करने का आह्वान
उप राष्ट्रपति ने हिमालय दिवस पर मिलकर काम करने का आह्वान भी किया और कहा कि हम प्रकृति का संरक्षण करेंगे तो प्रकृति हमारा संरक्षण करेगी। वेबीनार का संचालन केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने किया।
हैस्को के संस्थापक निदेशक पद्मभूषण अनिल जोशी ने बताया कि हिमालयी केंद्र और मंत्र के गठन के लिए दिशा निर्देेश तय करने की जिम्मेदारी उन्हें सौंपी गई है। वेबिनार में कई केंद्रीय मंत्री, प्रधानमंत्री के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, अजित डोभाल सहित अन्य कई शामिल हुए।
उपराष्ट्रपति को भेंट की ‘संसद में हिमालय’ किताब
केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने अपनी किताब ‘संसद में हिमालय’ उप राष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू को भेंट की। इस किताब में निशंक ने संसद में हिमालय से संबंधित उठाए गए मुद्दों का जिक्र किया है।
किसने क्या कहा
-रमेश पोखरियाल निशंक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री
हिमालय को केंद्र में रखते हुए वैज्ञानिक और आधुनिक ज्ञान, प्रौद्योगिकी आदि पर भी काम किया जा रहा है। हिमालय महत्वपूर्ण है और यह महसूस भी किया जा रहा है।
-विजय राघवन, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार
सामरिक रूप से हिमालय का महत्व बहुत अधिक है। हिमालय की सुरक्षा सिर्फ सामरिक ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक, सांस्कृतिक सुरक्षा भी है।
-अजित डोभाल, राष्ट्रीय सुुरक्षा सलाहकार
हिमालय देश की आस्था, आत्मीयता और आर्थिकी का केंद्र है। हिमालय के सामने कई संकट हैं। जिस तरह से आर्थिक विकास के लिए हम जीडीपी से जुुड़े हैं, उसी तरह से जीवन के लिए हमें जीईपी या सकल पर्यावरणीय उत्पाद से हमें जुड़ना होगा।
-पदमभूषण अनिल जोशी, संस्थापक निदेशक हैस्को
पूरे प्रयास किए जा रहे हैं कि हिमालय के लिए संसाधन जोड़े जाएं। वैज्ञानिक तरीके से विकास और पर्यावरण में संतुलन की जरूरत है।
-डा. जितेंद्र सिंह, केंद्रीय मंत्री
हिमालय को सुंदर और स्वच्छ भी होना चाहिए। हिमालय की यूएसपी भी यही है। कोई जाए तो उसे स्वच्छता का पूरा अहसास होना चाहिए।
- किरन रिजिजू, केंद्रीय मंत्री
हिमालयी राज्यों को विकास के मॉडल पर भी बात करनी होगी। हिमाचल को इस मामले में देखा जा सकता है। हिमाचल ने खेती, किसानी, बागवानी आदि में बेहतर काम किया है।
-अनुराग ठाकुर, केंद्रीय मंत्री
नीति आयोग हिमालय के संरक्षण के लिए तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओें पर काम कर रहा है। आयोग की ओर से सभी हिमालयी राज्यों से बात भी की जा रही है। यह सही है कि हिमालय की सुरक्षा और संवर्द्धन के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा।
-राजीव कुमार, उपाध्यक्ष नीति आयोग
हिमालय को जनोन्मुखी सतत समावेशी विकास नीति की जरूरत
हिमालय दिवस पर हिमालय बचाओ आंदोलन के संयोजक किशोर उपाध्याय ने कहा कि मध्य हिमालय के विकास के लिये एक जनोन्मुखी सतत समावेशी विकास की नीति की आवश्यकता है।
उपाध्याय ने कहा कि अगर समय रहते मध्य हिमालय में हो रहे नकारात्मक पर्यावर्णीय प्रभावों को न रोका गया तो देश को ही नहीं पूरे विश्व समुदाय को उसका ख़ामियाजा भुगतान पड़ेगा। पूर्वी-दक्षिण एशिया के कई राष्ट्रों का अस्तित्व मिट जाएगा। देश की प्राणवायु, जल और अन्न सुरक्षा ख़तरे में पड़ जाएंगी।
उन्होंने कहा कि नब्बे के दशक से वे सरकारों का ध्यान इस ओर आकृष्ट करने का प्रयास कर रहे हैं। आज सवाल यह है कि क्या मात्र ‘एक दिन’ का निर्धारण कर हिमालय का स्वरूप बच जाएगा, उसके लिये हमें क्या करना चाहिये?
हिमालय के लोगों को दें वनाधिकार
-मध्य हिमालयी लोगों को अरण्यजन पुश्तैनी वनाधिकार और हक हकूक बहाल किए जाएं।
-उनको प्रतिमाह एक गैस सिलेंडर, बिजली और पानी निशुल्क दिया जाए।
-जड़ी-बूटियों पर स्थानीय समुदाय का अधिकार हो।
-शिक्षा व स्वास्थ्य सेवाएं निशुल्क हों।
-एक यूनिट आवास बनाने के लिए लकड़ी, बजरी व पत्थर निशुल्क दिया जाए।
-जंगली जानवरों ने जनहानि पर 25 लाख क्षतिपूर्ति व परिवार के एक सदस्य को पक्की सरकारी नौकरी दी जाए।
-फसल के नुकसान पर प्रतिनाली पांच हजार क्षतिपूर्ति दी जाए।