उत्तराखंड: उपनल से भर्ती पर HC ने दिया सरकार को झटका, शासनादेश निरस्त
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विधानसभा चुनाव के नजदीक आते ही प्रदेश सरकार को जोर का झटका लगा है। हाईकोर्ट ने उपनल के माध्यम से ही नियुक्तियों से संबंधित शासनादेश निरस्त कर दिया है। 21 मार्च 2014 को श्रमिकों को सीधे नियोजन में न रख कर उपनल के माध्यम से रखने का शासनादेश जारी किया गया था।
हाईकोर्ट ने उत्तराखंड ग्राम्य विकास समिति के श्रमिकों को समिति के नियोजन में मानते हुए सभी लाभ देने के निर्देश दिए हैं।
बृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी सतपाल सिंह व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि प्रदेश सरकार ने केंद्रीय आजीविका योजना के क्रियान्वयन के लिए उत्तराखंड ग्राम्य विकास समिति का गठन कर इस समिति को नोडल एजेंसी घोषित किया था।
2014 में शासनादेश जारी करने का निर्देश
वर्ष 2004 से सपोर्टिंग स्टाफ के रूप में कार्यरत परियोजना सहायक, ड्राइवर व सुरक्षा गार्ड के पदों पर तैनात कर्मचारी (याचिकाकर्ताओं) का नियोजन विधि अनुसार और सेवायोजन कार्यालय के माध्यम से हुआ था। वर्ष 2013 में सरकार ने उन्हें हटा दिया और 21 मार्च 2014 को आउटसोर्स कर पदों को भरे जाने के शासनादेश जारी किया।
याचिकाकर्ता ने 21 मार्च 2014 के शासनादेश को चुनौती दी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 21 मार्च 2014 के शासनादेश के उस प्रावधान को निरस्त कर दिया है, जिसमें श्रमिकों को सीधे नियोजन में न रख कर उपनल के माध्यम से रखने और वेतन में कटौती की गई थी। कोर्ट ने श्रमिकों को उत्तराखंड ग्राम्य समिति के नियोजन में मानते हुए सभी लाभ देने के निर्देश दिए।