फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   herbal holi

हर्बल रंग के लिए बचाएं पौधे

Sun, 16 Mar 2014 12:35 PM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Sun, 16 Mar 2014 12:35 PM IST
विज्ञापन
herbal holi

हर्बल रंगों से होली खेलने की बातें तो हो रही हैं, लेकिन हर्बल पौधे आज विलुप्त होने की कगार पर आ चुके हैं।

विज्ञापन


हर्बल रंग कितने शुद्ध हैं, कहना मुश्किल
बाजार में मिलने वाले हर्बल रंग कितने शुद्ध हैं, कहना मुश्किल है। ऐसे में मिशन ट्रू बायोलॉजिस्ट हर्बल पौधों को बचाने की अनूठी मुहिम चला रहा है।

मिशन के संस्थापक एमएस मेहता ‘इकोमैन’ ने कहा कि हर साल हर्बल होली का संकल्प लिया तो जाता है, लेकिन किसी को पता नहीं कि किन पौधों से यह रंग बनते हैं। जिनसे यह बनते हैं, वह पौधे तो आसपास दिखाई भी नहीं देते।


इकोमैन ने कहा कि हम पहले इन पौधों को बचाएंगे, तभी हर्बल होली खेल पाएंगे। उनका तर्क है कि बाजार में मिलने वाले रंग, शुद्ध हर्बल नहीं हैं।

उन्होंने इस होली लोगों से हर्बल रंगों वाले पौधों को संरक्षित करने की अपील की। मिशन भी इसके लिए जागरूकता अभियान चला रहा है। इकोमैन ने कहा कि वह बीते 10 वर्षों से इस मुहिम में लगे हैं।
विज्ञापन


इन पौधों को करें संरक्षित
टेसू, हर श्रृंगार, सफेद चंदन, लाल चंदन, सेमल, अर्जुन और अशोक।

परंपराओं में है हर्बल होली
प्राचीन काल में न आर्टिफिशियल रंग थे, न मिलावटी हर्बल रंग। सिर्फ पौधों और फूलों से ही रंग तैयार किए जाते थे।

भगवान श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा, वृदावन में होली टेसू के फूल से खेली जाती थी। प्राकृतिक रंगों के साथ होली खेलने से पर्यावरण भी बचेगा और मनुष्य भी।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed