फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Dehradun News ›   hemvati nandan bahuguna jayanti he had treatment of every problem

जन्मदिन विशेष: हर मर्ज का इलाज था हेमवती नंदन बहुगुणा के पास, अंतरराष्ट्रीय विषयों पर थी पकड़

Thu, 25 Apr 2019 10:53 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal योगेंद्र खंडूड़ी (लेखक : स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा के निकटस्थ सहयोगी)
योगेंद्र खंडूड़ी (लेखक : स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा के निकटस्थ सहयोगी) Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Thu, 25 Apr 2019 10:53 AM IST
विज्ञापन
hemvati nandan bahuguna jayanti he had treatment of every problem
हेमवती नंदन बहुगुणा (फाइल फोटो)

आज देश स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा का जन्म शताब्दी समारोह मना रहा है। वे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उन्होंने जीवन पर्यंत स्वराज के उद्देश्यों को अपने व्यक्तित्व एवं राजनीतिक प्रयासों में बरकरार रखा।

विज्ञापन


वे एक ऐसे क्रांतिकारी देशभक्त थे, जो सामाजिक न्याय, सांप्रदायिक सद्भावना और राष्ट्रीय गौरव के लिए सदैव प्रयासरत रहे। उन्हें देश की राजनीति, आर्थिक, सामाजिक तथा सुरक्षा संबंधी विषयों पर गहरा ज्ञान था। अंतरराष्ट्रीय विषयों पर भी उनकी अच्छी पकड़ थी।

विज्ञापन

'हर रोग का इलाज था'

सांप्रदायिक सद्भाव, जाति एवं वर्ग संघर्ष की उन्हें सूक्ष्म परख थी। देश के हित में इन सभी के बीच सामंजस्य कैसे बनाए रखें, इस विषय पर उनकी प्रभावशाली एवं स्पष्ट सोच थी। यह कहना है स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा के निकटस्थ सहयोगी योगेंद्र खंडूड़ी का। उन्होंने कहा कि मैं कह सकता हूं कि वे ऐसे डॉक्टर थे जिनके पास हर रोग का इलाज था। उनके जीवन पर गांधी, सुभाष और नेहरू के व्यक्तित्व व विचारधारा का गहरा प्रभाव था।

1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान उन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ प्रयागराज तत्कालीन इलाहाबाद में छात्र एवं युवाओं को लेकर बहुत बड़ा आंदोलन किया। इस आंदोलन में छात्र एवं युवा खुलकर अंग्रेजों के खिलाफ सड़कों पर उतर आए। ब्रिटिश सरकार ने उन पर पांच हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। उनके गिरफ्तार होने पर उन्हें कई साल दिल्ली व उत्तर प्रदेश के जेलों में रखा गया।

विज्ञापन

पर्वतीय विकास मंत्रालय बनाया

स्वतंत्रता के बाद देश के पहले चुनाव 1952 में वे उत्तर प्रदेश विधानसभा के सदस्य निर्वाचित हुए। इसके बाद भारतीय राजनीति में वे एक चमकते हुए सितारे की भांति उभरे। उत्तर प्रदेश के पर्वतीय क्षेत्र के समग्र विकास के लिए उन्होंने पर्वतीय विकास मंत्रालय बनाया। पर्वतीय क्षेत्रों में कार्यरत सारे विभाग इस मंत्रालय के अधीन कर दिए।

उनकी सोच थी कि भौगोलिक दृष्टि से अलग पहाड़ के विकास के लिए एक ऐसा मंत्रालय होना चाहिए जो कम समय में ही समस्याओं को समझे और हल करने का प्रयास करे। इस मंत्रालय को बनाने के बाद पर्वतीय क्षेत्र के विकास में पहले की अपेक्षा तेजी आई। पर्वतीय विकास मंत्रालय ही उत्तराखंड राज्य निर्माण की दिशा में पहला कदम था। वे सही मायने में धर्म-निरपेक्ष नेता थे।

विज्ञापन

सर्व-धर्म सद्भाव में रखते थे विश्वास

वे व्यक्तिगत जीवन में पक्के सनातनी हिंदू थे, लेकिन सार्वजनिक जीवन में वे सर्व-धर्म सद्भाव में विश्वास रखते थे। वे राजनीति में आने वाले युवाओं को समसामयिक घटनाओं एवं ज्ञान के क्षेत्र में नए विषय वस्तुओं के ज्ञानवर्धन के लिए हमेशा प्रेरित करते रहते थे।

अगर उन्हें ऐसा लगता था कि युवा ज्ञान की ओर अपेक्षित रूप से सतर्क और सचेत नहीं है तो उन्हें वे अपने अंदाज में डांटते भी थे। समृद्ध ज्ञान क्षमता, अटल व दृढ़ निश्चयी एवं मानवीय संवेदनाओं से परिपूर्ण उनका विराट व्यक्तित्व आज भी हर किसी को नतमस्तक होने के विवश कर देता। इसलिए उन्हें हिमालय पुत्र कहा जाता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed