हेमकुंड साहिब में आस्था पथ से पिघली बर्फ, अब तीर्थयात्री घोड़े-खच्चर से कर सकेंगे यात्रा
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हेमकुंड साहिब के दर्शनों के लिए अब श्रद्धालु घोड़े से जा सकेंगे। अभी तक आस्था पथ पर बर्फ जमी होने के कारण अटलाकुड़ी पर ग्लेशियर प्वाइंट से हेमकुंड (दो किमी) तक तीर्थयात्रियों को पैदल ही सफर करना पड़ रहा था। लेकिन अब बर्फ पिघलने से हेमकुंड तक घोड़े-खच्चरों की आवाजाही सुचारु हो गई है।
इस बार हेमकुंड साहिब में अत्यधिक बर्फबारी होने से अभी तक भी यहां बर्फ पूरी तरह से नहीं पिघली है। हेमकुंड साहिब में अभी भी करीब तीन फीट तक बर्फ जमी हुई है। ग्लेशियर प्वाइंट अटलाकुड़ी में भी कई जगहों पर हिमखंड पसरे हुए हैं।
एक जून को हेमकुंड साहिब के कपाट खुले थे। तब यहां आस्था पथ पांच फीट तक बर्फ से ढका हुआ था। सेना के जवानों ने बर्फ को काटकर तीर्थयात्रियों के लिए रास्ता बनाया था। अटलाकुंडी से हेमकुंड साहिब तक घोड़े-खच्चरों की आवाजाही भी नहीं हो पा रही थी।
अब तापमान बढ़ने से हिमखंड और रास्ते की बर्फ पिघल गई है। हेमकुंड साहिब ट्रस्ट के प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने बताया कि हेमकुंड साहिब तक घोड़े-खच्चरों की आवाजाही शरू हो गई है। अभी तक दो किलोमीटर पैदल सफर करने में कई तीर्थयात्रियों को दिक्कतें हो रही थी। अभी तक 174449 तीर्थयात्री हेमकुंड साहिब के दर्शन कर चुके हैं।