मनसरोवर यात्रा: लखनपुर, मालपा में यात्रा मार्ग बहा
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कैलास मानसरोवर यात्रा मार्ग लखनपुर और मालपा के पास करीब 10 मीटर बह गया है। यात्रा मार्ग में कई पैदल पुल भी बहे हैं। डीएम सुशील कुमार ने शनिवार को बारिश के बाद पैदा हुई स्थितियों की समीक्षा की।
उन्होंने लोनिवि के अधीक्षण अभियंता को तत्काल पैदल रास्ते की मरम्मत करने और पुलों के स्थान पर वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा है। निर्देश के बाद लोनिवि की टीम रास्ते की मरम्मत के लिए जा चुकी है। अगले दलों के पहुंचने तक रास्ते की मरम्मत कर ली जाएगी।
इस बीच, कैलास यात्रा पर गए प्रथम दल के 57 यात्री कैलास मानसरोवर की परिक्रमा पूरी कर शनिवार को तकलाकोट लौट आए हैं। दो जुलाई को दल के सदस्य पिथौरागढ़ पहुंच जाएंगे। रास्ता खराब होने के कारण एक दिन धारचूला में रुके चौथे दल के 56 यात्री शनिवार को मांगती, पांगला होते हुए सीधे गाला पड़ाव पहुंच गए।
इसके बाद इन्हें दूसरे वैकल्पिक मार्ग से ले जाया गया। वहीं, कैलास यात्रियों का पांचवां दल रविवार शाम दिल्ली से काठगोदाम होते हुए अल्मोड़ा पहुंच जाएगा। इस दल में आठ महिलाओं सहित कुल 42 यात्री पहुंचेंगे।
मलबा हटाने काम युद्धस्तर पर जारी
उधर, बाटनागाड़ (पूणागिरि धाम) में मलबा आने से तीन दिन से बंद पड़ा पूर्णागिरि मार्ग भैरव मंदिर तक खोल दिया गया है। काली मंदिर के पास का मलबा हटाने काम युद्धस्तर पर जारी है।
रविवार से मां पूर्णागिरि की यात्रा भी खुलने की उम्मीद है। फिलहाल यात्रा पर रोक लगी होने से शनिवार को भी मंदिर के कपाट बंद रहे। बालिंग, बोन, तीदांग और फिलम में फंसे 35 लोगों को शनिवार को हेलीकॉप्टर से धारचूला लाया गया।
पहले दल ने परिक्रमा पूरी की
कैलास मानसरोवर की यात्रा पर गए प्रथम दल के 57 यात्रियों ने कैलास मानसरोवर की परिक्रमा पूरी कर ली है और वापसी में यह दल शनिवार को तकलाकोट पहुंच गया। दो जुलाई को दल के सदस्य पिथौरागढ़ पहुंच जाएंगे।
रास्ता खराब होने के कारण एक दिन धारचूला में रुके चौथे दल के 56 यात्री शनिवार को मांगती, पांगला होते हुए सीधे गाला पड़ाव पहुंच गए। इसके बाद इन्हें दूसरे वैकल्पिक मार्ग से ले जाया गया। यहां पहुंचने के बाद चौथे दल के यात्रियों को सुबह छह बजे धारचूला से आगे ले जाया गया।
आईटीबीपी सातवीं वाहिनी मुख्यालय के नियंत्रण कक्ष से मिली जानकारी के मुताबिक दूसरे दल के 53 यात्री तिब्बत के डेरापुक में हैं। वह कैलास पर्वत की परिक्रमा कर रहे हैं, जबकि तीसरे दल के 48 सदस्यों ने गुंजी से नाभीढांग तक का सफर पूरा किया। बारिश के कारण गुंजी से नाभीढांग के बीच कई बरसाती नाले उफान पर हैं।
इन स्थानों पर आईटीबीपी की रेस्क्यू टीम ने यात्रियों की मदद की। नंफा नाले में पानी तेजी से बह रहा है। आईटीबीपी के सेनानी केदार सिंह रावत ने बताया कि हर खतरनाक स्थान पर आईटीबीपी और एसडीआरएफ की टीम तैनात है। यात्रियों को आगे बढ़ाने में पूरी सावधानी और सतर्कता बरती जा रही है।