{"_id":"61c8c0bd917f1949d147a7b2","slug":"health-facilities-on-ventilator-during-the-corona-period-dehradun-news-drn399922687","type":"story","status":"publish","title_hn":"कोरोना काल में ‘वेंटिलेटर’ पर रही स्वास्थ्य सुविधाएं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कोरोना काल में ‘वेंटिलेटर’ पर रही स्वास्थ्य सुविधाएं
विज्ञापन
दून अस्पताल में बना ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट। अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
चिकित्सा के क्षेत्र में वर्ष 2021 कोरोना की घातक दूसरी लहर और ऑक्सीजन, आईसीयू व वेंटिलेटर जैसी सघन चिकित्सीय सुविधाओं के अभाव में इलाज न मिलने से हुई मरीजों की मौत की कड़वी याद के रूप में जेहन में रहेगा। कोरोना की दूसरी लहर जब अपने प्रचंड पर थी तो सरकारी से लेकर निजी अस्पतालों तक में बेड और ऑक्सीजन की किल्लत ने कई लोगों को अपनों से छीन लिया।
कोविड-19 की पहली लहर थमने के कुछ महीने बाद इस साल अप्रैल में कोरोना के मरीज फिर से बढ़ने शुरू हुए। तब किसी को अंदाजा नहीं था कि कोरोना इस बार लोगों की जिंदगी पर कहर बनकर बरपेगा। पहले रेमडेसीविर और दूसरी जीवन रक्षक दवाओं के लिए मारामारी हुई। फिर अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की किल्लत पड़ गई। उसके बाद मरीजों को घरों में ही रहने को मजबूर होना पड़ा तो फिर ऑक्सीजन के सिलेंडर तक कम पड़ गए। इस दौरान औद्योगिक इकाइयों में इस्तेमाल होने वाली ऑक्सीजन का भी मरीजों पर खूब प्रयोग हुआ। जिसका खामियाजा किसी को जान गंवाकर तो कई को दूसरे साइड इफेक्ट के रूप में हुआ। कोरोना में बार-बार बदल रहे उपचार के तरीके और कई मामलों में स्टेरॉयड दिए जाने के परिणामस्वरूप तमाम मरीज ब्लैक फंगस की गिरफ्त में आ गए। ब्लैक फंगस के उपचार में लगने वाले एम्फोटेरिसिन बी के इंजेक्शन के लिए एक बार फिर मारामारी शुरू हुई। इस दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर से लेकर, रेमडेसीविर और एम्फोटेरिसिन बी जैसी जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी भी जमकर की गई। निजी अस्पतालों ने भी मरीजों और उनके परिजनों से बिल के नाम पर अनापशनाप बिल वसूलते हुए खूब लूट की।
कोरोना के बहाने विभिन्न सरकारी अस्पतालों में बढ़ाई गई सुविधाएं
कोरोना के बढ़ते प्रकोप ने जहां आम आदमी से लेकर सरकारी मशीनरी तक को हिला दिया। वहीं, कोरोना के बहाने जिले के तमाम सरकारी अस्पतालों में चिकित्सीय सुविधाओं में विस्तार भी खूब हुआ। एम्स ऋषिकेश में एक हजार लीटर क्षमता का ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट खुला। वहीं, राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में एक-एक हजार पीपीएम के दो ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लग चुके हैं। राजकीय जिला अस्पताल के कोरोनेशन परिसर में नया भवन तैयार हो चुका है। जिसमें 100 अतिरिक्त बेड बने हैं। इसमें 10 बेड का आईसीयू और तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए 10 बेड का बच्चों का आईसीयू भी तैयार किया गया है। इसी तरह, अस्पताल में अलग बर्न यूनिट भी बन चुकी है। वहीं जिला अस्पताल के गांधी शताब्दी परिसर में नवजात को रखने के लिए सिक नियोटल केयर यूनिट (एसएनसीयू) भी तैयार है। मानव संसाधन की कमी के चलते अभी इसे शुरू नहीं किया जा सका है।
विज्ञापन
- इन सुविधाओं में भी हुआ विस्तार -
- दून अस्पताल में नया ओपीडी भवन शुरू
- फ्लू ओपीडी के लिए दून अस्पताल और कोरोनेशन अस्पताल में कंटेनर की व्यवस्था
- दून अस्पताल और कोरोनेशन अस्पताल मेें नई सीटी स्कैन मशीन लगी
- दून अस्पताल में 10 बेड का नया अत्याधुनिक डायलिसिस यूनिट
- दून अस्पताल के महिला विंग में नियोटल आईसीयू 10 बेड से 24 बेड का हुआ
- इको मशीन और हृदय जांच संबंधी अन्य इक्वीपमेंट स्थापित
- दून अस्पताल में मरीजों, कर्मचारियों और अस्पताल के बीच समन्वय व जरूरी जानकारी देने के लिए पीआरओ सेल का गठन
- दो साल के इंतजार के बाद दून अस्पताल में एमआरआई मशीन पहुंची, इंस्टॉल होने पर नए साल के पहले हफ्ते मिल पाएगी मरीजों को जांच की सुविधा
तीसरी लहर से निपटने को पूरी तैयारी का दावा
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े विभिन्न अधिकारियों का कहना है कि चिकित्सा सुविधाओं में विस्तार के लिए कई योजनाओं पर कार्य किया जाना था। मरीजों को सरकारी अस्पताल में तमाम महंगी जांच कम दरों पर कराए जाने समेत विभिन्न चिकित्सीय सुविधाओं को लेकर कई कार्य के लिए सरकार की ओर से हरी झंडी मिल चुकी थी। कई अन्य प्रस्तावों पर भी मुहर लगनी बाकी थी। इस बीच कोरोना के कहर से विभिन्न तैयारियां गड़बड़ा गई। जिसके चलते कोरोना की रोकथाम और इससे निपटने पर फोकस रहा। पहली और दूसरी लहर के अनुभवों को देखते हुए तीसरी लहर से निपटने के लिए व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं।
कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार है। बड़े अस्पतालों में ऑक्सीजन जनरेेशन प्लांट, ऑक्सीजन स्टोर और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक में ऑक्सीजन के सिलेंडर पहुंचाए गए हैं। अन्य चिकित्सीय सुविधाओं में भी विस्तार किया गया है। फिर भी लोगों से अपील है कि कोरोना के नए और पुराने स्वरूपों की रोकथाम में आमजन का सबसे बड़ा योगदान होगा, इसलिए कोविड गाइडलाइन का सख्ती से पालन कर पिछली बार जैसी भयावहता पैदा न होने दें। - डॉ. मनोज उप्रेती, सीएमओ देहरादून
कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए दून मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में युद्ध स्तर पर कार्य हुए हैं। दून अस्पताल में ऑक्सीजन, बेड, आईसीयू, बच्चों के आईसीयू और अन्य सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। वहीं, कॉलेज में कोरोना के विभिन्न स्वरूपों के बारे में पता करने के लिए लैब में जीनोम सिक्वेंसिंग भी शुरू कर दी गई है। महाराणा प्रताप अंतरराष्ट्रीय किक्रेट स्टेडियम में कोविड केयर सेंटर में भी ऑक्सीजन युक्त 250 बेड और डॉक्टर व अन्य स्टाफ की व्यवस्था है।- डॉ. आशुतोष सयाना, प्राचार्य, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल
जिला अस्पताल में चिकित्सीय सुविधाओं को विस्तार दिया जा रहा है। कोरोना काल में प्राथमिकता को देखते हुए आईसीयू, ऑक्सीजन, वेंटीलेटर और बेड की संख्या बढ़ाने पर जोर रहा। जिसके चलते अन्य कुछ योजनाओं को पूरा होने में देरी हुई। तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए अस्पताल में विभिन्न तैयारियां की जा रही हैं।- डॉ. शिखा जंगपांगी, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, राजकीय जिला अस्पताल
विज्ञापन
कोविड-19 की पहली लहर थमने के कुछ महीने बाद इस साल अप्रैल में कोरोना के मरीज फिर से बढ़ने शुरू हुए। तब किसी को अंदाजा नहीं था कि कोरोना इस बार लोगों की जिंदगी पर कहर बनकर बरपेगा। पहले रेमडेसीविर और दूसरी जीवन रक्षक दवाओं के लिए मारामारी हुई। फिर अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की किल्लत पड़ गई। उसके बाद मरीजों को घरों में ही रहने को मजबूर होना पड़ा तो फिर ऑक्सीजन के सिलेंडर तक कम पड़ गए। इस दौरान औद्योगिक इकाइयों में इस्तेमाल होने वाली ऑक्सीजन का भी मरीजों पर खूब प्रयोग हुआ। जिसका खामियाजा किसी को जान गंवाकर तो कई को दूसरे साइड इफेक्ट के रूप में हुआ। कोरोना में बार-बार बदल रहे उपचार के तरीके और कई मामलों में स्टेरॉयड दिए जाने के परिणामस्वरूप तमाम मरीज ब्लैक फंगस की गिरफ्त में आ गए। ब्लैक फंगस के उपचार में लगने वाले एम्फोटेरिसिन बी के इंजेक्शन के लिए एक बार फिर मारामारी शुरू हुई। इस दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर से लेकर, रेमडेसीविर और एम्फोटेरिसिन बी जैसी जीवनरक्षक दवाओं की कालाबाजारी भी जमकर की गई। निजी अस्पतालों ने भी मरीजों और उनके परिजनों से बिल के नाम पर अनापशनाप बिल वसूलते हुए खूब लूट की।
विज्ञापन
कोरोना के बहाने विभिन्न सरकारी अस्पतालों में बढ़ाई गई सुविधाएं
कोरोना के बढ़ते प्रकोप ने जहां आम आदमी से लेकर सरकारी मशीनरी तक को हिला दिया। वहीं, कोरोना के बहाने जिले के तमाम सरकारी अस्पतालों में चिकित्सीय सुविधाओं में विस्तार भी खूब हुआ। एम्स ऋषिकेश में एक हजार लीटर क्षमता का ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट खुला। वहीं, राजकीय दून मेडिकल अस्पताल में एक-एक हजार पीपीएम के दो ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लग चुके हैं। राजकीय जिला अस्पताल के कोरोनेशन परिसर में नया भवन तैयार हो चुका है। जिसमें 100 अतिरिक्त बेड बने हैं। इसमें 10 बेड का आईसीयू और तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए 10 बेड का बच्चों का आईसीयू भी तैयार किया गया है। इसी तरह, अस्पताल में अलग बर्न यूनिट भी बन चुकी है। वहीं जिला अस्पताल के गांधी शताब्दी परिसर में नवजात को रखने के लिए सिक नियोटल केयर यूनिट (एसएनसीयू) भी तैयार है। मानव संसाधन की कमी के चलते अभी इसे शुरू नहीं किया जा सका है।
विज्ञापन
- इन सुविधाओं में भी हुआ विस्तार -
- दून अस्पताल में नया ओपीडी भवन शुरू
- फ्लू ओपीडी के लिए दून अस्पताल और कोरोनेशन अस्पताल में कंटेनर की व्यवस्था
- दून अस्पताल और कोरोनेशन अस्पताल मेें नई सीटी स्कैन मशीन लगी
- दून अस्पताल में 10 बेड का नया अत्याधुनिक डायलिसिस यूनिट
- दून अस्पताल के महिला विंग में नियोटल आईसीयू 10 बेड से 24 बेड का हुआ
- इको मशीन और हृदय जांच संबंधी अन्य इक्वीपमेंट स्थापित
- दून अस्पताल में मरीजों, कर्मचारियों और अस्पताल के बीच समन्वय व जरूरी जानकारी देने के लिए पीआरओ सेल का गठन
- दो साल के इंतजार के बाद दून अस्पताल में एमआरआई मशीन पहुंची, इंस्टॉल होने पर नए साल के पहले हफ्ते मिल पाएगी मरीजों को जांच की सुविधा
तीसरी लहर से निपटने को पूरी तैयारी का दावा
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े विभिन्न अधिकारियों का कहना है कि चिकित्सा सुविधाओं में विस्तार के लिए कई योजनाओं पर कार्य किया जाना था। मरीजों को सरकारी अस्पताल में तमाम महंगी जांच कम दरों पर कराए जाने समेत विभिन्न चिकित्सीय सुविधाओं को लेकर कई कार्य के लिए सरकार की ओर से हरी झंडी मिल चुकी थी। कई अन्य प्रस्तावों पर भी मुहर लगनी बाकी थी। इस बीच कोरोना के कहर से विभिन्न तैयारियां गड़बड़ा गई। जिसके चलते कोरोना की रोकथाम और इससे निपटने पर फोकस रहा। पहली और दूसरी लहर के अनुभवों को देखते हुए तीसरी लहर से निपटने के लिए व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं।
कोरोना की तीसरी लहर से निपटने के लिए स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह तैयार है। बड़े अस्पतालों में ऑक्सीजन जनरेेशन प्लांट, ऑक्सीजन स्टोर और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक में ऑक्सीजन के सिलेंडर पहुंचाए गए हैं। अन्य चिकित्सीय सुविधाओं में भी विस्तार किया गया है। फिर भी लोगों से अपील है कि कोरोना के नए और पुराने स्वरूपों की रोकथाम में आमजन का सबसे बड़ा योगदान होगा, इसलिए कोविड गाइडलाइन का सख्ती से पालन कर पिछली बार जैसी भयावहता पैदा न होने दें। - डॉ. मनोज उप्रेती, सीएमओ देहरादून
कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए दून मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में युद्ध स्तर पर कार्य हुए हैं। दून अस्पताल में ऑक्सीजन, बेड, आईसीयू, बच्चों के आईसीयू और अन्य सुविधाएं बढ़ाई गई हैं। वहीं, कॉलेज में कोरोना के विभिन्न स्वरूपों के बारे में पता करने के लिए लैब में जीनोम सिक्वेंसिंग भी शुरू कर दी गई है। महाराणा प्रताप अंतरराष्ट्रीय किक्रेट स्टेडियम में कोविड केयर सेंटर में भी ऑक्सीजन युक्त 250 बेड और डॉक्टर व अन्य स्टाफ की व्यवस्था है।- डॉ. आशुतोष सयाना, प्राचार्य, राजकीय दून मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल
जिला अस्पताल में चिकित्सीय सुविधाओं को विस्तार दिया जा रहा है। कोरोना काल में प्राथमिकता को देखते हुए आईसीयू, ऑक्सीजन, वेंटीलेटर और बेड की संख्या बढ़ाने पर जोर रहा। जिसके चलते अन्य कुछ योजनाओं को पूरा होने में देरी हुई। तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए अस्पताल में विभिन्न तैयारियां की जा रही हैं।- डॉ. शिखा जंगपांगी, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, राजकीय जिला अस्पताल