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घास का जंगल बना 15 लाख का पार्क
अमर उजाला, ऋषिकेश
Updated Wed, 02 Oct 2013 09:47 AM IST
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धन की बरबादी का हुनर कोई सरकारी विभागों से सीखे। कई विभाग योजनाएं तो बनाते हैं, मगर योजना के औचित्य और निर्माण के बाद मेंटीनेंस की ओर गौर नहीं करते। इसकी एक बानगी मुनिकीरेती क्षेत्र में गंगा के किनारे लाखों रुपये की लागत से बने पार्क की स्थिति से पता चलता है।
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देखरेख के अभाव में इस पार्क की स्थिति इतनी खराब है कि लोग इसका उपयोग नहीं कर पा रहे। मगर इसकी सुध न तो निर्माण एजेंसी को है और न ही देखरेख का जिम्मा संभालने वाले विभाग को।
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हरिद्वार विकास प्राधिकरण ने वर्ष 1997-98 में पर्यटकों की आवाजाही के लिहाज से महत्वपूर्ण मुनिकीरेती क्षेत्र में गंगातट पर करीब 15 लाख की लागत से पार्क का निर्माण किया था। जिसकी देखरेख की जिम्मेदारी नगर पंचायत मुनिकीरेती को सौंपी गई है।
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पार्क में आने वाले लोगों के लिए बाकायदा गंगा दर्शन के लिए व्यू प्वाइंट भी बनाए गए हैं। आस्थापथ से सटे क्षेत्र में स्थापित इस पार्क का स्थानीय लोगों और पर्यटकों को भी लाभ नहीं मिल पा रहा है। बावजूद इसके नगर निकाय इसके प्रति उदासीन बनी हुई है।
मेंटीनेंस के अभाव में पार्क परिसर में घास के जंगल उग गए हैं। जिससे पार्क जगह-जगह से क्षतिग्रस्त हो गया है, लोग भ्रमण, सुस्ताने के लिए इसका उपयोग नहीं कर पा रहे हैं।
स्थानीय नागरिक सतीश गुप्ता, सुनील कंडवाल, बीएस रावत आदि का कहना है कि पर्यटकों के आवागमन के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र में स्थापित पार्क के रखरखाव की ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। उनका कहना है कि निकाय की उदासीनता के चलते पार्क लोगों के उपयोग में नहीं आ पा रहा है।
क्या कहते हैं अधिकारी
एचडीए द्वारा निर्मित पार्क निकाय के सुपुर्द है। पंचायत इससे पूर्व तीन बार इसमें मेंटीनेंस कार्य करा चुकी है। वर्तमान में पार्क की स्थिति खराब है, लिहाजा इसकी मरम्मत का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जल्द इसे दुरुस्त किया जाएगा।
-आनंद सिंह मिश्रवाण, अवर अभियंता नगर पंचायत