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बस पहाड़ चढ़ने से रोकी तो धरने पर बैठे हरियाणा के बच्चे
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हल्द्वानी
Updated Fri, 08 Jun 2018 11:30 AM IST
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बस पहाड़ पर चढ़ने से रोकी गई तो हरियाणा के बच्चे सड़क किनारे धरने पर बैठ गए। उनकी आरटीओ कर्मियों से नोकझोंक हो गई। बाद में हाईकोर्ट के निर्देश का हवाला देकर बच्चों को शांत किया और केमू की बस से रामगढ़ भेजा गया।
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हरियाणा के पंचकूला के आशियाना आश्रम के 34 बच्चे और तीन शिक्षिकाएं मल्ला रामगढ़ में अरविंदो आश्रम में आयोजित कार्यक्रम में हिस्सा लेने जा रहे थे। बच्चे शिक्षिका सलोनी चंदेल की अगुवाई में 42 सीटर बस से आए थे। सुबह तकरीबन 8.30 बजे बस काठगोदाम पहुंची तो आरटीओ चेक पोस्ट पर तैनात कर्मियों ने बस को रोक दिया।
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इस पर शिक्षिका की कर्मियों से नोकझोंक हुई। कर्मचारियों ने हाईकोर्ट के निर्देश का हवाला दिया। इस निर्देश के अनुसार 30 से अधिक सीट वाली पर्यटक बसों को काठगोदाम से आगे पहाड़ पर ले जाने पर पाबंदी है। बस रोके जाने से बच्चे भड़क गए। वे सड़क किनारे ही धूप में बैठ गए और धरना देने लगे। इसके बाद परिवहन कर अधिकारी असित झा मौके पर पहुंचे। उनके समझाने के बाद सभी को केमू की बस से रवाना किया गया।
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...तो क्यों न हों पहाड़ को जाने वाले सैलानी परेशान
पर्यटक सीजन के दौरान यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन ने तराई भाबर से नैनीताल व भीमताल की ओर जाने वाली बड़ी टूरिस्ट बसों पर रोक तो लगा दी लेकिन इन बसों से उतरने वाले सैलानियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने के कोई इंतजाम नहीं किए।
जिला प्रशासन ने नैनीताल में पार्किंग की दिक्कत को देखते हुए काठगोदाम से ऊपर की ओर जाने वाली 30 सीट से अधिक क्षमता वाली टूरिस्ट बसों को प्रतिबंधित किया हुआ है। पर्यटक सीजन के दौरान बड़ी संख्या में अन्य प्रांतों से सैलानी ट्रेवल्स की बसों से नैनीताल, भीमताल, नौकुचियाताल, सातताल, रामगढ़, मुक्तेश्वर, अल्मोड़ा, कौसानी व जागेश्वर आदि घूमने के लिए आते हैं। इनकी बसों को काठगोदाम में ही रोक दिया जा रहा है।
जिला प्रशासन का दावा था कि बड़ी टूरिस्ट बसों को काठगोदाम में रोकने के बाद उसमें सवार सैलानियों को छोटे वाहनों (टैक्सी अथवा 30 सीटर क्षमता तक की बस) से नैनीताल अथवा भीमताल की ओर भेजा जाएगा। जिला प्रशासन का यह दावा खोखला साबित हुआ है। काठगोदाम में जिस स्थान पर इन बसों को रोका जाता है वहां पर न तो टैक्सी मिलती है और न ही छोटी बसें। दूसरे प्रांतों की बड़ी बसों में आने वाले सैलानियों को न तो जिला प्रशासन के इस आदेश की जानकारी होती है और न ही मौके पर उन्हें टैक्सी अथवा छोटी बसें उपलब्ध होती हैं। इसका फायदा स्थानीय टैक्सी चालक सैलानियों से नैनीताल तक के मनमाने रेट वसूल कर उठा रहे हैं।
जब कभी भी बड़ी बसों को रोका जाता है तो उसी समय उसमें सवार सैलानियों के लिए रोडवेज अथवा टैक्सी स्टेंड से वाहनों की व्यवस्था करा दी जाती है। टैक्सियों के रेट भी प्रशासन ने तय किए हुए हैं। यदि टैक्सी चालकों द्वारा तय रेट से अधिक किराया वसूलने की शिकायत मिलेगी तो कार्रवाई की जाएगी।
- विनोद कुमार सुमन, डीएम नैनीताल