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हरीश रावत की ब्यूरोक्रेसी को चेतावनी, न बदलें फैसले
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 09 Apr 2016 04:49 AM IST
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हरीश रावत
- फोटो : file photo
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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शुक्रवार को एक तीर से कई निशाने साधे। पहले तो उन्होंने ब्यूरोक्रेसी को चेतावनी दी कि राष्ट्रपति शासन भले ही लागू हो, लेकिन भाजपा के दबाव में मंत्रिमंडल के फैसले न बदलें, यह जनता अपमान है, विधानसभा अभी भंग नहीं हुई है। फिर इसी क्रम में केंद्र सरकार पर लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया। भाजपा के अंबेडकर जयंती मनाने की हंसी उड़ाई और गैर भाजपा राजनीतिक दलों से कांग्रेस के समर्थन में एकजुट होने की अपील की।
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पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत पूर्व मंत्री इंदिरा हृदयेश, मंत्री प्रसाद नैथानी, विधायक राजकुमार के साथ मीडिया कर्मियों से रूबरू हुए। पूर्व मंत्रिमंडल के फैसलों के अनुरूप कार्य नहीं होने पर नाराजगी जाहिर की और बोले कि ‘फैसलों का डाइल्युशन किया जा रहा है।’ यह गलत है। निर्वाचित सरकार के फैसले में रद्दो-बदल दूसरी निर्वाचित सरकार ही कर सकती है।
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जनता देगी जवाब
अफसर अगर फैसले बदलते हैं तो जनता इसका जवाब देगी। फिर केंद्र सरकार पर हमला बोला कि यह बड़ा प्रश्न है कि देश में धर्म निरपेक्ष, विकासवादी, संवैधानिक सरकारें रह पाएंगी? अगर भाजपा कांग्रेस मुक्त भारत चाहती है तो जनता के पास आए। संवैधानिक व्यवस्था का गलत इस्तेमाल न करे।
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बसपा, यूकेडी, सीपीआई समेत अन्य गैर भाजपा दलों से पूर्व मुख्यमंत्री ने एकजुट होने की अपील की और कहा कि निरंकुशता थोपी जा रही है, धर्म निरपेक्षता, सहिष्णुता खतरे में है। राज्य को बचाने के लिए कांग्रेस का समर्थन करें। अब सवाल राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का नहीं रहा, संवैधानिक व्यवस्था बचाने का है। अरुणाचल, उत्तराखंड के बाद अब दूसरे गैर भाजपा शासित राज्यों की बारी है। सुनियोजित तरीके से साजिश रची जा रही है। बोले कि भाजपा का अंबेडकर से दूर-दूर का संबंध नहीं है। अंबेडकर जयंती पर वह हर जिले में जाएंगे और हर धर्म, जाति के लोगों को लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ने का संकल्प दिलाएंगे।
'बहुगुणा अब हमारे लिए असंगत हो गए'
सरकार गिरने के बाद शुक्रवार को पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और उनके साथियों का मूड कुछ फ्रेश नजर आया। वह चुटकियाें को मजाकिया लहजे में ले रहे थे, लेकिन इससे मसले की गंभीरता झलकती रही। बोले, ‘मेरे एक दोस्त ने खाने के दौरान मुझसे कहा कि आपका विरोध, केदारनाथ का विरोध है और उसके बाद जाकर पाला बदल दिया।’ ‘इसी तरह जिन्होंने एक-डेढ़ घंटा पहले मेरी खूब तारीफ की, वह भी कुछ देर में बदल गए। वह या तो तब गलत थे या फिर अब गलत हैं।’ मीडिया कर्मियों से बातचीत के दौरान जब पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा की बात उठी तो बोले कि ‘बहुगुणा अब हमारे लिए असंगत हो गए हैं। वरिष्ठ भाजपा नेता ने उन्हें नाला बता दिया। अब नाले हैं तो गटर में जाकर गिरेंगे ही।’