...तो इस तरह हरीश रावत देंगे केंद्र के 'मंसूबों' को मात
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केंद्र सरकार से प्रदेश को बजट न मिलने के कारण सीएम घोषणाओं के अटकने की समस्या की काट मुख्यमंत्री हरीश रावत ने निकाल ली है।
विधानसभा क्षेत्रों में सीएम घोषणाओं की उन छोटी-छोटी योजनाओं को पहले पूरा किया जा रहा है, जिनके लागू करने में अधिक पैसे की जरूरत नहीं है। बड़ी योजनाओं की सारी कागजी प्रक्रिया पूरी कर ली जा रही है। बजट मिलते ही इन्हें तुरंत जमीन पर उतार दिया जाएगा। इन छोटे-छोटे कार्यों से योजनाओं की गिनती भारी-भरकम हो जाएगी।
विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सीएम घोषणाओं पर होमवर्क शुरू हो गया है। इस संबंध में मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह भी विधायकों और विभिन्न विभागों के अफसरों के साथ मीटिंग कर रहे हैं। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में सीएम घोषणाएं पूरी करने की प्राथमिकता तय की जा रही है।
हरीश रावत विधायकों से पूछ रहे प्राथमिकता
जो योजनाएं सबसे छोटी हैं, उन्हें पहले पूरा कर दिया जा रहा है। सीएम घोषणाओं में कई प्रस्ताव अभी डीएम स्तर से पास होकर नहीं आए हैं। 200-250 सड़क और अन्य योजनाओं में अभी वन भूमि हस्तांतरण नहीं हो पाया है।
सीएम घोषणाएं पूरी करने के लिए विधायकों से प्राथमिकता पूछी जा रही है। इसी आधार पर योजनाएं पूरी की जाएंगी। गली-मोहल्लों और गांवों की छोटी-छोटी योजनाओं के पूरा होने से लोग भी संतुष्ट रहेंगे और विधायक भी। मध्यम श्रेणी की योजनाओं को पूरा करने के लिए विशेष सहायता योजना के बजट से पैसा लिया जाएगा।
विशेष सहायता योजना के मद में केंद्र से एक हजार करोड़ रुपये मांगे जा रहे हैं। बजट अटकता भी है तो इस मद से सरकार को सहायता मिल जाएगी। सीएम घोषणाओं की संख्या बढ़ने से भाजपा की उस रणनीति की काट हो जाएगी जिसमें विधानसभा चुनाव के दौरान मुख्यमंत्री को कटघरे में खड़ा करने की योजना है। सीएम घोषणाओं को लेकर भाजपा ने बजट सत्र के वक्त सदन में रावत सरकार की खिल्ली भी उड़ाई थी।