हरीश रावत की एक चूक... धरा रह गया कांग्रेस का प्लान
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उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत की चूक को न तो दस जनपथ और न ही कांग्रेस के केंद्रीय नेता पचा पा रहे हैं। शीर्ष स्तर पर किसी को यह समझ में नहीं आ रहा है कि उत्तराखंड की जमीनी राजनीति करके क्षितिज पर पहुंचे रावत की उमेश शर्मा से बातचीत की सीडी कैसे सामने आई।
रावत से यह ‘एरर ऑफ जजमेंट’ कैसे हुआ? उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार सीडी के सामने आने के बाद ऐन वक्त पर कांग्रेस को जोर का झटका तब लगा जब, वह राजनीतिक संकट को करीब-करीब साध चुकी थी।
कांग्रेस के एक शीर्ष नेता का कहना है कि उमेश शर्मा का इतिहास उत्तराखंड में किसी से छिपा नहीं है। विजय बहुगुणा और हरक सिंह रावत को लेकर भी हरीश रावत काफी समय से सशंकित थे। सतपाल महाराज काफी पहले से रावत के विरोधी खेमे से हैं। ऐसे में राजनीतिक संकट के दौरान हरक के करीबी उमेश से बातचीत पर हरीश रावत ने भरोसा कैसे किया?
इस तरह से कांग्रेस ने बनाया था प्लान
सूत्र बताते हैं कि यह तय था कि 26 मार्च की शाम तक बागी विधायक बर्खास्त कर दिए जाएंगे। 27 मार्च को राज्य की प्रभारी और कांग्रेस महासचिव अंबिका सोनी देहरादून में डेरा डाल देंगी और आसानी से समाधान निकल आएगा। इसी क्रम में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय और हरीश रावत को कई हिदायतें दी गई थीं।
खासकर कानून व्यवस्था को बनाए रखने के बाबत। ताकि केंद्र सरकार के हाथ में राज्य सरकार की बर्खास्तगी का कोई बहाना न मिल पाए। कांग्रेस की तैयारी थी कि शनिवार को प्रेस वार्ता करके बागी विधायकों के कृत्य पर हमला बोला जाए, खासकर हरक सिंह रावत पर। इधर कांग्रेस प्रेस वार्ता की तैयारी करने जा रही थी तभी उधर हरीश रावत की सीडी मीडिया में चलने लगी। इसके बाद सब कुछ धरा का धरा रह गया।