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पढ़ना चाहेंगे, बहुगुणा को रावत ने क्या दिया जवाब?

Mon, 02 Feb 2015 10:26 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून Updated Mon, 02 Feb 2015 10:26 PM IST
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harish rawat reply vijay bahuguna letter

उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के पत्र का जवाब मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी पत्र लिखकर दिया है। बहुगुणा को भेजे पत्र में मुख्यमंत्री ने वर्ग-4 और श्रेणी 1-ख की भूमि के विनियमितीकरण के संबंध में उठाए गए बिंदुओं पर उनकी भावनाओं को समझते हुए स्थायी समाधान के लिए प्रयत्नशील रहने की बात कही है।

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सीएम ने लिखा है कि आपको सूचित करने में हर्ष हो रहा है कि हम वर्ग-4 की भूमि के स्थायी समाधान का प्रस्ताव अगली मंत्रिमंडल की बैठक में ला रहे हैं। मालूम हो कि विजय बहुगुणा ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इस मसले का समाधान न होने पर 15 जनवरी को जनाक्रोश रैली करने की चेतावनी दी है।
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मुख्यमंत्री ने पत्र में इस बात भी उल्लेख किया है कि यदि अपरिहार्य कारणवश 31 जनवरी को प्रस्तावित मंत्रिमंडल की बैठक स्थगित नहीं हुई होती तो यह विषय संभवत: निर्णीत हो गया होता। मुख्यमंत्री ने पत्र के अंत में आशा जताई कि बहुगुणा का महत्वपूर्ण सहयोग एवं मार्गदर्शन पूर्ववत मिलता रहेगा।

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कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं

harish rawat reply vijay bahuguna letter

सीएम ने लिखा है कि पूर्व सरकारों ने इस विषय पर कई बार निर्णय लिया लेकिन निर्धारित प्रक्रिया को जन स्वीकार्यता नहीं मिल सकी और वर्ग-4 की भूमि के विनियमितिकरण की दिशा में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हो पाई।

उन्होंने लिखा कि आप सहमत होंगे कि किसी भी जनोपयोगी योजना के तहत जनस्वीकार्य प्रावधानों में कुछ समय लगना स्वाभाविक है। श्रेणी 1 ख का विषय भी आपने उठाया है। यह अति गंभीर एवं संवेदनशील विषय है। इसका प्रभाव राज्य की आर्थिक, सामाजिक और कानून व्यवस्था से जुड़ा है।

आपके संज्ञान में यह तथ्य लाना चाहूंगा कि श्रेणी 1 ख में ऐसी भूमि हैं जो विभिन्न उद्देश्यों तथा प्रयोजनों के लिए विभिन्न श्रेणी के खातेदारों को अलग-अलग परिस्थितियों में सरकार ने दी है।

पत्र में लिखा है कि आप सहमत होंगे ऐसे गंभीर एवं जटिल विषय पर निर्णय लेने से पूर्व व्यापक विधिक, व्यावहारिक, सामाजिक एवं आर्थिक पहलुओं का परीक्षण कर लिया जाए। कई मामले पहले से न्यायालयों में विवादग्रस्त हैं। मैंने इस गंभीर विषय पर व्यक्तिगत तौर पर कई बार अध्ययन कर आपके नेतृत्व में मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए निर्णय के क्रियान्वयन के लिए आवश्यक प्राविधानों को तय करने के निर्देश दिए हैं। मेरा यह प्रयास होगा कि इस अतिसंवेदनशील विषय पर व्यापक विचार विमर्श कर राज्य के हित में उचित विधिक निर्णय यथाशीघ्र लूंगा।

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