वोट बैंक के लिए हरीश रावत ने बिछाई चुनावी बिसात
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मुख्यमंत्री हरीश रावत अपने 33 दिनों (आचार संहिता लागू होने तक) के कामकाज का पोथी पत्रा लेकर बुधवार को कांग्रेस दफ्तर पहुंचे।
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उन्होंने उन लोगों का मुंह बंद कराने की कोशिश की जो पूछ रहे हैं कि क्या किया। वहीं पार्टी दफ्तर में कुछ चुनावी घोषणाएं कर अपने और विजय बहुगुणा के कार्यकाल के काम के साथ चुनाव मैदान में उतरने की बात कही।
उन्होंने फिर दोहराया उनकी प्राथमिका आपदा के बाद उजड़े प्रदेश को बसाना है साथ ही देश दुनिया के सामने छह धाम (कैलाश मानसरोवर व हेमकुंड) यात्रा को फिर सुगम और सुचारू बनाना है।
उत्तराखंड के सभी नागरिकों को सस्ता राशन
मुख्यमंत्री कांग्रेस दफ्तर से तमाम चुनावी घोषणाएं की। उन्होंने बताया कि अब प्रदेश के सभी नागरिकों को सस्ता राशन उपलब्ध कराया जाएगा।
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उनका कहना है कि नेशनल फूड सिक्योरिटी के तहत प्रदेश के करीब 62 फीसदी लोगों को सस्ता राशन उपलब्ध होता है। शेष 38 फीसदी लोगों को भी बाजार से तुलनात्मक सस्ता अनाज मुहैया कराया जाएगा।
साथ ही राशन की दुकानों पर आयोडीन नमक, आयरन और प्रोटीन से युक्त स्थानीय दालें आदि भी मौजूद होंगी। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा की तर्ज पर मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना में सभी नागरिक कवर होंगे।
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चुनाव बाद जून में इस योजना को लांच किया जाएगा। इसके तहत प्रत्येक नागरिक का 30 हजार रुपए तक का बीमा होगा।
उन्होंने कहा कि गरीबों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा के साथ-साथ अन्य इनकम ग्रुप लोगों की भी मदद की जाएगी। शल्य व्याधि निधि से सरकार भारी भरकम बिलों पर 50 प्रतिशत तक शेयर करेगी।
पीपीडी मॉडल में सड़क किनारे मार्केट करेंगे विकसित
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रत्येक जनपद में एक से चार तक नई मॉडल टॉउनशिप विकसित की जाएंगी। अगर प्रयोग सफल रहता है तो इसे और आगे बढ़ाएंगे।
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उनका कहना है कि पहाड़ के लोगों को पलायन रोकना, घट रही कृषि भूमि को विकसित करना और स्लम में बदले रहे मैदानी इलाकों की व्यापक योजनाएं समय की मांग हैं।
उनका कहना है कि सड़क निर्माण को सिर्फ सम्पर्क का माध्यम नहीं बनाएंगे बल्कि पहली पीढ़ी को रोजगार मुहैया कराने के लिए पीपीडी मॉडल में सड़क किनारे मार्केट विकसित करेंगे।
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उन्होंने बताया कि जल्द ही नई रोजगार नीति भी तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश अध्यक्ष यशपाल आर्य, मंत्री दिनेश अग्रवाल, विधायक राजकुमार, प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्य कांत धस्माना, प्रवक्ता सुरेन्द्र अग्रवाल और धीरेन्द्र प्रताप आदि मौजूद थे।
क्या-क्या किया, क्या-क्या करेंगे
- कैबिनेट के माध्यम से 153 शासनादेश जारी किए।
- विकास कार्यों की 1061 स्वीकृतियां। जिसमें कुछ शासनादेश में एक से 65 तक योजनाएं व काम शामिल हैं।
- कार्यकाल के दौरान 2,452 करोड़ की योजनाएं जारी हुईं। पीडब्ल्यूडी की सर्वाधिक 666 योजनाएं स्वीकृत हुईं।
- जिलों में काम में तेजी लाने के लिए एसडीएम को प्रशासनिक, वित्तीय व तकनीकी अधिकार स्थानांतरित किए। एसडीएम स्तर पर 65, डीएम स्तर पर 13 और कमिश्नर स्तर पर दो योजनाएं स्वीकृत हुईं हैं। इसके तहत 156 करोड़ रुपए के काम शुरू हो गए हैं।
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- पहली बार कामों की सोशल ऑडिट को प्रभावी बनाया है।
- जिला योजना को एक मुश्त राशि निर्गत की जा रही है।
- 13 सालों से उपेक्षित सीमांत और घाटी क्षेत्रों की विसंगतियां पर फोकस किया है।
- 128 विद्यालयों को अनुदान सूची में शामिल किया गया। साथ ही 207 विद्यालयों को उच्चीकृत किया गया है।
- बाढ़ रोकेन के लिए 139 योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
- जिन पुरानी योजनाओं का शिलान्यास किया गया था उनमें से 99 फीसदी पर काम शुरू हो गया है।
- बिंदाल और रेस्पना नदियों को बहुउपयोगी बनाया जाएगा। बेहतर ट्रांसपोर्ट के रूप में भी इसका इस्तेमाल कैसे हो इस पर भी सर्वेक्षण कराया जा रहा है।
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- स्वेच्छिक चकबंदी में शामिल गांवों के विकास के लिए एक करोड़ का आर्थिक प्रोत्साहन
- जंगल से जुड़े गांवों में सुरक्षा दीवार बनेगी।
-एससी-एसटी वर्ग के लिए सौ करोड़ की लागत से इंस्टीट्यूट स्थापित होगा। जिसमें हस्तशिल्प, परंपरागत विषयों को पढ़ाया जाएगा ताकि रोजगार के अवसर बढ़ें।
- उर्दू पढ़ने के इच्छुक 15 बच्चों के स्कूल में एक शिक्षक होगा। आठ मदरसों को मान्यता और कब्रिस्तान से जुड़े फैसले लिए गए हैं।