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उत्तराखंड को गढ़वाल-कुमाऊं में बाट रहे हरीश रावत: हरक
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 07 Jun 2016 09:11 PM IST
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हरक सिंह रावत
- फोटो : file photo
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पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत राज्य के दो टुकड़ों में गढ़वाल और कुमाऊं में बांटना चाह रहे हैं।
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पूर्व मंत्री ने पत्रकार वार्ता कर यह आरोप भी लगाया है कि मुख्यमंत्री दोनों मंडलों की जनता के साथ दोहरा रवैया अपना रहे हैं। कहा कि कुमाऊं का विकास हो इसका मैं विरोधी नहीं हूं, लेकिन कुमाऊं का विकास गढ़वाल की कीमत पर न किया जाय।
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आरोप जड़ा कि मुख्यमंत्री रावत उनके विधानसभा क्षेत्र और रुद्रप्रयाग की जनता के साथ सौतेला व्यवहार कर रहे हैं। पूर्व मंत्री ने कहा कि साल 2013 में आयी त्रासदी के दौरान उनसे संबंधित विभागों के जरिए रुद्रप्रयाग में तबाह हुए स्कूलों, भवनों, सड़कों की मरम्मत के लिए जो धनराशि स्वीकृत की गई थी उसे मुख्यमंत्री द्वारा एक विशेष आदेश जारी कर वापस लिया जा रहा है।
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स्कूलों के जीर्णोद्धार के लिए जो बजट मुहैया कराया गया था उसे स्कूलों को मुहैया कराने की जगह वापस लिया जा रहा है जो जिले के लाखों बच्चों के साथ अन्याय है। मुख्यमंत्री रावत राजनीतिक रंजिश का बदला रुद्रप्रयाग की जनता से ले रहे हैं। जो कतई उचित नहीं है।
कहा कि मुख्यमंत्री सिर्फ अल्मोड़ा या कुमाऊं के ही सीएम नहीं वरन पूरे प्रदेश के सीएम हैं। ऐसे में उन्हें भेदभाव वाला रुख अख्तियार ही नहीं करना चाहिए। पूर्व मंत्री ने आरोप लगाया कि राजनीतिक रंजिश के चलते मुख्यमंत्री उपनल में तैनात कर्मियों की सेवाएं समाप्त कर रहे हैं। जबकि मुख्यमंत्री ने विधानसभा में आश्वासन दिया था कि किसी भी उपनलकर्मी की सेवाएं समाप्त नहीं की जाएगी।
मुख्यमंत्री का मानना है कि उपनलकर्मी मेरे रिश्तेदार हैं। जबकि हकीकत यह है कि इन कर्मियों में कोई रिश्तेदार नहीं है। टिहरी, देहरादून, चमोली, और रुद्रप्रयाग में टी बोर्ड की ओर से खोले कार्यालयों को बंद किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के आदेश पर इन कार्यालयों में रखा फर्नीचर, और तमाम सामान अल्मोड़ा पहुंचा दिया गया है।
पूर्व मंत्री ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया कि भाजपा ने विधायकों की खरीद फरोख्त की। विधायकों की बगावत से भाजपा का कोई लेनादेना नहीं है। बगावत का कारण सिर्फ मुख्यमंत्री रावत की गलत नीतियां रही हैं। सीबीआई जांच के सवाल पर कहा कि जांच एजेंसी को मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा दर्ज करना चाहिए ताकि उनकी असलियत उजागर हो सके। पूर्व मंत्री ने यह भी खुलासा कि सीबीआई ने उनसे भी चार घंटे पूछताछ की है और सीबीआई के हर सवाल को जबाब दे दिया गया है।