लोकसभा चुनाव में हार के बाद एक्टिव मोड में रावत
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मुख्यमंत्री हरीश रावत की अध्यक्षता में बृहस्पतिवार देर शाम हुई कैबिनेट की बैठक में करीब 15 छोटे-बड़े फैसले लिए गए।
सरकार ने जल विद्युत परियोजनाओं पर लगी रोक को हटवाने के लिए कानूनी लड़ाई का फैसला लिया है। वहीं वर्ग विशेष से जुड़े कुछ फैसले लेकर पंचायत चुनावों के साथ विधानसभा के उपचुनावों की भी तैयारी की है।
धारचूला और सोमेश्वर से जुड़े कुछ फैसले सरकार को राजनीतिक लाभ भी पहुंचाएंगे। मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी दी। उनके साथ मुख्यमंत्री के मीडिया प्रभारी सुरेन्द्र कुमार भी मौजूद थे।
जल विद्युत परियोजना से पाबंदी हटाने की कानूनी लड़ाई
सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित कमेटी के फैसले के खिलाफ उत्तराखंड सरकार वरिष्ठ वकीलों के पैनल के साथ कानूनी लड़ाई लड़ेगी।
कैबिनेट ने फैसला लिया है कि कमेटी जिस तहर हिमाचल प्रदेश में जल विद्युत परियोजनाओं के लिए कोई पाबंदी नहीं है उसी प्रकार उत्तराखंड की सभी योजनाओं पर लगा प्रतिबंध हटे।
इसके लिए सरकार ऊर्जा मंत्रालय और विशेषज्ञों की भी राय लेगी। मुख्य सचिव ने बताया कि हिमाचल जल विद्युत परियोजनाओं से उत्पादित डेढ़ हजार करोड़ की बिजली प्रति वर्ष बेच रहा है।
जबकि उत्तराखंड को इतनी ही बिजली खरीदनी पड़ रही है।
नका कहना है कि कमेटी ने शुरू में आपदा के कारणों के लिए अलकनंदा और भागीरथी पर लगने वाली परियोजनाओं को जिम्मेदार ठहराया था लेकिन बाद में सभी परियोजनाओं पर प्रतिबंध लगा दिया।
सरकार सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखने केलिए वरिष्ठ वकीलों का पैनल पेश करेगी।
एसिड अटैक पीड़िता को अब तीन लाख
कैबिनेट ने एसिड (तेजाब) हमले की शिकार महिलाओं को दी जाने वाली आर्थिक सहायता बढ़ाने का फैसला लिया है। अभी तक एसिड अटैक की शिकार महिला को एक लाख साठ हजार रुपए दिए जाते थे।
अब सरकार की ओर से पीड़िता को तीन लाख रुपए दिए जाएंगे।
बीआरओ से मांगे खर्च की गई रकम
बीआरओ केहिस्से आने वाली ऐसी सड़कें जिन्हें देरी होने की वजह से पीडब्ल्यूडी ने बनाया और रकम खर्च की है। उस रकम के लिए सरकार बीआरओ से क्लेम करेगी।
मुख्यसचिव ने बताया कि उत्तरकाशी, चमोली आदि में बीआरओ केअधीन सड़कों को चारधाम यात्रा के चलते पीडब्ल्यूडी से बनवाया गया है। करीब 47 करोड़ रुपए इस काम केलिए खर्च होने हैं।
जिसमें 20 करोड़ के काम पूरे हो चुके हैं और 27 करोड़ के काम चल रहे हैं। सरकार जो रकम इस काम के लिए खर्च कर रही है उसे केंद्र सरकार वापस मांगेगी।
उन्होंने बताया कि फिलहाल रुद्रप्रयाग से माणा और ऋषिकेश से गंगोत्री मात्र बीआरओ केपास रहेगा। जबकि जो सड़के राज्य सरकार के पास आनी हैं उन पर 400-500 करोड़ रुपए का काम होना है।
बीआरओ काम पूरा होने पर ही ये सड़कें राज्य सरकार को सौंपेगा।
नौगांव के नगर पंचायत के लिए नियम ढीले
नौगांव को नगर पंचायत बनाने की घोषणा काफी पुरानी है। चूंकि नौगांव तय मानक में फिट नहीं बैठ रहा था लिहाजा कैबिनेट ने नियम को ढीला करने का फैसला लिया है।
मुख्यसचिव ने बताया कि किसी नगर पंचायत को बनाने के लिए दस हजार की आबादी होनी चाहिए। साथ ही वहां की आबादी 75 फीसदी गैर कृषि पर आधारित होनी चाहिए।
चूंकि नौगांव की 50 फीसदी आबादी ही गैर कृषि पर आधारित है और आबादी के लिहाजा से भी कम है। लिहाजा कैबिनेट ने मानकों में शिथिलता का फैसला लिया है।
आयुर्वेद-युनानी चिकित्सकों का जीओ निरस्त
आयुर्वेद और युनानी चिकित्सकों से संबंधित एक पुराने शासनादेश को कैबिनेट ने निरस्त करने का फैसला लिया है।
मुख्य सचिव ने बताया कि गलती से तीन प्रमोशन के लिए 10, 18, 24 साल की जगह 8, 18, 24 साल शासनादेश जारी हो गया था।
ऐसा करने पर अन्य विभागों से भी मांग उठती लिहाजा पुराने शासनादेश को निरस्त कर दिया है। निरस्त होने पर 10 से 20 लोग प्रभावित होंगे। जिन्हें मिला आर्थिक लाभ वापस लिया जाएगा।
चतुर्थ श्रेणी का पद समाप्त करने का फैसला
छठे वेतनमान में चतुर्थ श्रेणी का पद समाप्त करने का फैसला हुआ है। इससे जुड़े कार्यों को आउटसोर्सिंग से करने के लिए रियाटर कर्मचारियों को लिया जा सकता है।
सरकार ने सभी विभागों में ऐसी व्यवस्था लागू की है। न्यायालयों के कामकाज में प्रभाव पड़ने से कैबिनेट ने हाईकोर्ट और निचली अदालतों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को फिलहाल बनाए रखने का फैसला लिया है।
पीएमजीएसवाई में प्रतिनियुक्तियों पर फैसला
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना केतहत प्रदेश के विभिन्न विभागों से प्रतिनियुक्ति पर जाने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों को लेकर भी कैबिनेट ने फैसला लिया है।
पीएमजीएसवाई के करीब 20 डिवीजन यहां काम कर रहे हैं। अक्सर किसी अधिकारी व कर्मचारी को दंड देने समय कानूनी अड़चने आती हैं।
कैबिनेट फैसला लिया है कि छोटे मोटे दंड जैसे वार्निंग आदि पीएमजीएसवाई दे सकता है। जबकि किसी अधिकारी को निलंबित या बर्खास्त करने जैसे बड़े फैसले उसके मूल विभाग की ओर से ही होंगे। इसके लिए जल्द ही शासनादेश जारी किया जाएगा।
आपदा पर मिली और राहत
आपदा को लेकर सरकार की ओर से सभी वर्गों को राहत देने के क्रम में मलबे में फंसे वाहनों या छह महीने तक आपदा की वजह से काम अवरुद्घ होने का भी मुआवजा दिया जाएगा।
कैबिनेट ने फैसला लिया है कि एक से छह महीने तक ऐसे वाहन मालिकों को 25 हजार रुपए, वाहन चालकों व परिचालकों को पांच-पांच हजार रुपए दिए जाएंगे।
जिनके वाहन एक साल से फंसे हैं या काम अवरुद्घ हैं उनकेमालिक को पचार हजार रुपए, चालक व परिचालक का दस-दस हजार रुपए दिए जाएंगे। क्षतिग्रस्त वाहनों को सरकार की ओर से पहले ही अलग श्रेणी में मुआवजा दिया जा रहा है।
इसी प्रकार आपदा से प्रभावित पालकी (डंडी)चालकों को पांच की जगह अब दस हजार रुपए दिए जाएंगे। कोई प्रभावित एक से दस डंडी तक का मुआवजा ले सकेगा।
अल्पसंख्यक निदेशालय में अतिरिक्त पद
कैबिनेट ने अल्पसंख्यक निदेशालय और उससे जुड़े जिला कार्यालयों में अतिरिक्त पदों के सजृन का फैसला लिया है। निदेशालय में 14 अतिरिक्त पदों के साथ जिलों में 27 अतिरिक्त पदों को सृजन होगा।
चीनी मिल मालिकों को 21 करोड़ की राहत
प्रदेश के चीनी मिल मालिकों पर गन्ना समितियों को दिए जाने वाले 3 प्रतिशत के समिति शुल्क का भुगतान सरकार करेगी।
कैबिनेट ने प्रदेश के चकराता, जोशीमठ, मोरी, मुनस्यारी, धारचूला जैसे इलाकों में रहने वाले लोगों की संस्कृति, लोक मान्यतांए, खानापान, रीति रिवाज, भाषा आदि के संवर्धन के लिए संस्कृति विभाग को अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी है।
निजी पूंजी निवेश के लिए विशेष पैकेज
प्रदेश के पर्वतीय इलाकों में शैक्षणिक संस्थाएं और इंस्टीट्यूट के निजी पूंजी निवेश केलिए सरकार ने विशेष पैकेज देने का फैसला लिया है।
कैबिनेट ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन किया है जो एक प्रारूप तैयार करेगी कि ऐसी संस्थाओं को आकर्षित करने केलिए क्या-क्या रियायतें दी जाएं।
एससी-एसटी आयोग अलग-अलग
कैबिनेट ने अलग एसटी आयोग बनाने के फैसले पर अपनी मुहर लगा दी है।
कैबिनेट ने फैसला लिया है कि किसी विभाग को अपने काम कराने में अगर बजट की अनुमति या फिर आर्थिक अनुमति में दिक्कत आ रही है तो वह सीएम राहत कोष से अग्रिम रकम प्राप्त करने की मांग कर सकेगा।
जिसे बाद में बजट के अनुमोदन के बाद लौटाना होगा।
किसानों पर विशेष मेहरबानी
उत्तरकाशी केचिनियालीसौढ़ और अल्मोड़ा के सोमेश्वर ब्लाक में धान की फसल लगाने वाले किसानों को नए बीजों के प्रतिस्थापन के लिए 75 फीसदी तक की सब्सिडी दी जाएगी।
साथ ही पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जनपद में जैविक मंडवा उत्पादन के लिए कृषकों को 75 फीसदी अनुदान दिया जाएगा। मंडवा केलिए थ्रैशर खरीद में भी सरकार 75 फीसदी तक अनुदान देगी।
मंडवा खेती के लिए उवर्रक और कीटनाशकों के लिए 50 फीसदी तक अनुदान दिया जाएगा। मुख्य सचिव ने बताया कि इस करीब 14 करोड़ रुपए का भार सरकार पर पड़ेगा।