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हरदा की फिर राजनीतिक अग्नि परीक्षा: रावत का संन्यास या नया समर? अगले कदम पर भाजपा-कांग्रेस दोनों की नजर

Sun, 13 Sep 2026 02:01 PM IST
Alka Tyagi अनूप वाजपेयी
अनूप वाजपेयी Published by: Alka Tyagi Updated Sun, 13 Sep 2026 02:01 PM IST
सार

Uttarakhand Politics News: हरीश रावत के पार्टी के पदों से इस्तीफा देने या पेशकश की खबरों के बीच स्पष्ट है कि उन्हें यह कदम शायद आत्मरक्षा में उठाना पड़ रहा है।
 

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Harish Rawat again in Limelight on his statement political furnace both BJP and Congress keeping next Move
हरीश रावत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत फिर अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। चुनावी मोड में आ गए उत्तराखंड के राजनीतिक अग्निकुंड में उनके बयानों की आहुति ने अलग दिशा और मुद्दा पकड़ा कर और प्रज्जवलित कर दिया है। उनके अगले कदम की प्रतीक्षा जितनी भाजपा नेताओं को है उससे अधिक कांग्रेस को है।

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रावत के कुछ दिनों पहले दिए गए बयान पर गौर करें तो उन्होंने कहा था संन्यास छुप-छुपाकर नहीं लूंगा और मेरे कुछ चितकबरे चहेतों ने मुझसे सक्रिय राजनीति से संन्यास दिलवाने की सुपारी ले रखी है।
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स्पष्ट है कि साठ वर्षों के संघर्षपूर्ण राजनीतिक जीवन जिसमें कुमाऊं के उतार-चढ़ाव के बाद गढ़वाल से सम्मानपूर्वक विदाई की आस और राजनीतिक संन्यास की चाह जरूर रखते होंगे। ऐसे में अगर आलाकमान ने उनकी पेशकश पर मुहर लगा दी तो अप्रत्यक्ष रूप से उनका राजनीतिक संन्यास ही माना जाएगा।
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देहरादून: हरीश रावत आलाकमान से करेंगे सभी पदों से इस्तीफे की पेशकश, कांग्रेस पार्टी के प्रति जताई निष्ठा

ईडी का हरीश रावत के ओएसडी रहे चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर छापा उनके यहां से नकदी और अन्य कीमती चीजों की बरामदगी उनके शेष राजनीतिक सफर का पीछा करेगी। रावत भले ही खुद को पार्टी के पदों पर बने रहने से राहुल गांधी के भ्रष्टाचार की लड़ाई में बाधा के रूप में देख रहे हैं लेकिन पार्टी में उनके संन्यास की सुपारी ले चुके उनके चितकबरे चहेतों को राजनीतिक अवसर मिला है।

जीना के ठिकानों पर छापा यूकेएसएसएससी वीपीडीओ भर्ती परीक्षा 2016 में ओएमआर शीट से छेड़छाड़ और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में हुई है ऐसे में शुद्धिकरण को लेकर घिरी भाजपा को चुनावी हथियार के रूप में दाग मिल गया है। अगर जीना को लेकर ईडी और कुछ खंगालती है या मामला लंबा खिंचता है तो भाजपा चुनाव में रावत और कांग्रेस को खींचने में गुरेज नहीं करेगी।

हरीश रावत ने अपने जीवन में कई राजनीतिक लड़ाइयां लड़ीं। कई चुनावी हार के बाद भी टूटे नहीं और सक्रियता बनाए रखी। उनकी पार्टी के नेतृत्व ने उन्हें बहुत मौके भी दिए और विश्वास भी किया है। रावत ने पार्टी के अन्य नेताओं की तरह कभी चोला भी नहीं बदला। अब उन्हें फिर राजनीतिक परीक्षा से गुजरकर खुद को पार्टी के सामने नए तरीके से अपने को सदस्य साबित कर नए समर में उतरना होगा।

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