टच स्क्रीन फोन के बाद अब टच टीवी रिमोट
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आपके साथ अक्सर ऐसा होता होगा कि आप टीवी पर अपने पसंद का कार्यक्रम देखना चाहते हैं लेकिन संबंधित चैनल खोजने में ही समय निकल जाता है।
आपकी इस समस्या को दूर करने का कारनामा किया है ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के छात्र हरीश जोशी ने। उन्होंने ऐसा टीवी रिमोट बनाया है जिससे आप अपने पसंद के कार्यक्रम को तत्काल खोज सकेंगे।
एमटेक कंप्यूटर साइंस के हरीश का आविष्कार
नई टिहरी के बेरनी गांव निवासी और दून स्थित यूनिवर्सिटी में एमटेक कंप्यूटर साइंस चतुर्थ सेमेस्टर के छात्र हरीश जोशी ने ऐसा टच स्क्रीन रिमोट तैयार किया है।
जिसे टीवी से कनेक्ट करते ही उसके डिस्प्ले में चैनलों के नाम और नंबर स्क्रीन पर आ जाते हैं। इसके बाद आप अपने मन मुताबिक नंबर दबाकर अपना पसंदीदा चैनल देख सकते हैं।
आम टीवी रिमोट की तुलना में इसका आकार बड़ा है, लेकिन वजन कम होगा। हरीश बताते हैं कि उन्होंने रिमोट के पेटेंट के लिए आवेदन किया है।
दावा किया कि अब तक बाजार में ऐसा रिमोट उपलब्ध नहीं है। बता दें कि हरीश भाजपा नेता लाखीराम जोशी के पुत्र हैं।
व्हिसल काउंटर से जानें कुकर की सीटी
हरीश जोशी की दूसरी खोज है व्हिसल काउंटर। अकसर घर पर कुकर में दाल या चावल चढ़ाने के बाद आप दूसरे काम में व्यस्त हो जाते हैं और ध्यान नहीं रहता कि कुकर में कितनी सीटी आई।
जब तक याद आता है, खाना जल चुका होता है। हरीश के बनाए व्हिसल काउंटर में एक प्लास्टिक की डिवाइस है। सीटी पर एक से दस तक नंबर लिखे हैं।
कुकर पर हर सीटी के बाद सीटी कुछ इस तरह घूमेगी कि डिवाइस पर उसका नंबर सामने आ जाएगा। ऐसे में अगर आप भूल भी जाएं कि कितनी सीटी आई, डिवाइस संख्या बता देगी।
केंद्र सरकार तक पहुंचा ट्रैक बॉल पेन
हरीश जोशी ने गत वर्ष महज सौ रुप, की कीमत का ट्रैक बाल डिजिटल बॉल पेन बनाया था।
बाजार में इस तरह के डिजिटल ट्रैक पेन मौजूद हैं, लेकिन इनकी कीमत हजारों में है। बताया कि पेन की लागत सिर्फ 30 से 40 रुपये है।
एक बार कंप्यूटर में रीडर सॉफ्टवेयर डाउनलोड करने के बाद पेन की-बोर्ड की तर्ज पर काम करता है। कागज पर लिखे जाने वाले अक्षर खुद-ब-खुद कंप्यूटर में दर्ज हो हो जाते हैं।
पेन से लिखी फाइल को सीधे मोबाइल पर मैसेज किया जा सकता है। जोशी ने बताया कि आईआईटी बीएचयू ने उनसे तीन साल का करार किया था। वहां के विशेषज्ञों ने पेन को और बेहतर बनाया।
अब यह पेन केंद्र सरकार के टेक्नोलॉजी एंड कामर्शियलाइजेशन विभाग के पास भेजा गया है। विभाग ने कुछ कंपनियों को पेन की जानकारी दी है। विभाग से अनुमति मिलते ही पेन का व्यावसायिक उत्पादन शुरू हो जाएगा।