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पहेलियां लिखकर लिम्का बुक में दर्ज कराया नाम

Mon, 13 Oct 2014 03:06 PM IST
गणेश उपाध्याय/ अमर उजाला, बागेश्वर
गणेश उपाध्याय/ अमर उजाला, बागेश्वर Updated Mon, 13 Oct 2014 03:06 PM IST
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harimohan name file on limca book of record.

1260 घंटे में 25 हजार जादुई पहेलियां लिखने वाले उत्तराखंड के बागेश्वर के हरिमोहन ऐठानी का नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हो गया है। पहेलियां लिखने का जुनून उनके सिर ऐसा चढ़ा कि आज सफलता उनके कदम चूम रही है।

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अब 39 वर्षीय ऐठानी की तमन्ना गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम दर्ज कराने की है। नगर पंचायत कपकोट के ऐठाण वार्ड निवासी हरिमोहन का जिंदगी में कुछ अलग करने का लक्ष्य बचपन से ही रहा है।
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यह लक्ष्य जुनून में तब बदला जब ‘अमर उजाला’ में बच्चों के ज्ञानवर्द्धन के लिए छपने वाली पहेलियां उनके मन मे रच-बस गईं। 2009 में उन्होंने पहेलियों बनाकर सफलता प्राप्त करने की ठानी। शुरुआत में पहेलियां तैयार करने में दिक्कतें आई, लेकिन एक हफ्ते बाद मेहनत ने रंग दिखाया।

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13 किलो कागज में बनाई हैं पहेलियां

harimohan name file on limca book of record.

हरिमोहन ने बताया कि 1260 घंटे की मेहनत के बाद उन्होंने 25 हजार से अधिक जादुई पहेलियां तैयार कीं। अलग-अलग अंकों से बनी वर्ग पहेली की खासियत यह है कि उसे जिस हिस्से से भी जोड़ा जाए उसका जोड़ समान ही आता है।

अंदर के खानों में बनी पहेलियों को उपवर्ग कहा जाता है और उन्हें गिनने पर पहेलियों की संख्या कुल 48 हजार आती हैं।

इंटर कॉलेज असों में पीटीए शिक्षक के रूप में तैनात ऐठानी का कहना है बीते माह 16 सितंबर को उन्हें डाक से लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड का प्रमाणपत्र मिला है और अब गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराने के लिए जुट गए हैं।

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड के संपादक विजय घोष की ओर से हरिमोहन ऐठानी को दिए गए प्रमाणपत्र में लिखा गया है कि उन्होंने 25 फरवरी 2009 से 21 अप्रैल 2009 तक जो 25 हजार जादुई पहेलियां (मैजिक स्क्वायर) बनाए हैं।

उनमें 10 सेकेंड में 3 गुणा 3 का मैजिक स्क्वायर बनाने की क्षमता है।

'थैंक यू अमर उजाला'

harimohan name file on limca book of record.

1260 घंटे में तैयार पहेलियों को बनाने में 450 चार्ट पेपर लगाए हैं। 18 गुणा 8 इंच वाले बुक में पैक कर रखे कागज में पहेलियां लिखी गई हैं। कागज का कुल वजन 13 किलो है।

लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम आने पर हरिमोहन ऐठानी ने अमर उजाला को धन्यवाद दिया है। श्री ऐठानी का कहना है कि जादुई पहेली तैयार करने में अमर उजाला ने सारथी का काम किया।

उनकी पहेलियों की खबर भी अमर उजाला ने पहली बार 23 अप्रैल 2009 के अंक में प्रकाशित की थी।  

हरिमोहन का प्रोफाइल

- एक फरवरी,1975 को दिवंगत शिक्षक गुमान सिंह ऐठानी के घर जन्मे।
- अंग्रेजी से स्नातक की डिग्री ली।
- वर्तमान में इंटर कॉलेज असों में पीटीए शिक्षक।

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