Haridwar: वृन्दावन और अमृतसर के दो युवा संत बने महामंडलेश्वर, श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी ने की ताजपोशी
समारोह में श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि संत समाज में नए युग की शुरुआत हो रही है। अखाड़ों में युवा और पढ़े-लिखे साधु संत आ रहे हैं।
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हरिद्वार में श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी ने दो युवा संतों को महामंडलेश्वर बनाया गया है। अखाड़ा परिषद अध्यक्ष एवं श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी सचिव श्रीमहंत रविन्द्रपुरी के सानिध्य में रमता पंचों एवं संतों ने वृन्दावन के स्वामी सत्यानंद सरस्वती एवं अमृतसर के स्वामी मनकामेश्वर गिरि का तिलक चादर कर महामंडलेश्वर पदवी प्रदान की।
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बंगाली मोड़ स्थित अखाड़े की छावनी में आयोजित समारोह में श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने कहा कि संत समाज में नए युग की शुरुआत हो रही है। अखाड़ों में युवा और पढ़े-लिखे साधु संत आ रहे हैं। दोनों महामंडलेश्वर शिक्षित और युवा हैं। दोनों युवा संत सनातन परंपरा की मर्यादा रखते हुए विश्व में धर्म का प्रचार करेंगे।
श्रीमहंत रविन्द्रपुरी ने बताया कि धर्म के प्रचार के लिए अखाड़ों द्वारा संतों को महामंडलेश्वर का पद प्रदान किया जाता है। महंत जसविन्दर सिंह और महंत दामोदर दास ने कहा कि नवनियुक्त महामंडलेश्वर सनातन धर्म परंपरा के प्रचार प्रचार में योगदान करेंगे।
नवनियुक्त महामंडलेश्वर स्वामी सत्यानंद सरस्वती एवं स्वामी मनकामेश्वर गिरि ने कहा कि संत परंपरा का पालन करते हुए सनातन धर्म संस्कृति के प्रचार प्रसार में योगदान करेंगे। इस अवसर पर महंत हनुमान बाबा, महंत प्रेमदास, महंत सूर्यमोहन गिरि, महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद, महंत कृष्णानंद, महंत सत्यानन्द गिरि, महंत विष्णुदास, बाबा बलराम दास हठयोगी और महंत रघुवीर दास समेत कई संत मौजूद रहे।