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Haridwar stampede: राजाजी नेशनल पार्क क्षेत्र में मंदिर मार्गों पर बनती गई दुकानें, जिम्मेदारों पर सवाल

Mon, 28 Jul 2025 12:13 PM IST
रेनू सकलानी संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार Published by: रेनू सकलानी Updated Mon, 28 Jul 2025 12:13 PM IST
सार

हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर पैदल मार्ग पर रविवार की सुबह नौ बजे करंट लगने की अफवाह से भगदड़ मच गई। हादसे में एक 12 साल के बालक सहित आठ श्रद्धालुओं की मौत हो गई और 30 लोग घायल हो गए। 

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Haridwar stampede Shops built on temple routes in Rajaji National Park area questions on responsible persons
एसएसपी प्रमेंद्र सिंह डोबाल - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

मनसा देवी मंदिर पैदल मार्ग पर हुए हादसे के बाद सिस्टम की एक के बाद एक खामियां और अनदेखी सामने आ रही हैं। सबसे बड़ी लापरवाही और अनदेखी ये है कि मंदिर जाने वाले दोनों ही मार्ग राजाजी नेशनल पार्क के अधीन आते हैं। मगर दोनों ही रास्तों पर जगह-जगह अस्थायी दुकानें बनती चली गई।

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सवाल उठते हैं कि इन अतिक्रमण पर महकमे के अधिकारी सख्त रवैया इख्तियार क्यों नहीं करते। हर समय गश्त पर रहने का दम भरने वाले पार्क के कर्मचारी इन अतिक्रमण को होने से क्यों नहीं रोक पाते। मनसा देवी मंदिर तक पहुंचने के दो प्रमुख रास्ते हैं। एक मुख्य बाजार से होकर और दूसरा ब्रह्मपुरी से होकर जाता है।
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रोपवे के अलावा भारी संख्या में लोग पैदल ही मंदिर पर जाते
हैरानी की बात यह है कि दोनों ही रास्तों पर धीरे-धीरे अस्थायी दुकानों की कतारें बन गई हैं। कहीं खिलौनों की दुकानें, कहीं प्रसाद के स्टॉल तो कहीं चाय-नाश्ते के ठेले, इन सबने रास्ता इतना संकीर्ण कर दिया है कि श्रद्धालुओं को निकलने में भी मशक्कत करनी पड़ती है। रोपवे के अलावा भारी संख्या में लोग पैदल ही मंदिर पर जाते हैं।

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ये भी पढ़ें...Haridwar Stampede:  हादसे के बाद मार्ग पर लगी अवैध दुकानों को बंद कर छिपाया सामान, बिजली का तार भी बन गया राज



गर्मी, उमस और थकान के बीच ऊपर चढ़ाई करने वाले श्रद्धालुओं के लिए कहीं कोई ठहराव या बैठने की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में लोग रास्ते में ही बैठने लगते हैं, जिससे कई बार जाम जैसी स्थिति बन जाती है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी झेलनी पड़ती है।

राजाजी टाइगर रिजर्व प्रशासन और जिला प्रशासन, मंदिर ट्रस्ट की भूमिका सवालों के घेरे में है। कोई भी विभाग यह बताने को तैयार नहीं कि किसकी अनुमति से इन दुकानों ने जगह घेर ली है। न तो इन्हें हटाने की कार्रवाई हो रही है, न ही कोई वैकल्पिक व्यवस्था बनाई गई है।

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