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हरिद्वार रामशंकर हत्याकांड: अब CBI करेगी जांच, हाईकोर्ट के आदेश पर देहरादून में दर्ज हुई एफआईआर

Mon, 11 May 2026 09:18 PM IST
Alka Tyagi संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार
संवाद न्यूज एजेंसी, हरिद्वार Published by: Alka Tyagi Updated Mon, 11 May 2026 09:18 PM IST
सार

घटना आठ दिसंबर 2024 की है। रामशंकर उस दिन घर से अचानक लापता हो गए थे। अगले दिन रामशंकर के पिता की शिकायत पर खानपुर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की और मामले की जांच शुरू की थी। 

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Haridwar Ram Shankar Murder Case CBI to Now do Investigation FIR Registered in Dehradun on High Court's Order
CBI - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

दिसंबर 2024 में हरिद्वार के खानपुर क्षेत्र में चंद्रपुरी गांव निवासी रामशंकर की हत्या की जांच अब सीबीआई करेगी। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई की देहरादून शाखा में सोमवार को इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मृतक रामशंकर की पत्नी की याचिका की सुनवाई पर हाईकोर्ट ने माना था कि खानपुर पुलिस ने इस हत्याकांड की जांच में लापरवाही बरती है।

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बिना फॉरेंसिक जांच के ही चार्जशीट दाखिल कर दी गई। इसके अलावा दो महत्वपूर्ण आरोपियों की जांच भी नहीं की गई जिनका नाम आरोपपत्र से निकाल दिया गया। यही नहीं घटना में इस्तेमाल हुई कार का रूट ट्रैक और फॉरेंसिक जांच भी नहीं की गई। घटना आठ दिसंबर 2024 की है। रामशंकर उस दिन घर से अचानक लापता हो गए थे। अगले दिन रामशंकर के पिता की शिकायत पर खानपुर पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की और मामले की जांच शुरू की।
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पांच दिन बाद 13 दिसंबर 2024 को पुलिस ने जांच के दौरान उन्हीं के गांव के एक संदिग्ध रोबिन व एक नाबालिग को पकड़ा था। उनसे पूछताछ हुई तो बताया गया कि उन्होंने लूट करने के बाद रामशंकर की हत्या कर दी है। इसके बाद उनके शव को कार में डालकर बाणगंगा के किनारे रेत में दबा दिया है।
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दोनों की निशानदेही पर बाणगंगा नदी के किनारे रेत से एक प्लास्टिक के बोरे से रामशंकर का शव बरामद किया गया। पुलिस ने पूछताछ के आधार पर एक आरोपी अंकित फारर का नाम भी प्राथमिकी में शामिल कर लिया। चार दिन बाद एक स्थानीय फैक्टरी के पीछे से कार भी बरामद कर ली गई। कार के संबंध में पता चला कि यह कार स्थानीय निवासी अनिल कुमार की है। इसे घटना से पहले सोनू फौजी लेकर गया था। इस मामले में सभी पांचों आरोपियों की जांच हुई जिनमें से पुलिस ने चार्जशीट केवल रोबिन, अंकित और नाबालिग के खिलाफ दाखिल की।

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अनिल कुमार और सोनू फौजी का नाम आरोपपत्र में शामिल नहीं किया गया। इस मामले का विचारण भी हरिद्वार जिला न्यायालय में शुरू हो गया। इसके बाद रामशंकर की पत्नी ने इस प्रकरण को हाईकोर्ट में उठाते हुए कई आरोप लगाए। कई तथ्यों को हाईकोर्ट के सामने रखा गया जिससे कोर्ट ने संतुष्ट होकर स्थानीय पुलिस की जांच दोषपूर्ण पाते हुए जांच सीबीआई के हवाले करने के आदेश दिए।

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