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कभी हरिद्वार में भी थे आंध्र जैसे हालात

Wed, 19 Feb 2014 09:59 PM IST
अमर उजाला, हरिद्वार
अमर उजाला, हरिद्वार Updated Wed, 19 Feb 2014 09:59 PM IST
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haridwar opposeed the uttarakhand state

उत्तराखंड बनते समय हरिद्वार जनपद नए राज्य में शामिल होने का न केवल कड़ा विरोध कर रहा था बल्कि उत्तर प्रदेश विधानसभा ने हरिद्वार विहीन उत्तराखंड के चार प्रस्ताव केंद्र को भी भेजे थे।

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यह और बात है कि राज्य बनने के बाद नए राज्य का सबसे अधिक लाभ हरिद्वार के हिस्से आया है। जिस दिन राज्य का गठन हो रहा था उस दिन हरिद्वार जिले में वैसे ही हालात थे जैसे इस समय आंध्रप्रदेश में हैं।
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टिकैत ने डाला था डेरा
9 नवंबर वर्ष 2000 के दिन हरिद्वार को शामिल करने के विरोध में महेंद्र सिंह टिकैत ने हजारों किसानों के साथ हरिद्वार में डेरा डाल रखा था। कई स्थानों पर किसानों ने आगजनी की। तमाम ट्रेनें रोक दी गई।
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हरिद्वार के तीन विधायक अंबरीष कुमार, रामसिंह सैनी और काजी मोईयूद्दीन अपने समर्थकों के साथ सड़कों पर आकर हरिद्वार को मिलाने का विरोध कर रहे थे। तमाम बाजार बंद थे। जनपद के कईं भागों की बिजली आंदोलनकारियों ने काट दी थी।

सबसे ज्यादा मलाई हरिद्वार के हिस्से
राज्य बनने पर धीरे धीरे हालात सामान्य की ओर आए और हरिद्वार को राज्य के विकास का बहुत बड़ा हिस्सा मिल गया। आज आलम यह है कि अकेले हरिद्वार जनपद में नई पुरानी औद्योगिक इकाईयों की संख्या 1000 के पार पहुंच गई है।

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राज्य के विकास की मलाई वास्तव में हरिद्वार के हिस्से आई है और अब सभी जनपदवासी नए राज्य में हरिद्वार को मिलाने पर संतोष व्यक्त करते नजर आते हैं।

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