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हरिद्वार: जीवन साथी संग अपने ख्वाबों को पूरा करेगी दृष्टिबाधित नंदिनी, पढ़ें अनोखी कहानी...

Mon, 28 Jun 2021 05:44 PM IST
अलका त्यागी दीपक प्रजापति, अमर उजाला, हरिद्वार
दीपक प्रजापति, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: अलका त्यागी Updated Mon, 28 Jun 2021 05:44 PM IST
सार

आठ साल की उम्र में नंदिनी की आंखों की रोशनी चली गई थी। नंदिनी की मां गंगा घाटों के किनारे प्लास्टिक की केन बेचकर अपना व बेटी का पालन पोषण कर रही है।

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Haridwar News: Boy Married with blind Bride
दृष्टिबाधित नंदिनी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बचपन में आंखों की रोशनी चले जाने के बाद भी हार न मानने वाली नंदिनी अब अपने जीवन साथी के साथ मिलकर अधूरे ख्वाबों को पूरा करेगी। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद राजस्थान के युवक ने भीमगोड़ा स्थित गंगा किनारे मां मुनिया के साथ झोपड़ी में रहने वाली दृष्टिबाधित 19 वर्षीय नंदिनी को जीवन साथी बनाया है।

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आठ साल की उम्र में नंदिनी की आंखों की रोशनी चली गई थी। नंदिनी की मां गंगा घाटों के किनारे प्लास्टिक की केन बेचकर अपना व बेटी का पालन पोषण कर रही है। नंदिनी को पेंटिंग और गायकी का शौक है। आंखों की रोशनी जाने के बाद भी नंदिनी ने हार नहीं मानी। 12 कक्षा तक की पढ़ाई सीएनआई गर्ल्स कॉलेज से की। 
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अमर उजाला में 26 अप्रैल को गंगा किनारे रहने वाली नंदिनी के गले में सरस्वती का वास शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। खबर सोशल मीडिया पर खूब शेयर हुई और राजस्थान के जालौर निवासी बचन चौहान तक भी पहुंच गई।

गुजरात की एक कंपनी में कंप्यूटर ऑपरेटर बचन चौहान ने नंदिनी को जीवन संगिनी बनाने का फैसला किया और मई माह में अपने परिजनों के साथ नंदिनी की मां से मिलने हरिद्वार आ गया। 


बचन चौहान ने नंदिनी से शादी करने की इच्छा जताई। नंदिनी की मां के राजी होने पर 19 जून को धूमधाम से भीमगोड़ा में नंदिनी और बचन सात जन्मों के बंधन में बंध गए।

बचन चौहान का कहना है कि वह नंदिनी के हौसले का कायल है। राजस्थान पहुंचने के बाद वह नंदिनी को आगे पढ़ाएगा।उनका कहना है कि नंदिनी के गायकी का शौक पूरा कराने के लिए कोई बड़ा मंच भी तलाशेगा। ताकि नंदिनी अपनी आवाज का जादू लोगों के सामने बिखेर सके। 

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