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Haridwar News : जमीन अपने नाम कराने का एक और मौका, हरिद्वार के लिए लागू हुआ आदेश
Mon, 11 Jan 2021 03:26 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
बसंत कुमार, अमर उजाला, हरिद्वार
बसंत कुमार, अमर उजाला, हरिद्वार
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Mon, 11 Jan 2021 03:26 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला (File Photo)
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14 साल बाद जनपद के लोगों के पास टुकड़ों में खरीदी गई जमीनों के दाखिल खारिज कराकर अपने नाम कराने का एक और मौका है। इससे लोगों के शून्य बैनामों को कानूनी दर्जा मिल सकेगा। यह आदेश केवल हरिद्वार जनपद के लिए लागू किया गया है। दो साल पहले भी यह आदेश जारी हुआ था, लेकिन तब बहुत कम लोग इसका लाभ उठा पाए थे।
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राज्य गठन के बाद हरिद्वार, रुड़की, भगवानपुर, लक्सर आदि क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जमीनों की खरीद-फरोख्त हुई। वर्ष 2006 से पहले बिल्डरों की ओर से कृषि भूमि की प्लाटिंग कर बेची गई जमीन का बैनामा होने के बाद भी खरीदार को मालिकाना हक मिलने का प्रावधान नहीं था। क्योंकि, नियमानुसार, 18 बीघा से कम कृषि भूमि वाले काश्तकार की जमीन का अधिनियम 168ए का उल्लंघन मानते हुए दाखिल खारिज नहीं किया जा सकता था।
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ऐसे में लोगों ने बिल्डरों के मार्फत प्लाटों के बैनामे कराने के बाद आशियाने भी बना लिए, लेकिन जब बैनामा कराने के बाद तहसील में ऐसे प्लाट का अपने नाम दाखिल खारिज कराने के लिए आवेदन किया तो बैनामे शून्य मान लिए गए। हालांकि, इसके बाद सरकार ने नियमों में परिवर्तन करते हुए सभी के दाखिल खारिज करने आदेश जारी कर दिया था, लेकिन अक्तूबर 2006 से पहले हुए बैनामों के शून्य होने से वह दाखिल खारिज नहीं पा रही थे।
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इससे जमीनों पर मकान, दुकान और अन्य भवनों के साथ ही कृषि कार्य तो हो रहे थे, लेकिन खरीदने वालों को दाखिल खारिज नहीं होने से मालिकाना हक नहीं मिल पा रहा था। अब सरकार ने ऐसे सभी बैनामों को विधि मान्य या कानूनी रूप देने की छूट दे दी है। इसके लिए दाखिल खारिज कराने वालों को जमीन के वर्ष 2018 के सर्किल रेट के दस प्रतिशत से शुल्क जमा कराना होगा। यह शुल्क देकर अक्तूबर 2006 के बाद के सभी बैनामों को मान्यता मिल सकेगी।
एक साल के लिए दी छूट
शासनादेेशों के अनुसार, इस छूट का लाभ एक साल तक उठाया जा सकता है। इसके लिए संबंधित उपजिलाधिकारी के समक्ष आवेदन करना होगा। जांच पड़ताल के बाद एसडीएम को तीस दिन के अंदर निर्धारित शुल्क वसूलकर ऐसे बैनामों का दाखिल खारिज कराना होगा। इसमें शुल्क केवल खरीदी गई जमीनों के आधार पर ही लिया जाएगा। जमीनों के ऊपर हुए निर्माण का शुल्क नहीं वसूला जाएगा। इससे राजस्व में भी बढ़ोत्तरी हो सकेगी।
आदेशों का पालन कराने के लिए सभी उपजिलाधिकारियों को निर्देशित किया जा चुका है। शर्तों के आधार पर तहसीलों में जाकर अपना आवेदन करके ऐसे बैनामों के आधार पर शुल्क जमा कराकर जमीनों का दाखिल कराया जा सकता है।
- केके मिश्रा, अपर जिलाधिकारी, वित्त और राजस्व