हरिद्वार: बालकृष्ण बोले- मरीजों पर ईसाई बनने के लिए डाला गया दबाव, आईएमए अध्यक्ष को देना पड़ेगा जवाब
बाबा रामदेव के एलोपैथी को लेकर दिए गए बयान के बाद से उनके बचाव में उतरे आचार्य बालकृष्ण ने अब आईएमए पर हमला बोला है।
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दिल्ली की अदालत की ओर से आईएमए अध्यक्ष जॉन ऑस्टिन जयलाल को समन जारी होने के बाद पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि आयुर्वेद की स्थापना के लिए हम लंबे संघर्ष को तैयार हैं।
संपूर्ण आयुर्वेद और स्वामी रामदेव के खिलाफ टिप्पणी करने वाले अध्यक्ष जॉन ऑस्टिन जयलाल को न्यायिक प्रणाली के माध्यम से सबक सिखाया जाएगा। आचार्य ने आरोप लगाया कि जयलाल ने अस्पतालों में भर्ती कोरोना मरीजों पर ईसाई बनने के लिए दबाव डाला है।
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आईएमए अध्यक्ष जयलाल के खिलाफ दिल्ली की द्वारिका कोर्ट में अधिवक्ता संजीव उनियाल और धवल उनियाल ने याचिका दायर की थी। उसी पर सुनवाई के बाद सम्मन जारी किया गया है और अध्यक्ष को सोमवार को अदालत के सन्मुख अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया है।
सम्मन जारी होने के बाद बातचीत करते हुए पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि अध्यक्ष पद पर रहते हुए उन्होंने मरीजों में ईसाइयत फैलाने का अभियान चला रखा है। दूसरी तरफ उनके द्वारा आयुर्वेद को बेकार बताने की मुहिम आईएमए के बैनर पर शुरू की गई है।
एलोपैथी का प्रवेश जबरन थोपा गया
आचार्य ने कहा कि आयुर्वेद एक संपूर्ण चिकित्सा पद्धति है। भारत में प्राचीनकाल से आयुर्वेद के माध्यम से इलाज होता आ रहा है। आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के आगमन के बाद एलोपैथी का प्रवेश जबरन थोपा गया।
उन्होंने कहा कि अंग्रेजों से पहले भारत में आयुर्वेदिक और प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति से ही राजा महाराजा और बादशाहों का इलाज किया जाता था। हमारे ऋषियों ने गहन शोध के आधार पर आयुर्वेद को विकसित किया।
इस पद्धति के साथ योग और प्राणायाम को जोड़ने का काम स्वामी रामदेव के नेतृत्व में पतंजलि योगपीठ में किया जा रहा है। आचार्य ने कहा देश के अनेक डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने पतंजलि अनुसंधान केंद्र आकर हमारा काम देखा। आईएमए यदि सबकुछ नकारना चाहेगी तो यह देश उसे स्वीकार नहीं करेगा।