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हरिद्वार महाकुंभ 2021ः विद्वानों के शहर में ही दिखी मातृभाषा लिखने में अशुद्धियां
Sun, 07 Mar 2021 12:59 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Sun, 07 Mar 2021 12:59 PM IST
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मातृभाषा हिंदी की अशुद्धियां
- फोटो : अमर उजाला
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कुंभनगरी संत और महंतों का ही नहीं बल्कि संस्कृत व हिंदी के विद्वानों का शहर भी है। इसके बाद भी शहर में कई जगहों पर लगे बोर्ड पर मातृभाषा हिंदी की अशुद्धियां हैं।
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सरकारी बोर्ड पर भी हिंदी की अशुद्धियां देखने को मिलती हैं। हरिद्वार में देव संस्कृति विवि, गुरुकुल कांगड़ी सम विवि, एसएमजेएन पीजी कॉलेज, महिला महाविद्यालय सती कुंड और चिन्मय डिग्री कॉलेज हैं।
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इन कालेजों ने हिंदी के कई विद्वान दिए हैं, लेकिन शहर में जगह-जगह लगे हिंदी की अशुद्धियों वाले बोर्ड और बैनर लोगों को टीस पहुंचाते हैं। गलती पकड़ में आने के बाद भी उसमें सुधार नहीं किया जा रहा है। शहर में हिंदी की अशुद्धियों वाले कुछ बोर्ड इस तरह हैं।
1- गंगा किनारे कई जगहों पर रामराम जी योग सर्वांगीण विकास संस्था के बोर्ड लगे हैं। इनमें कई अशुद्धियां हैं। प्रेमी युगलों की जगह ‘यूगलो’ लिखा है। टहल सकें की जगह ‘ठहल सके’ लिखा है।
2- स्टेशन रोड पर ट्रेवल एजेंट के बोर्ड में कई अशुद्धियां हैं। इनमें एयर टिकट को ‘ऐयर’ लिखा है। इसी बोर्ड पर चंडीगढ़ की जगह ‘चंढ़ीगण’ लिखा गया है।
3- पुरानी रानीपुर मोड़ के पास फलों की दुकान है। इसके बाहर लगे बोर्ड पर सुपर ‘फ्रुट’ सेंटर लिखा है, जबकि सही शब्द फ्रूट है।
4- सिंहद्वार फ्लाईओवर के पास सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के लगाए बोर्ड पर ही गलती हैं। बोर्ड उज्जवला योजना का है और इसमें मुख्यमंत्री की फोटो भी लगी है। ‘उज्ज्वला’ गलत लिखा गया है।
5- स्टेशन रोड पर विशाल प्रसाद भंडार की दुकान है, लेकिन इसमें ‘प्रशाद’ लिखा है।
6- कखनल स्थित हरिराम आर्य इंटर कालेज के खेल मैदान की दीवार पर बोर्ड लगा है। इसमें फील्ड की जगह ‘फिल्ड’ लिखा है।
7- रोड़ी बेलवाला मैदान को जोड़ने वाले फ्लाईओवर की दीवार पर वसुधैव कुटुंबकंभ की जगह वसुधैव कुटुमं दर्ज किया है।
8-बैरागी कैंप के लिए जाने वाले मार्ग पर ‘संतो’ की नगरी लिखा है, जबकि सही शब्द संतों है।
हरिद्वार संत-महंतों और विद्वानों की नगरी है। आचार्य किशोरीदास वाजपेयी जैसे व्याकरणाचार्य यहीं से निकले हैं। हिंदी के कई विद्वान और लेखकों ने देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है। शहर में कई जगहों पर लगे बोर्ड में हिंदी की गलतियां ठेस पहुंचाती हैं। इससे बच्चे गलत उच्चारण करते हैं। जहां कहीं भी गलत शब्द लिखे बोर्ड लगे हैं, वहां टोकना चाहिए, ताकि उसमें सुधार किया जा सके।
- सुनील कुमार बत्रा, प्राचार्य, एसएमजेएन पीजी कॉलेज
2- स्टेशन रोड पर ट्रेवल एजेंट के बोर्ड में कई अशुद्धियां हैं। इनमें एयर टिकट को ‘ऐयर’ लिखा है। इसी बोर्ड पर चंडीगढ़ की जगह ‘चंढ़ीगण’ लिखा गया है।
3- पुरानी रानीपुर मोड़ के पास फलों की दुकान है। इसके बाहर लगे बोर्ड पर सुपर ‘फ्रुट’ सेंटर लिखा है, जबकि सही शब्द फ्रूट है।
4- सिंहद्वार फ्लाईओवर के पास सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के लगाए बोर्ड पर ही गलती हैं। बोर्ड उज्जवला योजना का है और इसमें मुख्यमंत्री की फोटो भी लगी है। ‘उज्ज्वला’ गलत लिखा गया है।
5- स्टेशन रोड पर विशाल प्रसाद भंडार की दुकान है, लेकिन इसमें ‘प्रशाद’ लिखा है।
6- कखनल स्थित हरिराम आर्य इंटर कालेज के खेल मैदान की दीवार पर बोर्ड लगा है। इसमें फील्ड की जगह ‘फिल्ड’ लिखा है।
7- रोड़ी बेलवाला मैदान को जोड़ने वाले फ्लाईओवर की दीवार पर वसुधैव कुटुंबकंभ की जगह वसुधैव कुटुमं दर्ज किया है।
8-बैरागी कैंप के लिए जाने वाले मार्ग पर ‘संतो’ की नगरी लिखा है, जबकि सही शब्द संतों है।
हरिद्वार संत-महंतों और विद्वानों की नगरी है। आचार्य किशोरीदास वाजपेयी जैसे व्याकरणाचार्य यहीं से निकले हैं। हिंदी के कई विद्वान और लेखकों ने देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई है। शहर में कई जगहों पर लगे बोर्ड में हिंदी की गलतियां ठेस पहुंचाती हैं। इससे बच्चे गलत उच्चारण करते हैं। जहां कहीं भी गलत शब्द लिखे बोर्ड लगे हैं, वहां टोकना चाहिए, ताकि उसमें सुधार किया जा सके।
- सुनील कुमार बत्रा, प्राचार्य, एसएमजेएन पीजी कॉलेज