हरिद्वार महाकुंभ 2021: शाही स्नान संपन्न होते ही बैरागी कैंप से उखड़ने लगे टेंट और तंबू
- कोरोना संक्रमण काल के बीच चल रहे अधिकारिक महाकुंभ में बैरागी संतों की ओर से बैरागी कैंप में अपने पंडाल सजाए गए थे, जिसमें देशभर के संतों ने बड़े-बड़े पंडाल लगाए थे। लेकिन अब टेंट और तंबू उखड़ने लगे हैं।
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महाकुंभ का अंतिम शाही स्नान होने के बाद बैरागी कैंप से भी टेंट और तंबू उखड़ने लगे हैं। इसमें कई संत तो ऐसे हैं, जिन्हें कोरोना संक्रमण के चलते दस दिन भी टेंट और तंबू लगाकर रहने का अवसर नहीं मिल सका है।
कोरोना संक्रमण काल के बीच चल रहे अधिकारिक महाकुंभ में बैरागी संतों की ओर से बैरागी कैंप में अपने पंडाल सजाए गए थे, जिसमें देशभर के संतों ने बड़े-बड़े पंडाल लगाए थे।
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कोरोना के चलते कुछ संत तो देरी से कुंभ मेला में पहुंचने के कारण दस दिन पहले तक ही पंडालों को सजाने संवारने में लगे हुए थे, लेकिन कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के बीच हुआ आखिरी शाही स्नान संपन्न होते ही तेजी के साथ पंडाल उखड़ने शुरू हो गए हैं। वहीं, माना जा रहा है कि अगर कोरोना न होता तो बैरागी कैंप से संत मई के पहले सप्ताह तक टीके रहते।
शाही स्नान संपन्न होते ही समेटने लगे सामान
महाकुंभ का अंतिम शाही स्नान संपन्न होते ही मेला प्रशासन की ओर से व्यवस्था बनाने के लिए लगाए गए साजो-सामान को समेटना शुरू कर दिया गया है। वहीं, कोरोना संक्रमण को लेकर श्रद्धालुओं को अब माइक से जागरूक भी नहीं किया जा रहा है। जबकि, सरकार के आदेशों के अनुसार अभी दो दिन और महाकुंभ चलेगा।
धर्मनगरी में महाकुंभ की शुरुआत अखाड़ों की ओर से मार्च के पहले सप्ताह में ही पेशवाई के साथ हो गई थी। अखाड़ों ने महाशिवरात्रि का पहला शाही स्नान भी 11 मार्च को किया। हालांकि, सरकार की ओर से अधिसूचना जारी कर एक से 30 अप्रैल तक महाकुंभ का फैसला लिया गया था।
स्नान पर्वों को व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए मेला प्रशासन की ओर अनेक व्यवस्थाएं की गईं। कोरोना संक्रमण के चलते श्रद्धालुओं की संख्या दिनप्रतिदिन घटने से अंतिम शाही स्नान पर बहुत कम लोग हरिद्वार पहुंचे। 27 अप्रैल का शाही स्नान संपन्न होने के साथ ही बिजली के पोल, पेयजल और अन्य सामान समेटने शुरू हो गए हैं।