{"_id":"5feeab308ebc3e3b6a748486","slug":"haridwar-maha-kumbh-mela-2021-news-dharm-dhwaja-bring-from-forest-after-van-devta-prayer","type":"story","status":"publish","title_hn":"Haridwar Mahakumbh 2021 : कुंभ का बड़ा आयोजन, वन देवता से प्रार्थना कर जंगल से धर्म ध्वजा लाते हैं संत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Haridwar Mahakumbh 2021 : कुंभ का बड़ा आयोजन, वन देवता से प्रार्थना कर जंगल से धर्म ध्वजा लाते हैं संत
Fri, 01 Jan 2021 10:42 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal
कौशल सिखौला, अमर उजाला, हरिद्वार
कौशल सिखौला, अमर उजाला, हरिद्वार
Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal
Updated Fri, 01 Jan 2021 10:42 AM IST
विज्ञापन
snan, haridwar
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जंगलों में जाकर धर्म ध्वजा को न्योता देना और वन देवता की अनुमति से उसे अखाड़ों में लाना कुंभ का बड़ा आयोजन है। प्रत्येक कुंभ में साधु संन्यासी अखाड़ों में धर्म ध्वजाओं की स्थापना समारोह पूर्वक करते हैं। धर्म ध्वजा स्थापना के बाद दशनाम अखाड़ों में कुंभ के आयोजन प्रारंभ हो जाते हैं।
विज्ञापन
नागाओं, बैरागियों, उदासियों और निर्मलों के कुल 13 अखाड़े हैं। उनका जुड़ाव देश के हजारों मठों और आश्रमों से है। जब भी कुंभ मेले का आयोजन किसी भी कुंभ नगर में होता है, तब संतों की पेशवाई के बाद धर्म ध्वजा की स्थापना होती है।
विज्ञापन
उससे पहले अखाड़े अपने-अपने मुहूर्त निकालकर वन देवता से धर्म ध्वजा देने की मांग करने जंगल जाते हैं। इसके लिए पहले समय में विधिवत समारोह होता था। आज भी यह रस्म अदायगी की जाती है। एक मुहूर्त में साधु संत वनों में जाकर ऊंची धर्म ध्वजा के लिए पेड़ का चयन करते हैं।
विज्ञापन
इस पेड़ पर अखाड़ा निशानदेही कर देता है। बाद में एक और मुहूर्त में उस वन से पेड़ को काटा जाता है। काटने से पहले साधु बाबा बाकायदा पूजा कर पेड़ से उसे काटने की अनुमति लेते हैं।
बाबा गोपालानंद बताते हैं कि उस जमाने में कई बार साधु संतों को आभास हो जाता था कि जिस पेड़ को विशाल ध्वजा के लिए लेने आए हैं, वह पेड़ वन छोड़कर उनके साथ जाने को तैयार नहीं।
तब उस पेड़ की जगह किसी और पेड़ का चयन किया जाता था। अखाड़ों में धर्म ध्वजा स्थापना के दिन भव्य आयोजन होते हैं। इस बार यह आयोजन फरवरी के अंतिम सप्ताह या मार्च में होने वाले स्नान से पहले होगा।