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हरिद्वार कुंभ 2021 : महाकुंभ समापन से पहले अखाड़ा परिषद हुई दो फाड़, बैरागियों ने संन्यासियों से तोड़े सभी संबंध

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार Published by: Nirmala Suyal Nirmala Suyal Updated Mon, 26 Apr 2021 09:11 PM IST
सार

श्रीपंच दिगम्बर अणि अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत रामकृष्ण दास नगरिया को सर्वसम्मति से परिषद का अध्यक्ष चुना गया है। संन्यासी अखाड़ों महाकुंभ सिर्जन की घोषणा के बाद बैरागी और संन्यासी अखाड़ों के बीच तनाव पैदा हो गया था।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी
अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरी - फोटो : अमर उजाला (File Photo)
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विस्तार

महाकुंभ समापन से पहले ही अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद दो फाड़ हो गई है। बैरागी अखाड़ों ने अलग से अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद का गठन किया है। श्रीपंच दिगम्बर अणि अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत रामकृष्ण दास नगरिया को सर्वसम्मति से परिषद का अध्यक्ष चुना गया है। संन्यासी अखाड़ों महाकुंभ सिर्जन की घोषणा के बाद बैरागी और संन्यासी अखाड़ों के बीच तनाव पैदा हो गया था।   



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आखिरकार लंबे समय तक चले गतिरोध अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद बैरागी और संन्यासी अखाड़े एक दूसरे से अलग हो गए। बैरागी कैंप स्थित दिगंबर अणि अखाड़े में हुई तीनों वैष्णव अखाड़ों के पदाधिकारियों और बैरागी संतों की बैठक में अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद के गठन किया गया।

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श्रीपंच निर्मोही अणि अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत राजेंद्रदास को परिषद का राष्ट्रीय महामंत्री, श्रीपंच निर्वाणी अणि अखाड़े के अध्यक्ष श्रीमहंत धर्मदास को राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, निर्वाणी अणि अखाड़े के राष्ट्रीय महासचिव महंत गौरीशंकर दास को राष्ट्रीय प्रवक्ता मनोनीत किया गया है।

लंबे समय से वैष्णव अखाड़ों की अलग अखाड़ा परिषद के गठन पर विचार किया जा रहा था

अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता महंत गौरीशंकर दास ने बताया कि लंबे समय से वैष्णव अखाड़ों की अलग अखाड़ा परिषद के गठन पर विचार किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद में गिनती के लिए 13 अखाड़े हैं। लेकिन वैष्णव अखाड़ों के साथ लगातार भेदभाव किया जा रहा था।

संन्यासी अखाड़े कभी वैष्णव अखाड़ों के साथ नहीं आए। हरिद्वार कुंभ में जिस प्रकार का व्यवहार वैष्णव अखाड़ों के साथ किया गया। उससे आहत होकर अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद के गठन का फैसला लिया गया। उन्होंने कहा कि वैष्णव अखाड़ों के साथ अब तक जो अन्याय हुआ है। उसे जोर-शोर से उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि महाकुंभ समाप्ति की घोषणा करने के बाद अब संन्यासी अखाड़े किस मुंह से शाही स्नान की बात कर रहे हैं।   

अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत राजेंद्रदास महाराज ने कहा कि पूरा साधु समाज आपस में गुरू भाई है, लेकिन अधिकारों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा। वैष्णव संप्रदाय का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि संन्यासी अखाड़ों द्वारा वैष्णव अखाड़ों के साथ जो व्यवहार किया गया। उससे आहत होकर अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से अलग होकर अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद के गठन का निर्णय लिया गया है। जहां कहीं भी वैष्णव संप्रदाय के अधिकारों का हनन होगा पुरजोर तरीके से आवाज उठायी जाएगी।     

रामजन्म भूमि ट्रस्ट में वैष्णव संप्रदाय को कोई स्थान नहीं दिया गया

अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद के कोषाध्यक्ष श्रीमहंत धर्मदास महाराज ने कहा कि रामजन्म भूमि ट्रस्ट में वैष्णव संप्रदाय को कोई स्थान नहीं दिया गया। केवल सन्यांसी अखाड़ों को ही ट्रस्ट में रखा गया है। इस संबंध में अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद पूरे देश में आवाज उठाएगी। 

अखिल भारतीय वैष्णव अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोनीत किए गए श्रीमहंत कृष्णदास नगरिया बाबा ने कहा कि बैरागी संतों को उपेक्षित कर सौतेला व्यवहार किया जा रहा था। जिससे क्षुब्ध होकर समस्त वैष्णव संप्रदाय ने यह निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि वैष्णव संप्रदाय के हितों को ध्यान में रखकर कार्य करते हुए वैष्णव संप्रदाय को उन्नति की और अग्रसर किया जाएगा।

इस अवसर पर महामण्डलेश्वर सांवरिया बाबा, श्रीमहंत दिनेश दास, महंत फूलडोल दास, महंत रास बिहारी दास, महंत गौरीशंकर दास, महंत सनत कुमार दास, महामण्डलेश्वर जनार्दन दास, महंत रामजी दास, महामण्डलेश्वर सेवादास, महामण्डलेश्वर साधना दास, महंत रामशरण दास, महंत प्रेमदास, महंत विष्णु दास, महंत प्रह्लाद दास, महंत रघुवीर दास, ब्रम्हांड गुरू अनंत महाप्रभु, महंत रामदास, महंत मोहन दास खाकी आदि उपस्थित रहे।
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