Haridwar Kumbh Mela 2021: कुंभ मेले की अवधि घटने के संकेत, मुख्यमंत्री लेंगे निर्णय
- मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद मिले संकेत, 27 फरवरी से कुंभ मेले की अधिसूचना जारी नहीं होगी
- अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से वार्ता करने के बाद सरकार लेगी फैसला
- कोरोना महामारी के चलते कोई जोखिम नहीं लेना चाहती सरकार
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विस्तार
हरिद्वार कुंभ मेले के स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसिजर (एसओपी) अर्थात मानक प्रचालन प्रक्रिया जारी करने पर निर्णय मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत लेंगे। इस मसले पर गहन चर्चा के बाद मंत्रिपरिषद ने अंतिम निर्णय लेने का अधिकार मुख्यमंत्री पर छोड़ा है। मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद इस बात के स्पष्ट संकेत हैं कि हरिद्वार कुंभ की अवधि सीमित होगी।
समझा जाता है कि कुंभ के आयोजन को लेकर कोई भी निर्णय मुख्यमंत्री केंद्र सरकार और उच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप लेंगे। वह इस बाबत अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद और प्रमुख साधु संतों से वार्ता भी करेंगे।
माना जा रहा है कि अब प्रदेश सरकार कुंभ मेले की अधिसूचना जारी करने में जल्दबाजी नहीं करेगी। अधिसूचना अब देरी से जारी हो सकती है। अभी तक शहरी विकास विभाग का प्रस्ताव था कि 27 फरवरी से कुंभ मेले की अधिसूचना जारी कर दी जाए। मंगलवार को राज्य सचिवालय में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक ने बताया कि बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की एसओपी और उसके बाद जारी किए गए दिशा-निर्देशों को मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा गया।
साथ ही कुंभ मेले पर हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों की भी जानकारी दी गई। मंत्रिपरिषद ने काफी चर्चा, सोच विचार के बाद मुख्यमंत्री को निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया। मुख्यमंत्री अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद से बात करेंगे और निर्णय लेंगे।
अप्रैल में पहले मुख्य स्नान से पहले अधिसूचना संभव
केंद्रीय स्वास्थ्य परिवार कल्याण मंत्रालय ने कुंभ मेले की अवधि कम करने को कहा है। प्रदेश सरकार की 27 फरवरी से कुंभ मेले की अधिसूचना जारी करने की तैयारी है। माना जा रहा है कि जिस दिन सरकार मेले की अधिसूचना जारी करेगी, कुंभ मेले की जिम्मेदारी भी उसके कंधों पर आ जाएगी। ऐसे में सवाल है कि क्या सरकार कुंभ मेले की अवधि को कम कर सकती है। मंत्रिपरिषद की बैठक के बाद यह चर्चा है कि सरकार अप्रैल में पहले मुख्य स्नान से ठीक पहले अधिसूचना जारी कर सकती है।
उलझन में सरकार, सामने कई सवाल
कुंभ मेले को लेकर सरकार उलझन में है। एक ओर आस्था का सवाल है, दूसरी ओर कुंभ मेले में भारी भीड़ जुटने से कोरोना संक्रमण फैलने का खतरा है। ऐसे में सरकार कुछ सवालों में उलझी है।
क्या हर दिन श्रद्धालुओं की संख्या निर्धारित होगी
राज्य सरकार को हर दिन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या को भी निर्धारित करना है ताकि वह कोविड-19 महामारी के संक्रमण को रोकने के लिए सामाजिक दूरी, मास्क का उपयोग और सैनिटाइजेशन के प्रयोग को सहज तरीके सुनिश्चित कर सके लेकिन जानकारों का कहना है कि कुंभ मेले के दौरान सामान्य दिनों में ही लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।
कोविड जांच और निगरानी कैसे होगी
केंद्र सरकार ने राज्य से यह भी कहा है कि कोविड की निगेटिव रिपोर्ट लेकर आने वालों को ही कुंभ मेले में प्रवेश की अनुमति हो। ऐसे में सरकार लाखों श्रद्धालुओं की कोविड रिपोर्ट जांचने और आरटीपीसीआर जांच की व्यवस्था कराने में बड़ी मैनपावर की जरूरत पड़ेगी।
साधु संतों को मनाना क्या आसान होगा
सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती अखाड़ों, साधु व संतों को राजी कराना है। केंद्र सरकार की एसओपी को लागू कराने के लिए साधु संतों का सहयोग सबसे जरूरी है।
दूसरे राज्य कितना सहयोग करेंगे
कुंभ मेले में पूरे देश और विदेश से भी श्रद्धालु आते हैं। इसमें उत्तराखंड सरकार दूसरे राज्यों की सरकारों से सहयोग की अपील कर रही है। सरकार चाहती है कि कुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के पंजीकरण और उनकी कोविड रिपोर्ट के मामले में राज्य सरकारें सहयोग करें। वे अपने राज्यों में ही ऐसी व्यवस्था करें कि वहीं से श्रद्धालु सीमित संख्या में कुंभ मेले में आएं।