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अर्द्धकुंभ: करंट की चपेट में आने से सांड़ की मौत

Mon, 08 Feb 2016 01:04 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, मुनिकीरेती-ऋषिकेश
ब्यूरो / अमर उजाला, मुनिकीरेती-ऋषिकेश Updated Mon, 08 Feb 2016 01:04 PM IST
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haridwar ardhkumbh 2016.

ऋषिकेश के स्वर्गाश्रम क्षेत्र में अर्द्धकुंभ मेला प्रशासन की लापरवाही बेजुबान मवेशियों की जान पर भारी पड़ रही है।

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कुंभ मेला प्रशासन की ओर से विद्युतीकरण के लिए चयनित की गई एजेंसी की कोताही के चलते स्वर्गाश्रम स्थित गीता भवन क्षेत्र में रविवार देर शाम खुले तार से करंट की चपेट में आने से एक तीर्थयात्री बाल-बाल बच गया। जबकि, करंट की चपेट में आने से वहीं घूम रहे एक सांड़ की मौत हो गई। आनन-फानन में स्थानीय लोगों ने ऊर्जा निगम कार्यालय को सूचना देकर मौके पर विद्युत आपूर्ति बंद कराई।

अर्द्धकुंभ मेले में व्यवस्थाओं को लेकर मेला प्रशासन गंभीर नहीं है। इसका खामियाजा लोगों को भुगतना पड़ रहा है। तीर्थनगरी का तीर्थ क्षेत्र लक्ष्मणझूला और स्वर्गाश्रम कुंभ मेले के तहत की गई चाइनीज लाइटिंग व्यवस्था से जगमगा रहा है। लेकिन क्षेत्र में रात के समय विद्युतीकरण से आकर्षण पैदा करने के फेर में संबंधित विभाग ने जगह-जगह बिजली के तारों को नंगा छोड़ दिया है।
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इससे कभी भी किसी बड़ी अनहोनी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। विभागीय लापरवाही के चलते रविवार देर शाम एक सांड़ खुली तारों की चपेट में आ गया। इस दौरान सांड़ को बचाने के चक्कर में एक तीर्थयात्री की जान बाल-बाल बच गई। इस तरह की लापरवाही से स्थानीय लोगों में मेला प्रशासन के प्रति आक्रोश व्याप्त है।
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स्थानीय निवासी किशन राजपूत ने बताया कि स्वर्गाश्रम क्षेत्र में मेला प्रशासन की ओर से कई जगह बिजली की तारें खुली छोड़ दी गई हैं। इनसे खतरे की आशंका के मद्देनजर कई बार सुरक्षात्मक उपाय के लिए मेला प्रशासन को कहा जा चुका है। लेकिन विभाग और प्रशासन के नुमाइंदे लापरवाह बने हुए हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि मेला प्रशासन और बिजली का कार्य कर रही एजेंसी ने कोताही बंद नहीं की तो मेला काल में अधिक भीड़भाड़ होने पर कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।

मामला संज्ञान में नहीं है। यदि इस तरह की लापरवाही बरती गई है तो लाइटिंग का कार्य करने वाली संबंधित एजेंसी को निर्देशित कर समस्या का शीघ्र समाधान किया जाएगा।
- अवधेश कुमार, अपर मेलाधिकारी, अर्द्धकुंभ मेला

मेला व्यवस्थाएं जल्द हों चाक चौबंद
श्रद्धालुओं के लिए अर्द्धकुंभ मेले में विभिन्न विभागों की ओर से जुटाई जा रही व्यवस्थाओं का उपजिलाधिकारी नरेंद्रनगर ने जायजा लिया और निर्माण प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने विभागीय अधिकारियों से कार्यों को जल्द पूरा करने और मेला काल में यात्री सुविधाएं चाक चौबंद करने के निर्देश दिए।

रविवार को नगर पालिका मुनिकीरेती सभागार में उपजिलाधिकारी केके मिश्रा ने निकाय, पीडब्लूडी, जल संस्थान, ऊर्जा निगम, सिंचाई विभाग समेत अन्य विभागों के अधिकारियों की बैठक ली। इसमें उन्होंने तीर्थक्षेत्र मुनिकीरेती में अर्द्धकुंभ मेले के तहत श्रद्धालुओं के लिए जुटाई जा रही व्यवस्थाओं को जल्द पूरा करने को कहा।

उन्होंने सोमवार को सोमवती अमावस्या पर्व स्नान के दौरान तीर्थक्षेत्र में उमड़ने वाले श्रद्धालुओं के लिए सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त रखने के निर्देश भी दिए। बैठक में पालिका के अधिशासी अधिकारी बद्री प्रसाद भट्ट, पीडब्लूडी के सहायक अभियंता विवेक सेमवाल, सिंचाई विभाग के एई अभियंता एमएस बलूनी, जलकल अभियंता एवीएस रावत आदि मौजूद थे।

12 अप्रैल को स्नान करेंगी देव डोलियां

अर्द्धकुंभ मेले में 12 अप्रैल को देव डोलियों के गंगा स्नान की तैयारियों को लेकर देव भूमि संस्कृति विरासतीय शोभायात्रा समिति की बैठक हुई। इसमें समिति की ओर से उत्तराखंड के विभिन्न जिलों से आने वाली डोलियों के स्वागत के लिए उप समिति का गठन किया। 12 अप्रैल को देव डोलियों का स्नान हरिद्वार में हरकी पैड़ी में होगा। इससे पहले तीर्थनगरी में राज्य भर से आने वाली देव डोलियों का स्वागत होगा है।

रविवार को नगर पालिका परिसर स्थित स्वर्ण जयंती सभागार में पूर्व मंत्री मोहन सिंह रावत गांववासी की अध्यक्षता में हुई बैठक में कुंभ मेला स्नान पर्व पर तीर्थनगरी में पर्वतीय क्षेत्रों से आने वाली देव डोलियों के स्वागत की रूपरेखा बनाई गई।

इस दौरान गठित उप समिति में नगर पालिकाध्यक्ष दीप शर्मा को अध्यक्ष, राजपाल खरोला सह अध्यक्ष, हर्षवर्धन शर्मा संयोजक, संजय शास्त्री, विनय उनियाल, संदीप शास्त्री को सह संयोजक, रवि शास्त्री, मदन कुमार शर्मा, अनुराग जोशी को प्रचार प्रसार मंत्री चुना गया। जबकि प्राचीन श्री भरत मंदिर के श्री महंत अशोक प्रपन्न शर्मा समेत विभिन्न मठ-मंदिरों के प्रमुखों, महंतों को संरक्षक मंडल में शामिल किया गया।


बैठक में शिक्षाविद् विद्यादत्त रतूड़ी, सरोज डिमरी, दीपक धमांदा, अनीता ममर्गाइं, धीरेंद्र रांगड़, साहित्यकार आरपी डंगवाल, पीतांबर पैन्यूली, आसाराम व्यास, द्वारिका बिष्ट, ऊषा रावत, विशालमणी, गजेंद्र बिष्ट, वेदप्रकाश शर्मा आदि मौजूद थे।

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