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Dehradun News: राजनैतिक वजूद बनाए रखने के लिए हरदा को करनी पड़ रही मशक्कत
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देहरादून। राजनीतिक सिद्धहस्त हरीश रावत को अपना राजनीतिक वजूद बनाए रखने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। उम्र के इस दौर में उन्हें युवा की तरह फुर्ती दिखानी पड़ रही। बेगुनाह साबित करने के लिए कसमें खाने के साथ अपने कार्यकाल की उपलब्धियां गिनानी पड़ रही है।
लगभग तीन माह के बाद देहरादून लौटे पूर्व सीएम हरीश रावत ने दूसरे दिन देहरादून के चार सिद्ध पीठ कालू सिद्ध, लक्ष्मण सिद्ध, माणक सिद्ध और मांडू सिद्ध मंदिर की परिक्रमा कर आशीर्वाद लिया। उनके साथ पूर्व मंत्री गोविंद सिंह कुंजवाल, विधायक हरीश धामी, मनोज तिवारी सहित पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक भी मौजूद रहे। मंदिरों में दर्शन करने के बाद हरीश रावत ने प्रसाद के रूप में हलवा और पूड़ी का वितरण किया।
शारीरिक चुनौतियों से उभरने के साथ ही पीएस चंदन जीना के घर पर ईडी की कार्रवाई से हरीश रावत को असहज होना पड़ा था। 2027 के चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी की मुहिम पर कोई आंच न आए। इसके लिए उन्होंने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफे की पेशकश की थी। हालांकि उनकी इस पेशकश पर राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व ने अभी तक कोई फैसला लिया है। 60 दशक के राजनीतिक वजूद बनाए रखने के लिए उन्हें भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। उन्होंने चारों सिद्ध पीठ में जाकर कांग्रेस को सत्ता में वापस लाने का संकल्प लिया।
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हरीश रावत ने कहा मुश्किल दौर में भी कार्यकर्ताओं का भारी समर्थन मिला है। विषम शारीरिक परिस्थितियों में फंसने के बाद अब उससे बाहर निकला हूं। भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकना का काम कार्यकर्ताओं को करना है। स्वास्थ्य की वजह से काफी समय से राजनीतिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखी थी। राज्य में कांग्रेस की वापसी ही उनका अब लक्ष्य है। जनता अब भाजपा के किसी भी झांसे में आने वाली नहीं है।
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लगभग तीन माह के बाद देहरादून लौटे पूर्व सीएम हरीश रावत ने दूसरे दिन देहरादून के चार सिद्ध पीठ कालू सिद्ध, लक्ष्मण सिद्ध, माणक सिद्ध और मांडू सिद्ध मंदिर की परिक्रमा कर आशीर्वाद लिया। उनके साथ पूर्व मंत्री गोविंद सिंह कुंजवाल, विधायक हरीश धामी, मनोज तिवारी सहित पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक भी मौजूद रहे। मंदिरों में दर्शन करने के बाद हरीश रावत ने प्रसाद के रूप में हलवा और पूड़ी का वितरण किया।
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शारीरिक चुनौतियों से उभरने के साथ ही पीएस चंदन जीना के घर पर ईडी की कार्रवाई से हरीश रावत को असहज होना पड़ा था। 2027 के चुनाव के लिए कांग्रेस पार्टी की मुहिम पर कोई आंच न आए। इसके लिए उन्होंने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफे की पेशकश की थी। हालांकि उनकी इस पेशकश पर राष्ट्रीय और प्रदेश नेतृत्व ने अभी तक कोई फैसला लिया है। 60 दशक के राजनीतिक वजूद बनाए रखने के लिए उन्हें भारी मशक्कत करनी पड़ रही है। उन्होंने चारों सिद्ध पीठ में जाकर कांग्रेस को सत्ता में वापस लाने का संकल्प लिया।
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हरीश रावत ने कहा मुश्किल दौर में भी कार्यकर्ताओं का भारी समर्थन मिला है। विषम शारीरिक परिस्थितियों में फंसने के बाद अब उससे बाहर निकला हूं। भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकना का काम कार्यकर्ताओं को करना है। स्वास्थ्य की वजह से काफी समय से राजनीतिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रखी थी। राज्य में कांग्रेस की वापसी ही उनका अब लक्ष्य है। जनता अब भाजपा के किसी भी झांसे में आने वाली नहीं है।