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पिंडर की गांवों में सौर रोशनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 05 Jul 2018 06:21 PM IST
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दि हंस फाउंडेशन
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संयोजित ग्रामीण विकास कार्यक्रम (आयीवीडीपी) के तहत कुमाऊं और गढ़वाल की सीमा पर स्थित कुछ गांवों को शामिल किया गया है। इसके लिए कुनवारी और बोर बलदा जैसे दुष्कर क्षेत्रों को चुना गया, जो मुख्यधारा से दूरी की वजह से सरकारी विद्युतीकरण योजनाओं से वंचित थे। दि हंस फाउंडेशन ने इन इलाकों तक सौर पैनल द्वारा बिजली पहुंचाने का फैसला किया। विद्युतीकरण से पहले तक इस क्षेत्र की आबादी अंधेरे में अपना जीवन व्यतीत कर रही थी।
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यह निश्चित ही कठिन कार्य था। यहां के गांव पहाड़ी इलाकों में बसे हुए हैं, इसलिए दि हंस फाउंडेशन ने सबसे पहले सेवा प्रदाता को खोजा जो कठोर परिस्थितियों का सामना करते हुए इस कार्य को निष्पादित कर सके। कार्यान्वयन प्रक्रिया के दौरान एक घटना हुई। एक विक्रेता ने कार्य को करने के लिए सहमति दी। लेकिन वहां की चुनौतियों की वजह से उसने कार्य को अधूरा ही छोड़ दिया। वजह थी दिल्ली से यहां पहुंचने में लगने वाला समय। दरअसल यहां पहुंचने में दो दिनों का समय लग जाता है, जिस वजह से सेवा प्रदाता आसानी से काम के लिए तैयार नहीं होते हैं।
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दि हंस फाउंडेशन के प्रतिनिधियों की निरंतर उपस्थिति के कारण यह विद्युतीकरण संभव हो पाया।
फाउंडेशन ने वहां के स्थानीय युवाओं को विद्युतीकरण कार्यों में समर्थन के लिए एकत्रित किया। ग्रामीणों के लिए यह आश्चर्य की बात थी कि बिना किसी लालच के कोई उनकी मदद करने की
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कोशिश कर रहा है। दि हंस फाउंडेशन ने बारिश के बावजूद दो हफ्तों के भीतर दो गांवों का विद्युतीकरण किया। इससे ग्रामीण इतने उत्साहित थे कि उन्होंने घर के बाहर लगे लालटेन को सौर
प्रणालियों की सहायता से रोशन किया। यह दिन उनके लिए छोटी दीवाली से कम नहीं था।
दि हंस फाउंडेशन ने 200 घरेलू सौर पैनलों को स्थापित करके पिंडार घाटी में 3 गांवों और 15 बस्तियों का विद्युतीकरण किया। अभी भी दो गांव तक बिजली पहुंचना बाकी है। इससे इन दूरस्थ गांवों में रहने वालों के समग्र विकास में सहायता हो रही है।