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दून चिड़ियाघर के वन्यजीवों, पक्षियों को गोद लेने को आगे आए सामाजिक, धार्मिक संगठनों के साथ वन्यजीव प्रेमी
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हंस फाउंडेशन ने दून चिड़ियाघर के पशु-पक्षियों और जलीय जंतुओं को गोद लेने की पहल की है। इसके तहत हंस फाउंडेशन सालभर चिड़ियाघर के सभी पक्षियों, वन्यजीवों का खर्च उठाएगा।
वन क्षेत्राधिकारी मोहन सिंह रावत ने बताया कि हंस फाउंडेशन की ओर से चिड़ियाघर के सभी पक्षियों, जिसमें लेडी एमरेस्ट, कोकोटेल, कलीज पीजेंट, प्लम हेडेड पैरट, शंखनूर, इंडियन पैरट, सिल्वर पीजेंट, गोल्डन पीजेंट, रिंगनेक पीजेंट, शुतुरमुर्ग, मोर, हिमालयन वल्चर, उल्लू आदि दो दर्जन से अधिक प्रजातियों के देशी-विदेशी पक्षियों को गोद लिया गया है। इसके अलावा सांपों, मगरमच्छ, घड़ियाल और कछुओं को भी गोद लिया गया है। हंस फाउंडेशन के अलावा वन्यजीव प्रेमियों ने अलग-अलग प्रजातियों के पक्षियों और वन्यजीवों को गोद लिया है। कई आकर्षक रंग-बिरंगे पक्षियों को स्कूली बच्चों ने गोद लिया है।
बच्चों के जन्मदिन पर पक्षियों को गोद ले रहे अभिभावक
कई वन्यजीव प्रेमियों ने अपने बच्चों के जन्मदिन पर चिड़ियाघर के पक्षियों को गोद लिया है। गोद लेने के एवज में अभिभावक एक निश्चित धनराशि चिड़ियाघर प्रशासन के पास जमा कराते हैं। वन क्षेत्राधिकारी मोहन सिंह रावत के अनुसार पिछले कुछ सालों से पक्षियों-वन्यजीवों को गोद लेने की परंपरा मेें तेजी आयी है।
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वन क्षेत्राधिकारी मोहन सिंह रावत ने बताया कि हंस फाउंडेशन की ओर से चिड़ियाघर के सभी पक्षियों, जिसमें लेडी एमरेस्ट, कोकोटेल, कलीज पीजेंट, प्लम हेडेड पैरट, शंखनूर, इंडियन पैरट, सिल्वर पीजेंट, गोल्डन पीजेंट, रिंगनेक पीजेंट, शुतुरमुर्ग, मोर, हिमालयन वल्चर, उल्लू आदि दो दर्जन से अधिक प्रजातियों के देशी-विदेशी पक्षियों को गोद लिया गया है। इसके अलावा सांपों, मगरमच्छ, घड़ियाल और कछुओं को भी गोद लिया गया है। हंस फाउंडेशन के अलावा वन्यजीव प्रेमियों ने अलग-अलग प्रजातियों के पक्षियों और वन्यजीवों को गोद लिया है। कई आकर्षक रंग-बिरंगे पक्षियों को स्कूली बच्चों ने गोद लिया है।
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बच्चों के जन्मदिन पर पक्षियों को गोद ले रहे अभिभावक
कई वन्यजीव प्रेमियों ने अपने बच्चों के जन्मदिन पर चिड़ियाघर के पक्षियों को गोद लिया है। गोद लेने के एवज में अभिभावक एक निश्चित धनराशि चिड़ियाघर प्रशासन के पास जमा कराते हैं। वन क्षेत्राधिकारी मोहन सिंह रावत के अनुसार पिछले कुछ सालों से पक्षियों-वन्यजीवों को गोद लेने की परंपरा मेें तेजी आयी है।
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