118 साल बाद बदला गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय का नाम, अब इस नए नाम से होगी पहचान
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118 साल पुराना गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय अब नए नाम से जाना जाएगा। अब इसे गुरुकुल विद्यापीठ के नाम से जाना जाएगा। इस संबंध में कोर्ट के आदेश पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग गुरुकुल कांगड़ी विवि को पत्र भेजकर दिशा-निर्देश जारी कर चुके हैं।
1902 में गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की स्थापना गंगा किनारे कांगड़ी गांव में की गई थी। गंगा में बाढ़ आने के कारण बाद में इस विश्वविद्यालय को हरिद्वार शहर में स्थापित कर दिया गया था। तब से गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय योग सहित प्राच्य विद्या संकाय के विषयों में देेश-विदेश में ख्याति प्राप्त कर रहा है।
साथ ही गुरुकुल कांगड़ी विवि में विज्ञान के विषयों को पहली बार हिंदी माध्यम में पढ़ाया जाना शुरू किया गया लेकिन कुछ ही समय पहले कोर्ट ने डीम्ड विश्वविद्यालय के साथ विश्वविद्यालय शब्द पर सुनवाई करते हुए इनका नाम बदलने के लिए केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी का आदेशित किया था।
जिसके बाद केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी ने गुरुकुल कांगड़ी विवि का नाम बदलकर गुरुकुल विद्यापीठ करके विवि प्रशासन को पत्र भी पिछले दिनों जारी कर दिया है। अब गुरुकुल कांगड़ी विवि प्रशासन ने विवि का नाम गुरुकुल विद्यापीठ किए जाने के संबंध में विवि की प्रायोजक आर्य प्रतिनिधि सभा दिल्ली, हरियाणा और पंजाब को पत्र जारी किया है।
केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय और यूजीसी की ओर से गुरुकुल कांगड़ी विवि का नाम गुरुकुल विद्यापीठ कर दिया है। विवि प्रशासन की ओर से इस संबंध में विवि की प्रायोजक आर्य प्रतिनिधि सभाओं का पत्र जारी किया गया है। उनकी सहमति के बाद विवि के नाम बदलने को लेकर आगे की कार्यवाही की जाएगी।
- प्रो. दिनेश भट्ट, कुलसचिव-गुरुकुल कांगड़ी विवि