गुरुकुल कांगड़ी विवि में बदलेगी 100 साल पुरानी परंपरा, डिग्री पर नहीं होंगे कुलाधिपति के हस्ताक्षर
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गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय की उपाधियों पर अब कुलाधिपति के हस्ताक्षर नहीं होंगे। इस दिशा में प्रयास करते हुए विवि के शिक्षा पटल में इस संबंध में प्रस्ताव पारित कर लिया गया है। अब विवि के प्रबंध मंडल (बीओएम) में स्वीकृति मिलने के बाद यह प्रस्ताव लागू कर दिया जाएगा।
गुरुकुल कांगड़ी विवि के बीओएम में इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिलने के बाद विश्वविद्यालय की उपाधियों पर कुलाधिपति के हस्ताक्षर किए जाने की करीब एक शताब्दी पुराना परंपरा बदल जाएगा।
इसके बाद विश्वविद्यालय के कुलपति, कुलसचिव के हस्ताक्षरों से ही विवि की उपाधियों को प्रदान किया जाएगा। 1912 में गुरुकुल कांगड़ी से शिक्षा समाप्त कर निकलने वाले स्नातकों का पहला दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया था। अभी तक कुलाधिपति के हस्ताक्षर के बाद ही विवि के दीक्षांत समरोहों में छात्र-छात्राओं को उपाधियां प्रदान की जाती रही हैं।
गुरुकुल कांगड़ी विवि के कुलसचिव प्रो. दिनेश भट्ट ने बताया कि गुरुकुल कांगड़ी विवि की उपाधियों पर कुलाधिपति के हस्ताक्षर किए जाने की यह प्राचीन परंपरा है। विवि में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़कर हजारों में पहुंच गई है।
इन सभी मामले को देखते हुए विवि की शिक्षा पटल में कुलाधिपति के हस्ताक्षर के बिना कुलपति और कुलसचिव के हस्ताक्षर से ही विवि की उपाधियों को प्रदान किए जाने का प्रस्ताव पारित किया गया है। अब इस प्रस्ताव को बीओएम में स्वीकृति के लिए लाया जाएगा।