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Dehradun News: अभी पर्दे में रहेंगे गुलदार के शावक, सीजेडए से अनुमति का इंतजार
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रेस्क्यू सेंटर से दून चिड़ियाघर लाए गए गुलदार के दो शावक अभी कुछ दिन पर्दे में रहेंगे। उनके बाड़े को हरे जाल से ढक दिया गया है। ऐसा केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण से अनुमति के इंतजार में किया गया है। अनुमति मिलने के बाद ही इनके बाड़ों से यह जाल हटाया जाएगा।
गौरतलब है कि पिछले सोमवार को चिड़ियापुर स्थित रेस्क्यू सेंटर से एक मादा और एक नर गुलदार शावक को चिड़ियाघर लाया गया था। अगले दिन से पर्यटक इनके दीदार भी करने लगे थे। लेकिन, अभी दो दिन पहले अचानक से इनके बाड़ों पर हरा जाल लगा दिया गया है। इससे पर्यटक बाड़ों की ओर जा तो रहे हैं, मगर शावकों के दीदार नहीं कर पा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इसके लिए पहले केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की अनुमति की आवश्यकता है। वन विभाग के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक डिस्प्ले अनुमति न मिलने के कारण ही यह कदम उठाया गया है।
बताया जा रहा है कि इसकी डिस्प्ले अनुमति अगले सप्ताह तक आने की उम्मीद है। इसके बाद पर्यटकों को दिखाने के लिए बाड़ों से जाल हटा दिया जाएगा। इन शावकों में एक 11 महीने की मादा है और दूसरा आठ महीने का नर है। इनमें से एक को रुद्रप्रयाग से रेस्क्यू सेंटर में लाया गया था। जबकि, नर शावक को हरिद्वार के एक गांव से पकड़ा गया था। इन दोनों को चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर में रुकसाना और तहसीम नाम दिया गया था। हालांकि, उनके ये नाम दस्तावेजों में दर्ज नहीं हैं। उन्हें चिड़ियाघर में नए नाम दिए जाने हैं।
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गौरतलब है कि पिछले सोमवार को चिड़ियापुर स्थित रेस्क्यू सेंटर से एक मादा और एक नर गुलदार शावक को चिड़ियाघर लाया गया था। अगले दिन से पर्यटक इनके दीदार भी करने लगे थे। लेकिन, अभी दो दिन पहले अचानक से इनके बाड़ों पर हरा जाल लगा दिया गया है। इससे पर्यटक बाड़ों की ओर जा तो रहे हैं, मगर शावकों के दीदार नहीं कर पा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इसके लिए पहले केंद्रीय चिड़ियाघर प्राधिकरण की अनुमति की आवश्यकता है। वन विभाग के अधिकारिक सूत्रों के मुताबिक डिस्प्ले अनुमति न मिलने के कारण ही यह कदम उठाया गया है।
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बताया जा रहा है कि इसकी डिस्प्ले अनुमति अगले सप्ताह तक आने की उम्मीद है। इसके बाद पर्यटकों को दिखाने के लिए बाड़ों से जाल हटा दिया जाएगा। इन शावकों में एक 11 महीने की मादा है और दूसरा आठ महीने का नर है। इनमें से एक को रुद्रप्रयाग से रेस्क्यू सेंटर में लाया गया था। जबकि, नर शावक को हरिद्वार के एक गांव से पकड़ा गया था। इन दोनों को चिड़ियापुर रेस्क्यू सेंटर में रुकसाना और तहसीम नाम दिया गया था। हालांकि, उनके ये नाम दस्तावेजों में दर्ज नहीं हैं। उन्हें चिड़ियाघर में नए नाम दिए जाने हैं।
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