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परिवार संभालने के लिए किया ऐसा काम आज पुरुष समाज भी कर रहा सलाम

Tue, 07 Mar 2017 12:01 PM IST
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, हल्द्वानी
विजेंद्र श्रीवास्तव/ अमर उजाला, हल्द्वानी Updated Tue, 07 Mar 2017 12:01 PM IST
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guddi devi sat example for society
guddo devi - फोटो : amar ujala

किसी ने छोटी उम्र में ही परिवार को संभालने की चुनौती का बखूबी सामना किया तो किसी ने सुकोमल, अबला की छवि को ध्वस्त कर कठिन शारीरिक श्रम वाले कामों को बखूबी अंजाम दिया।

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किसी ने अपनी प्रतिभा के दाम पर देश-विदेश में धाक जमाई। हिम्मत, लगन और कठिनाइयों के सामने पस्त न होने वाले जज्बे वाली ऐसी ही कुमाऊं की कर्मठ नारी शक्ति के हुनर के शब्दचित्र प्रस्तुत करती श्रृंखला... अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में...
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आमतौर पर भारी या बोझ उठाने का काम पुरुषों का माना जाता है, लेकिन काठगोदाम रेलवे स्टेशन पर तैनात महिला पार्सल पोर्टर गुड्डो देवी की हौसले और हिम्मत के आगे कोई भी भारी से भारी बोझ मायने नहीं रखता है। वह पुरुषों की तरह पीठ पार्सल पर लादने से लेकर ट्राली में खींचती हैं। कुमाऊं के रेलवे स्टेशन में तैनात वह इकलौती महिला पार्सल पोर्टर हैं।  

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अफसर, कर्मचारी भी इनके काम की तारीफ करते हैं

guddi devi sat example for society
नोटबंदी ने बढ़ाई रेलवे की मुश्किल

गुड्डो देवी के पति भी पहले पार्सल विभाग में थे, उनके निधन के बाद 2006 में गुड्डो देवी ने बच्चों की परवरिश और परिवार चलाने के लिए काम संभाला। वह कहती है कि इस विभाग से उनके पति जुड़े रहे थे। इसके अलावा पार्सल पोर्टर की जिम्मेदारी ली। सोचा काम जैसा भी होगा, उसे हर हाल में किया जाएगा।

गुड्डो ने अन्य सहकर्मी पुरुष साथियों की तरह बोझ उठाना शुरू किया। अब यह उनके रूटीन में शामिल हो गया है। कुछ बोझ को पीठ पर कुछ को ट्राली के जरिए ट्रेनों से पार्सल घर में या पार्सल घर से ट्रेनों में पहुंचाती हैं। वह अब तक सैकड़ों पार्सल की लोडिंग, अन लोडिंग कर चुकी हैं। रेलवे के अफसर, कर्मचारी भी उनके काम की तारीफ करते हैं।

पुरस्कृत भी किया गया। काठगोदाम रेलवे स्टेशन प्रबंधक चयन राय कहते हैं कि कुमाऊं के स्टेशनों में गुड्डों देवी एकमात्र पार्सल पोर्टर हैं। बोझ उठाने और काम करने में पीछे नहीं है। यह सभी के लिए गर्व की बात है। ज्ञात हो कि रेलवे ने शताब्दी ट्रेन में भी महिलाओं को सहायक लोको पायलेट के तौर पर तैनाती दी है।

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