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Dehradun News: बाघ और भालू को गोद लेने का बढ़ रहा क्रेज
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वन्यजीव संरक्षण की दिशा में सकारात्मक पहल के रूप में एनीमल एडॉप्शन कार्यक्रम लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। देहरादून जू में सालाना 50 हजार रुपये देकर बाघ और भालू को गोद लेना लोगों की पसंद बन रहा है। इतना ही नहीं जू में इस साल अब तक सात लोग नौ वन्यजीवों को गोद ले चुके हैं।
कार्यक्रम के तहत चीता और हिमालयन ब्लैक बियर सबसे अधिक पसंद किए जा रहे हैं। दोनों ही प्रजातियों को गोद लेने की राशि 50 हजार रुपये निर्धारित है। इसके अलावा तेंदुआ (25 हजार रुपये) और सांप (20 हजार रुपये) को भी गोद लिया जा रहा है। रंग-बिरंगे और विदेशी पक्षी भी लोगों की पसंद में शामिल हैं। मैकॉऊ के लिए 15 हजार रुपये, जबकि चील, गिद्ध, मगरमच्छ और मोर जैसे वन्यजीवों के लिए 10 हजार रुपये की राशि निर्धारित की गई है। वहीं चित्तीदार हिरण, तीतर, एमू और कछुआ जैसे छोटे जीवों को पांच हजार रुपये में गोद लिया जा सकता है। जू की वन क्षेत्राधिकारी दीक्षा भट्ट ने बताया कि लोग सीधे निर्धारित राशि जमा कर वन्यजीव को गोद ले सकते हैं। एक ही वन्यजीव को एक से अधिक व्यक्ति भी गोद ले सकते हैं। गोद लेने वाले व्यक्तियों को विभाग की ओर से एडॉप्शन सर्टिफिकेट और स्मृति चिह्न प्रदान किया जाता है। साथ ही संबंधित वन्यजीव के एनक्लोजर पर गोद लेने वाले का नाम प्रदर्शित किया जाता है। इसके अलावा फ्री एंट्री पास भी दिया जाता है। साथ ही आयकर अधिनियम की धारा 80जी के तहत कर में छूट का लाभ भी मिलता है। कहा कि गोद लेने से प्राप्त राशि का उपयोग संबंधित वन्यजीव के भोजन, आवास और स्वास्थ्य देखभाल में इस्तेमाल की जाती है। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में इस पूरी प्रक्रिया को संचालित किया जाता है। इस पहल के माध्यम से आम नागरिक भी वन्यजीवों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।
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कार्यक्रम के तहत चीता और हिमालयन ब्लैक बियर सबसे अधिक पसंद किए जा रहे हैं। दोनों ही प्रजातियों को गोद लेने की राशि 50 हजार रुपये निर्धारित है। इसके अलावा तेंदुआ (25 हजार रुपये) और सांप (20 हजार रुपये) को भी गोद लिया जा रहा है। रंग-बिरंगे और विदेशी पक्षी भी लोगों की पसंद में शामिल हैं। मैकॉऊ के लिए 15 हजार रुपये, जबकि चील, गिद्ध, मगरमच्छ और मोर जैसे वन्यजीवों के लिए 10 हजार रुपये की राशि निर्धारित की गई है। वहीं चित्तीदार हिरण, तीतर, एमू और कछुआ जैसे छोटे जीवों को पांच हजार रुपये में गोद लिया जा सकता है। जू की वन क्षेत्राधिकारी दीक्षा भट्ट ने बताया कि लोग सीधे निर्धारित राशि जमा कर वन्यजीव को गोद ले सकते हैं। एक ही वन्यजीव को एक से अधिक व्यक्ति भी गोद ले सकते हैं। गोद लेने वाले व्यक्तियों को विभाग की ओर से एडॉप्शन सर्टिफिकेट और स्मृति चिह्न प्रदान किया जाता है। साथ ही संबंधित वन्यजीव के एनक्लोजर पर गोद लेने वाले का नाम प्रदर्शित किया जाता है। इसके अलावा फ्री एंट्री पास भी दिया जाता है। साथ ही आयकर अधिनियम की धारा 80जी के तहत कर में छूट का लाभ भी मिलता है। कहा कि गोद लेने से प्राप्त राशि का उपयोग संबंधित वन्यजीव के भोजन, आवास और स्वास्थ्य देखभाल में इस्तेमाल की जाती है। वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में इस पूरी प्रक्रिया को संचालित किया जाता है। इस पहल के माध्यम से आम नागरिक भी वन्यजीवों के संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभा रहे हैं।
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