सीएम त्रिवेंद्र ने किया एलान, समूह ‘ग’ में हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएगी सरकार
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उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के तहत भरे जाने वाले समूह ‘ग’ के पदों के मामले में उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ प्रदेश सरकार सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुज्ञा याचिका (एसएलपी) दायर करेगी। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि स्थानीय बेरोजगारों के हितों के लिए सरकार सर्वोच्च न्यायालय जाएगी।
उच्च न्यायालय ने खंडपीठ ने अधीनस्थ सेवा चयन आयोग को समूह ‘ग’ के पदों की भर्ती प्रक्रिया में रोजगार कार्यालय के पंजीकरण की शर्त हटाने का आदेश दिया है। न्यायालय के इस आदेश से आयोग की भर्ती प्रक्रिया में स्थानीय अभ्यर्थियों का एकाधिकार खत्म हो जाएगा।
इस दौरान पहली बार मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की इस मामले में प्रतिक्रिया सामने आई है। उन्होंने साफ किया कि सरकार स्थानीय बेरोजगारों के हितों को प्रभावित नहीं होने देगी और सर्वोच्च न्यायालय जाएगी।
दूसरे राज्यों की भर्ती प्रक्रिया की रिपोर्ट मांगी
उन्होंने कहा कि पूरे मामले के न्यायिक पहलुओं का अध्ययन किया जा रहा है। जो भी जरूरी होगा, वो सरकार करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार हाईकोर्ट की खंडपीठ के फैसले के खिलाफ एसएलपी में जाएगी। उधर, कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने आरोप लगाया है कि उत्तराखंड उच्च न्यायालय में सरकारी वकीलों की कमजोर पैरवी के चलते समूह ‘ग’ के पद भी राज्य निवासियों के लिए सुरक्षित नहीं रह गए हैं।
अदालत का फैसला आने के बाद कार्मिक विभाग ने न्याय विभाग से जहां कानूनी सलाह मांगी है, वहीं विभाग उन राज्यों की समूह ‘ग’ की भर्ती प्रक्रिया का भी अध्ययन कर रही है, जहां स्थानीय युवाओं के हित सुरक्षित रखे गए हैं। अपर मुख्य सचिव कार्मिक राधा रतूड़ी ने इसकी पुष्टि की है। सूत्रों के मुताबिक, पड़ोसी राज्य उत्तरप्रदेश, हिमाचल के अलावा पंजाब, हरियाणा और अन्य प्रदेशों में समूह ‘ग’ की भर्ती प्रक्रिया के संबंध में रिपोर्ट तैयार की जा रही है। सरकार आश्वस्त है कि उससे स्थानीय अभ्यर्थियों को राहत देने का कोई न कोई रास्ता मिल जाएगा।