{"_id":"5b5c872b4f1c1b48748b7823","slug":"government-will-now-develop-clan-point","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"अब गोत्र स्थलों को विकसित करेगी सरकार, क्या आप जानते हैं गोत्र से जुड़ी यह खास परंपरा ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब गोत्र स्थलों को विकसित करेगी सरकार, क्या आप जानते हैं गोत्र से जुड़ी यह खास परंपरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
Updated Sat, 28 Jul 2018 08:53 PM IST
विज्ञापन
uttarakhand
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
उत्तराखंड में सरकार अब गोत्र स्थलों को विकसित करेगी।
विज्ञापन
इन स्थलों में धार्मिक और सांस्कृतिक दोनों लिहाज से सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा। सरकार का मानना है कि अगस्त्यमुनि समेत तमाम स्थान उत्तराखंड में ऐसे हैं, जहां पर संबंधित ऋषि-मुनियों का गहरा नाता रहा है। इनसे संबंधित स्थलों को विकसित कर देश-दुनिया के सामने लाने का प्रयास होगा, ताकि लोगों की वहां पर आवाजाही बढे़।
सरकार शाक्य, शैव, भगवती सर्किट विकसित करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। अब गोत्र स्थलों को विकसित करने की योजना पर सरकार काम करने जा रही है। धर्मस्व और संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज के अनुसार, सरकार गोत्र स्थलों को विकसित करने जा रही है। इसके लिए रूपरेखा जल्द ही तैयार की जाएगी। देश-दुनिया के तमाम लोग चाहते हैं कि वे जिन गोत्रों से संबंधित हैं, उनसे संबंधित जगहों पर वे जाएं, उसे देखें और सुकून महसूस करें।
विज्ञापन
क्या है गोत्र
a
हिंदु धर्म के भीतर गोत्र जाति विशेष से जुड़ी वंश परंपरा है। इसमें पारस्परिक विवाह संबंध वर्जित माना जाता है। यह मान्यता है कि एक गोत्र में शामिल सभी लोग आपस में मिथकीय पूर्वज की संतान होते हैं। इसलिए उनके बीच विवाह संबंध नहीं हो सकते।
हिंदुओं में वैवाहिक संबंध स्थापित करते समय गौत्र एक महत्वपूर्ण तथ्य होता है। प्रमुख तौर पर अत्रि, भारद्वाज, भृगु, गौतम, कश्यप, वशिष्ठ, विश्वामित्र और अगस्त्य गोत्र माने गए हैं।
हिंदुओं में वैवाहिक संबंध स्थापित करते समय गौत्र एक महत्वपूर्ण तथ्य होता है। प्रमुख तौर पर अत्रि, भारद्वाज, भृगु, गौतम, कश्यप, वशिष्ठ, विश्वामित्र और अगस्त्य गोत्र माने गए हैं।