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सरकारी सवारी अब अफसरों की जेब पर पड़ेगी भारी

Fri, 23 Jun 2017 09:43 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून Updated Fri, 23 Jun 2017 09:43 AM IST
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government vehicle more coastly for officer
कार - फोटो : file photo

राजकीय सेवा के अधिकारियों को शासन ने मितव्ययिता का झटका दिया है। सरकारी सवारी अब उनकी जेब पर चार गुना भारी पड़ेगी।

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सरकारी वाहनों का वे निजी इस्तेमाल तो करते रहेंगे, मगर इसके एवज में उन्हें अब 2000 रुपये महीना अपनी तनख्वाह से कटाना होगा। वित्त  विभाग ने इस संबंध में शासनादेश जारी कर दिया है।
 
प्रमुख सचिव वित्त राधा रतूड़ी द्वारा जारी ये आदेश शासन व विभागों में तैनात अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, प्रभारी सचिव, अपर सचिव, सभी विभाग प्रमुख एवं कार्यालय प्रमुख समेत उन सभी अधिकारियों पर लागू होंगे, जिन्हें राजकीय वाहन अनुमन्य हैं। सूत्रों की मानें तो ये आदेश एक मई से प्रभावी हो चुके हैं। आदेश की तिथि से एक महीना पूर्व से अफसरों को चार गुना राशि कटानी होगी।
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बता दें कि आदेश लागू होने से पूर्व तक सरकारी अफसरों को हर महीने 200 किमी तक राजकीय वाहन के निजी इस्तेमाल के एवज में क्रमश: 500 रुपये और 400 रुपये जमा कराने होते थे। कार के लिए 500 रुपये और जीप वाहन के लिए 400 रुपये निर्धारित थे। मगर अब वित्त विभाग ने अपने इस आदेश में संशोधन किया है। नए संशोधन के अनुसार, अफसरों को अब सरकारी वाहन के निजी इस्तेमाल के लिए हर माह 2000 रुपये तनख्वाह से कटाने होंगे। 
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अफसरों में नाराजगी 
सूत्रों के मुताबिक, शासन के इस निर्णय से कुछ अफसरों में नाराजगी है। उनकी मानें तो राशि में चार गुना की बढ़ोत्तरी की गई है तो किमी में इजाफा होना चाहिए था। इस निर्णय में सर्वोच्च पद पर बैठे अफसरों से लेकर निचले स्तर तक के सभी अधिकारियों के लिए एक ही दर तय निर्धारित की गई है, जो तर्कसंगत नहीं है।


उनका कहना है कि जब जिला स्तर के अधिकारियों को चार-पांच लाख रुपये, सीडीओ, जिलाधिकारी, अपर सचिव सात लाख रुपये तक, सचिव, विभागाध्यक्ष दस लाख से 13 लाख तक और मुख्य सचिव 15 लाख तक की गाड़ियों का प्रयोग करते हैं। ऐसे में इसी क्रम में ही सरकारी वाहनों के निजी इस्तेमाल पर भी ये नियम लागू होना चाहिए। 

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