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बीआरओ के 'सड़क' पर सरकार का रोल बैक

Tue, 24 Dec 2013 09:59 AM IST
अमर उजाला, देहरादून
अमर उजाला, देहरादून Updated Tue, 24 Dec 2013 09:59 AM IST
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government roll back on bro road

उत्तराखंड में बीआरओ से सड़क छीनने के मामले में अब प्रदेश सरकार को रोल बैक करना पड़ा है। सोमवार को सरकार ने बीआरओ के पास ही सड़के रहने देने का फैसला किया।

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मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने इसकी पुष्टि की। हालांकि इससे पहले सरकार बीआरओ पर सुस्ती का आरोप लगाते हुए बीआरओ की सड़कों को लोक निर्माण विभाग को देने की मांग कर रही थी।
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बीआरओ के पास 1000 किमी सड़क
बीआरओ के पास प्रदेश में करीब एक हजार किलोमीटर सड़क है। चारो धामों के यात्रा मार्ग भी बीआरओ के पास ही हैं। सरकार का कहना था कि चार धाम यात्रा मार्ग के पुनर्निर्माण की रफ्तार बेहद सुस्त है।

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राज्य सरकार केंद्र से मांग करने वाली थी कि इन सड़कों को राज्य सरकार को दे दिया जाए जिससे इन सड़कों के निर्माण में तेजी आ सके। सरकार के इस फैसले का स्थानीय लोगों ने जम कर विरोध किया था।

राज्यपाल तक पहुंची शिकायत
सोमवार को केदारनाथ विस्थापन एवं पुनर्निर्माण संघर्ष समिति ने इस मामले में मुख्य सचिव सुभाष कुमार से भी बात की। केदार घाटी से अजेंद्र अजय और पूर्व विधायक आशा नौटियाल के साथ आए प्रतिनिधिमंडल ने साफ कहा कि बीआरओ से सड़क छीनी गई तो विरोध होगा। इस पर मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने मुख्य मंत्री से बात की।


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मुख्य सचिव ने बताया कि बीआरओ से सड़क लेने का फैसला वापस ले लिया है। अजेंद्र अजय के मुताबिक इस मामले की शिकायत राज्यपाल से भी की गई थी। अजेंद्र अजय ने सरकार के फैसला पलटने को संघर्ष समिति की जीत बताया।

उन्होंने कहा कि सरकार को बीआरओ से सड़क छीनने में ऊर्जा लगाने की बजाय बीआरओ को बजट दिलाने में ताकत लगानी चाहिए।

अपनी सड़कें संभालें पीडब्ल्यूडी
सोमवार को मुख्य सचिव से मिलने सचिवालय पहुंचे केदार संघर्ष समिति के लोगों ने कहा कि पीडब्ल्यूडी से अपनी सड़कें तो संभल ही नहीं रही और वो बीआरओ की सड़क लेने की योजना बना रहा है।

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केदारनाथ-गुप्तकाशी करीब सात किलोमीटर, डडोली-मयाली-गुप्तकाशी करीब 35 किलोमीटर, गुप्तकाशी-जाखधार, उखीमठ-रासी, घुत्तु-तुलंगा, कालीमठ-चौमासी जैसी कई सड़कें हैं जिनपर लोग जान हथेली पर रखकर यात्रा कर रहे हैं। इन सड़कों को अभी तक पीडब्ल्यूडी नहीं सुधार पाया है।

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