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केदारनाथ वन्य विहार के लिए ‘इनसेंसिटिव’ महकमा
रजा शास्त्री/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Mon, 03 Aug 2015 04:31 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उत्तराखंड के सात वन्य जीव विहारों के चारों तरफ पर्यावरण संवेदी क्षेत्र बनाए जा रहे हैं।
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वन मंत्री दिनेश अग्रवाल ने शनिवार को इस संबंध में मसूरी में अफसरों के साथ बैठक भी की। इन्हीं वन्य जीव विहारों में एक केदारनाथ भी है, लेकिन सवाल है कि केदारनाथ वन्य जीव विहार के प्रति महकमा ‘इनसेंसिटिव’ क्यों बना रहा?
यहां एक हेलीकॉप्टर कंपनी औसत एक दिन में 30 उड़ानें भरती है। उप वन संरक्षक आकाश वर्मा की रिपोर्ट में दर्ज अगर 9 हेलीकॉप्टर कंपनियों की उड़ानों का औसत निकाला जाए तो दिन में 275 उड़ानें आती हैं। ये हालात सिर्फ एक दिन या हफ्ते के नहीं हैं।
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पूरे दो साल से यह स्थिति है। उप वन संरक्षक, वन प्रभाग गोपेश्वर आकाश वर्मा ने 1 जून 2013 को प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक को जो रिपोर्ट भेजी थी उसमें बताया गया कि 9 हेलीकॉप्टर कंपनियों को नोटिस भेजी गई। उनमें से दो ने नोटिस का जवाब दिया था।
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इनमें एक प्रभातम एविएशन लिमिटेड ने ब्योरा दिया था कि 15 से 27 मई 2013 के बीच 245 उड़ानें भरी गईं। इससे 1350 यात्रियों ने सफर किया। बाकी कंपनियों ने ब्योरा नहीं दिया था। अगर इस आधार पर आंकड़ा निकाला जाए तो औसत 275 उड़ानें प्रतिदिन आती हैं। वनाधिकारियों का कहना है कि उड़ानों की संख्या अधिक भी हो सकती है।
उप वन संरक्षक आकाश वर्मा का कहना है कि दो साल से स्थिति एक जैसी ही है। वन्य प्राणि एक-दो बार तो तेज ध्वनि बर्दाश्त कर लेता है लेकिन जब लगातार इतनी तेज ध्वनि आती है तो घबराकर भाग जाएगा। 100 मीटर ऊंचाई पर जब हेलीकॉप्टर उड़ेगा तो बहुत तेज आवाज आएगी।
उन्होंने कहा कि न्यूजीलैंड और अमेरिका के वन्य विहारों पर हेलीकॉप्टरों की उड़ानों से पड़ने वाले दुष्प्रभाव पर शोध भी हुए हैं। वन्य जीवों पर दुष्प्रभावों की वजह से हेलीकॉप्टर सर्विस बंद करनी पड़ी।
प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक दिग्विजय सिंह खाती ने बताया कि प्रदेश के सात वन्य जीव विहार और छह राष्ट्रीय वन्य जीव पार्क के चारों तरफ इको सेंसिटिव जोन बना है। यहां उद्योग और दूसरी व्यापारिक गतिविधियां रोकी जाएंगी।
मैंने प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक दिग्विजय सिंह खाती को आदेश कर दिए हैं कि पूरे क्षेत्र का एक बार सर्वेक्षण कराकर जल्दी से जल्दी रिपोर्ट दी जाए। इसके बाद समस्या से निराकरण के लिए जो उचित होगा, निर्णय लिया जाएगा।
- दिनेश अग्रवाल, वन मंत्री
एनओसी का मामला दिखवा रहा हूं। अभी बाहर (गुजरात) जा रहा हूं। एक हफ्ते बाद लौटूंगा। फिर इस मामले में तय करूंगा, क्या करना है?
- दिग्विजय सिंह खाती, प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक, उत्तराखंड
हेलीकॉप्टर कंपनियों ने एनओसी नहीं ली, क्या कार्रवाई की?
-यह प्रमुख वन्य जीव प्रतिपालक का अधिकार क्षेत्र है।
वन्य जीव प्रतिपालक भी तो आपके अंडर में आते हैं?
-हां, आते तो हैं।
आप स्टेट वाइल्ड लाइफ बोर्ड के सदस्य भी हैं, कैसे उड़ान का आदेश कर दिया?
-सदस्य तो हूं, लेकिन अभी राज्य एविएशन के संबंध में नियम नहीं हैं। नियम बनाए जाएंगे।
नियम क्यों नहीं बनाए जा रहे हैं?
-नियम बनाने के पहले वैज्ञानिक अध्ययन कराएंगे। इसके बाद नियम बनाए जाएंगे।
(एसके चंदोला, प्रमुख वन संरक्षक, उत्तराखंड)