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गंगा की निर्मलता पर सरकार कुंभ से पहले लागू कर सकती है फैसला

Thu, 16 Jul 2020 11:52 PM IST
Dehradun Bureau देहरादून ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2020 11:52 PM IST
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Government can implement decision on Ganga cleanliness before Kumbh
हरकी पैड़ी पर बह रही गंगा की धारा को नहर (स्कैप चैनल) घोषित करने के शासनादेश को खत्म करने के लिए प्रदेश सरकार बीच का रास्ता तलाश करने में जुट गई है। भाजपा सरकार की कोशिश है कि लोगों की आस्था का भी सम्मान हो जाए और हाईकोर्ट व एनजीटी के आदेशों का पालन करते हुए गंगा तट से दो सौ मीटर के दायरे में बने भवनों को भी बचाया जाए।
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2017 में सरकार बनाने के बाद मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जब हरकी पैड़ी पर गंगा पूजन करने आए तो गंगा सभा ने गंगा को नहर घोषित करने वाले शासनादेश को तत्काल निरस्त करने की मांग की थी। तब मुख्यमंत्री ने पहली ही बैठक में इस शासनादेश को निरस्त करने की बात कही थी। इसके बाद गंगा सभा, अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा, अन्य संगठन सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से मिलकर इस शासनादेश बदलने की मांग करते रहे। गंगा सभा के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी के नेतृत्व में हरकी पैड़ी पर आंदोलन की तैयारी है। वही गंगा सभा इस विषय को लेकर सुप्रीमकोर्ट जाने के की तैयारी कर रही है। इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने संतों के बीच अपनी गलती की माफी मांगकर त्रिवेंद्र सरकार पर फैसला बदलने का दबाव बढ़ा दिया।
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कांग्रेस की हरीश रावत सरकार ने यह फैसला लेकर आस्था से खिलवाड़ किया था। भाजपा सरकार इस फैसले को बदलकर करोड़ों लोगों की आस्था का सम्मान करेगी। सरकार तमाम कानूनी पहलुओं पर बात कर चुकी है।
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- मदन कौशिक, शहरी विकास मंत्री
यह है पूरा मामला
गंगातट से दो सौ मीटर के दायरे में नए निर्माण पर रोक का मामला उत्तर प्रदेश के समय से चला आ रहा है। जानकारी के अनुसार सबसे पहले 1997-98 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गंगा के किनारे किसी भी तरह के नए निर्माण पर रोक लगाने के आदेश दिए थे। दो साल बाद उत्तराखंड बन जाने के बाद यह आदेश लागू नहीं हो सका। उत्तराखंड बनने के बाद यहां की सरकारों ने भी इस तरफ ध्यान नहीं दिया। इसके बाद 2011-12 में नैनीताल हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए गंगातट से दो सौ मीटर के दायरे में निर्मित भवनों के ध्वस्तीकरण के आदेश दिए थे। इसके बाद गंगा को प्रदूषण से मुक्त करने के लिए नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) भी सक्रिय हो गया। 2015 में एनजीटी ने भी गंगा तट पर नए निर्माण को प्रतिबंधित कर दिया था।
तो होटल लॉबी के दबाव में जारी हुआ था शासनादेश
यह बात किसी से छिपी नहीं कि कई कई धार्मिक संस्थाओं और होटल कारोबारियों ने गंगा में अवैध निर्माण किए हुए हैं। कई आश्रमों और होटलों के पिलर गंगा में हैं। हाईकोर्ट और एनजीटी के आदेश का सबसे ज्यादा असर इनपर ही पड़ना था। गंगा पर बने भवनों को बचाने के लिए मठ मंदिरों के संरक्षक और होटल मालिक एकजुट हो गए। हर साल हरकी पैड़ी और आसपास के क्षेत्र में पुरानी धर्मशालाओं को तोड़कर होटल व अन्य व्यावसायिक भवनों का निर्माण होता है। कोर्ट के आदेश के बाद यह संभव नहीं होता। इसलिए इन सब लोगों ने मिलकर 2016 में तत्कालीन हरीश रावत सरकार से शासनादेश जारी करवाकर हरकी पैड़ी पर बह रही गंगा की धारा को नहर घोषित कर दिया। इस शासनादेश के बाद गंगा के किनारे बने भवन ध्वस्तीकरण की कार्रवाई से बच गए।
नहर घोषित करने वाले शासनादेश को खत्म करने की मांग को लेकर अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा अपने नासिक और मथुरा अधिवेशनों में प्रस्ताव पारित कर चुकी है। अब महासभा आंदोलन को तैयार है। कुंभ से पहले शासनादेश खत्म नहीं किया तो देशभर के पुरोहित हरिद्वार आकर आंदोलन करेंगे ।
- श्रीकांत वशिष्ठ, राष्ट्रीय महामंत्री पुरोहित महासभा।
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शीघ्र अखाड़ा परिषद की बैठक हरिद्वार में होने वाली है। परिषद की बैठक में इस शासनादेश को खत्म करने का प्रस्ताव पास कराया जाएगा। उम्मीद है कि सरकार संतों की राय पर इसे निरस्त करेगी। अन्यथा कुंभ स्नानों के बहिष्कार का निर्णय आगे चलकर लिया जाएगा।

- श्रीमहंत दुर्गा दास, कुंभ मेला प्रभारी, बड़ा अखाड़ा उदासीन।
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गंगा सभा की तो स्थापना ही गंगा मैया के मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष करते हुए महामना मालवीय ने की थी। सभा कई बार मुख्यमंत्री को धर्म जगत की नाराजगी से अवगत करा चुकी है। शासनादेश शीघ्र निरस्त न किया तो लंबा संघर्ष शुरू होगा। गंगा सभा इस मसले को सुप्रीम कोर्ट ले जा रही है।- तन्मय वशिष्ठ, महामंत्री, गंगा सभा।
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