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नैनीताल हाईकोर्ट के न्यायाधीश सरकार से बोले, बच्चों के लिए मेरी तनखा काट लो

Sat, 24 Jun 2017 09:19 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नैनीताल
ब्यूरो/ अमर उजाला, नैनीताल Updated Sat, 24 Jun 2017 09:19 AM IST
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government can cut my salary for children said by nainital high court justice
nainital high court

नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान उस वक्त सन्नाटा छा गया जब जस्‍टिस ने सरकार से कहा कि बच्चों के लिए मेरी तनखा काट लो। जानिए, पूरा मामला...

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दरअसल, हाइकोर्ट ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में सुधार के आदेशों का अनुपालन न होने पर वित्त सचिव और शिक्षा सचिव को कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए थे। 23 जून को दोनों कोर्ट में पेश हुए। शिक्षा सचिव ने कोर्ट को बताया कि 14 फरवरी 2017 को वित्त सचिव को बजट संबंधी प्रस्ताव भेजा गया है।
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फर्नीचर के लिए 118 करोड़, शौचालय के लिए 57 करोड़ व स्वच्छ पानी के लिए आठ करोड़ 12 लाख रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। कोर्ट ने कहा कि इन सभी पर मात्र सौ करोड़ खर्च होंगे। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 28 जून की तिथि नियत की, उस दिन कोर्ट में बताना होगा कि व्यवस्था सुधार के लिए क्या किया गया।

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'चाहे मेरा वेतन आधा कर दें लेकिन बच्चों को बेंच दें'

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वित्त सचिव ने कोर्ट को बताया कि शिक्षा सचिव की ओर से विद्यालयों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए 900 करोड़ रुपये का प्रस्ताव मिला है। इसमें कैबिनेट की संस्तुति आवश्यक है। राज्य की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है और सरकार 900 करोड़ खर्च करने में सक्षम नहीं है। 

इस पर न्यायाधीश राजीव शर्मा ने कहा कि चाहे मेरा वेतन आधा कर दें लेकिन बच्चों को बेंच दें। कोर्ट ने महाधिवक्ता एसएन बाबुलकर को सुझाव दिया कि वह सीएम से बात करें कि बच्चों के लिए वाटर प्यूरीफायर, फर्नीचर व शौचालय की समस्या का समाधान कराएं। इन कार्यों में केवल सौ करोड़ रुपये का ही खर्चा आएगा। उन्होंने आशा की है कि सीएम इस कार्य में महाधिवक्ता का सहयोग करेंगे।
 
कोर्ट ने फर्नीचर, पेयजल व शौचालय के लिए प्राथमिकता के आधार पर सौ करोड़ रुपये की व्यवस्था करने को कहा है। महाधिवक्ता के आग्रह पर कोर्ट ने लग्जरी आइटम खरीद पर लगी रोक में रियायत देते हुए सरकार को विभिन्न विभागों में केवल अति आवश्यक सामग्री की खरीद मुख्य सचिव की अनुमति पर ही करने को कहा है। बृहस्पतिवार को कोर्ट ने स्कूलों में व्यवस्था न होने तक लग्जरी सामान की सरकारी खरीद पर रोक लगा दी थी।

वरिष्ठ राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। देहरादून निवासी दीपक राणा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि समस्त सरकारी स्कूलों की व्यवस्था बहुत खराब है। पूर्व में सुनवाई के बाद कोर्ट ने 19 नवंबर 2016 को दस बिंदुओं पर दिशा-निर्देश जारी किए थे।

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